जनसंख्या नियंत्रण के लिए भी बेटियां ही बन रही हैं तारणहार

शेखपुरा : जगत की जननी कही जाने वाली बेटियां जहां घर की दहलीज लांघ कर दुनिया भर में अपनी पहचान की उड़ान भर रही है. वहीं दूसरी ओर जनसंख्या नियंत्रण की जिम्मेवारियों को भी निभाने में पुरुष प्रधान समाज में यही बेटियों परचम लहरा रही है. जिले में परिवार नियोजन अभियान पर अगर नजर डालें […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |

शेखपुरा : जगत की जननी कही जाने वाली बेटियां जहां घर की दहलीज लांघ कर दुनिया भर में अपनी पहचान की उड़ान भर रही है. वहीं दूसरी ओर जनसंख्या नियंत्रण की जिम्मेवारियों को भी निभाने में पुरुष प्रधान समाज में यही बेटियों परचम लहरा रही है. जिले में परिवार नियोजन अभियान पर अगर नजर डालें तब यहां पिछले पखवारे में जहां 581 महिलाओं ने परिवार नियोजन का ऑपरेशन कराया. वहीं दूसरी ओर पुरुष नसबंदी कराने वालों की संख्या मात्र सात है.

पूरी दुनिया के अंदर जनसंख्या नियंत्रण सबसे बड़ी चुनौती मानी जा रही है. इस चुनौती पर सेमिनार में बहस करने से लेकर जन जागरूकता में बड़ी-बड़ी बातें करने वाले पुरुष अपनी जिम्मेवारी बस उतना ही मानते हैं. परंतु इस बड़े अभियान में अगर अपनी नजरें फेर कर इस जिम्मेवारी को महिलाओं पर थोप देते हैं. जिले केा यह आंकड़ा यह साबित करने के लिए काफी है कि यहां जनसंख्या नियंत्रण के लिए बेटियों ने अपने निजी योगदान से अभियान को सफल बनाया.

राज्य भर में शेखपुरा को अव्वल स्थान दिलाने भी उपलब्धि हासिल की है.पिछले एक दशकों में आये बदलाव पर अगर नजर डालें तब यहां पर के दहलीज से निकल कर महिलाएं घर के बाहर की भी पारिवारिक जिम्मेवारी में बड़े योगदान दे रहे हैं. इन सबों के बीच महिलाएं आज भी परिवार नियोजन ऑपरेशन से बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेकर अंतरराष्ट्रीय मुद्दों में भी अपना मजबूत स्थान बना रही है. जानकारों की मानें तब पुरुषों के नसबंदी कराने के बाद शारीरिक क्षमता में कमी के अंधविश्वास को 20वीं सदी में भी पाल रखे हैं. चिकित्सा जगत की जागरूकता और दावों का उन पर कोई असर नहीं पड़ रहा है.

शायद इसी अंधविश्वास में पुरुष अपने व्यस्तता का बहाना बना कर परिवार नियोजन की जिम्मेवारी महिलाओं पर ही थोप देते हैं. आखिर बाप कहलाने वाले अपने बच्चों के बेहतर परवरिश में कब आगे आयेंगे. यह बड़ा सवाल है. जनसंख्या नियंत्रण का राज हर से जुड़ा. आधुनिकता के इस दौर में सीमित संसाधनों में लोगों की जरूरतें असीम है. ऐसे में छोटा परिवार सुखी परिवार का फॉर्मूला सभी घरों को भाने लगा है. लोग अब अपने बच्चों को उच्च तालीम के साथ कामयाब नागरिक बनाने का सपना तो जरूर रखते हैं. मगर इसके लिए सीमित संसाधनों के बीच छोटा परिवार सुखी परिवार का फॉर्मूला अपनाना जरूरी है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

👤 By Prabhat Khabar Digital Desk

Prabhat Khabar Digital Desk

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >