गुरु जी को एक और जिम्मेवारी, खाली बोरी का भी दें हिसाब
छपरा : विद्यालय में पठन-पाठन के कार्य के अलावे सरकार द्वारा सौपे गये कई दूसरे कार्यों को पूरा करने में हल्कान गुरु जी लोगों को अब एक नयी जिम्मेवारी भी सौप दी गयी है. विद्यालय में मध्याह्न भोजन बनने के लिए आनेवाले चावल की खाली बोरी का हिसाब अब गुरु जी को रखना होगा. खाली […]
छपरा : विद्यालय में पठन-पाठन के कार्य के अलावे सरकार द्वारा सौपे गये कई दूसरे कार्यों को पूरा करने में हल्कान गुरु जी लोगों को अब एक नयी जिम्मेवारी भी सौप दी गयी है. विद्यालय में मध्याह्न भोजन बनने के लिए आनेवाले चावल की खाली बोरी का हिसाब अब गुरु जी को रखना होगा. खाली बोरी के हिसाब से मिलनेवाली राशि को एमडीम योजना के मद में जोड़ कर खर्च किया जायेगा. इस संबंध में मध्याह्न भोजन योजना के राज्य निदेशक हरिहर प्रसाद ने जिला कार्यक्रम पदाधिकारी एमडीएम को पत्र भेज कर यह काम शुरू करने और रेकॉर्ड रखने का निर्देश दिया है.
पत्र के अनुसार विद्यालय में आनेवाले मध्याह्न भोजन योजना के तहत चावल के प्रयोग होने के बाद खाली हुए बोरी को अनिवार्य रूप से जमा कर रखना होगा. उन बोरियों को न्यूनतम 10 रुपये के निर्धारित मूल्य पर बेच कर इसकी राशि को एमडीएम योजना के मद में जमा भी करना होगा.
बोरी को बेचने के बाद मिली राशि का लेखा-जोखा मध्याह्न भोजन रोकर बही में लिखना होगा. इसके साथ-साथ पूर्व से भी प्राप्त बोरी का हिसाब कर 10 रुपये की दर से रोकर बही में लिख कर इस राशि को भी जमा कर इसकी सूचना जिला मुख्यालय में शिक्षकों को भेजनी होगी, जहां से इसकी जानकारी राज्य मुख्यालय को दी जायेगी. इसके अलावा केंद्रीय कृत रसोइघर से परिवहन और ढुलाइ मद से 10 रुपये प्रति खाली बोरी या राज्य खाद्य निगम द्वारा निर्धारित दर से काट कर भुगतान किया जायेगा.
इस राशि को मध्याह्न भोजन योजना के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी द्वारा प्रबंधन, अनुश्रवण एवं मूल्यांकन मद में इस्तेमाल किया जायेगा. निदेशक के इस आदेश के बाद एमडीएम योजना का संपादन करनेवाले शिक्षकों को एक और जिम्मेवारी बढ़ गयी है. बताते चलें कि इसके पूर्व खाली बोरी को ऐसे ही उपयोग में लाया जाता था और इसका हिसाब-किताब भी पूर्ण नहीं रहता था.