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सूरत-ए-हाल. इस स्कूल में प्रतिदिन 125 क्विंटल चावल की खपत!

चावल की खपत पर उठ रहा सवालप्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरीSpies In Mauryan Dynasty : मौर्य काल से ही चल रही है ‘रेकी’ की परंपरा, आज हो तो देश में मच जाता है बवालRajiv Gauba : पटना के सरकारी स्कूल से राजीव गौबा ने की थी पढ़ाई अब बने नीति आयोग के सदस्यUPS: पुरानी पेंशन […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | April 11, 2016 5:59 AM

चावल की खपत पर उठ रहा सवाल

महावीर प्रसाद ढंढालिया मध्य विद्यालय में एमडीडीएम का मामला
बैरगनिया : प्रखंड मुख्यालय स्थित महावीर प्रसाद ढ़ंढ़ालिया मध्य विद्यालय में एमडीएम में प्रतिदिन औसतन 125 क्विंटल चावल बनता है. यह सुनने में हर किसी को भले हीं अटपटा लगे, पर यह सच्चाई है. कहा जा रहा है कि जांच होने पर सब कुछ सामने आ जायेगा. तब यह पता चल जायेगा कि वास्तव में उक्त स्कूल में औसतन कितने बच्चे प्रतिदिन आते हैं और उन पर एमडीएम में कितना चावल व नगद खर्च होगा. बहरहाल, स्कूल प्रबंधन की कार्यशैली पर सवाल खड़ा हो गया है.
बताया गया है कि उक्त स्कूल में करीब 1500 बच्चे नामांकित हैं. 400 से 500 बच्चों की औसतन उपस्थिति रहती है. इसी कारण औसतन प्रतिदिन 125 क्विंटल चावल एमडीएम में खपत होने की बात लोग नहीं पचा पर रहे हैं. और तो और शैक्षणिक प्रभारी सह वरीय शिक्षक गंगा प्रसाद भी अभिलेख में दर्ज चावल के खर्च के आंकड़े को नहीं पचा पा रहे हैं. उन्हें भी बड़ी गड़बड़ी लगती है. कहते हैं कि अधिकारी के स्तर से जांच हो जाने पर सब कुछ स्पष्ट हो जायेगा. बता दें कि कक्षा एक से पांच तक के लिए पांच रुपया प्रति बच्चा एवं कक्षा पांच से सात तक के बच्चों के लिए सात रुपया एमडीएम मद में खर्च को मिलता है. श्री प्रसाद ने आशंका व्यक्त की है कि एमडीएम मद के चावल व राशि का गबन किया जाता रहा है. चावल को लेकर चर्चा तो हैं हीं एमडीएम पर प्रतिदिन नगद खर्च पर भी सवाल खड़ा किया जा रहा है. विद्यालय अभिलेख में दर्ज खर्च पर यकीन करें तो स्कूल में एमडीएम पर चावल को छोड़ औसतन प्रतिदिन 10 हजार खर्च किया जाता रहा है.
वरीय शिक्षक को प्रभार नहीं
यह स्कूल काफी समय से चर्चा में रहा है. शिक्षिका व प्रभारी प्रधान रहीं रेणु श्रीवास्तव द्वारा प्रभार नहीं सौंपे जाने के चलते करीब एक वर्ष से यह स्कूल विशेष रूप से चर्चा में रहा है. श्रीमती श्रीवास्तव 31 मार्च को सेवानिवृत्त हो गयी. वरीय शिक्षक गंगा प्रसाद को सिर्फ शैक्षणिक प्रभार सौंपी. वित्तीय प्रभार नहीं मिलने से एमडीएम बंद था. कहा जा रहा है कि दवाब पड़ने पर श्रीमती श्रीवास्तव छह मई को कनीय शिक्षक राजेंद्र प्रसाद रजक को वित्तीय प्रभार सौंप गयी, जबकि बीइओ ने रेणु श्रीवास्तव को प्रधान का प्रभार गंगा प्रसाद को सौंपने का आदेश दिया था. बावजूद आदेश की अवहेलना कर कनीय शिक्षक को प्रभार सौंपी. इस तरह एक स्कूल में दो-दो प्रधान शिक्षक हैं.
एक प्रभारी प्रधान की दलील
वित्तीय प्रभारी राजेंद्र प्रसाद रजक ने बताया कि वरीय शिक्षक श्री प्रसाद द्वारा वित्तीय प्रभार लेने से इनकार करने पर उन्हें प्रभार लेना पड़ा. इधर, श्री प्रसाद का कहना है कि कैश बुक, पासबुक व अन्य कागजातों को अद्यतन किये बगैर श्रीमती श्रीवास्तव द्वारा वित्तीय प्रभार सौंपी जा रही थी. गड़बड़ी की आशंका के चलते वे प्रभार नहीं लिये.
अधिक निकासी पर आज भी चर्चा
बताया गया है कि वर्ष 2014 में स्कूल से 960 बच्चों के पोशाक राशि व छात्रवृत्ति का प्रस्ताव जिला में भेजा गया था, लेकिन जिला से डिमांड के दो गुणा पैसा स्कूल के खाते में चला आया था. उक्त राशि की निकासी भी कर ली गयी थी. विभाग को वापस नहीं किया गया था. तब इसे ले यह स्कूल चर्चा में बना रहा था. शिक्षक श्री प्रसाद कहते हैं कि आज की तारीख में स्कूल के खातें में जीरो बैलेंस है. खबर मिली है कि एक शिक्षक रंजीत कुमार विगत आठ माह से स्कूल से नदारद हैं. बीइओ अजय कुमार त्रिवेदी के बाहर रहने के कारण इस मामले पर उनसे बात नहीं हो सकी.

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