पानी के इंतजार में नींद हो रही गायब

परेशानी. शहर के वार्ड संख्या 13व 14 में पानी खरीद कर पी रहे लोग शहर के वार्ड संख्या 13 एवं 14 में शहरी जलापूर्ति योजना के तहत पाइप लाइन तो बिछाया गया, लेकिन आज तक नियमित रूप से पानी नहीं मिल सका. दोनों मोहल्ले में पिछले दो माह से जलापूर्ति ठप सा है. लगभग पांच […]

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परेशानी. शहर के वार्ड संख्या 13व 14 में पानी खरीद कर पी रहे लोग

शहर के वार्ड संख्या 13 एवं 14 में शहरी जलापूर्ति योजना के तहत पाइप लाइन तो बिछाया गया, लेकिन आज तक नियमित रूप से पानी नहीं मिल सका. दोनों मोहल्ले में पिछले दो माह से जलापूर्ति ठप सा है. लगभग पांच हजार की अल्पसंख्यक बाहुल्य आबादी वाले क्षेत्र में पानी की जरूरतों के लिए पड़ोस के वार्डों का चक्कर लगाते हैं.
पढ़ाई छोड़ पानी की जुगाड़ में बच्चे कर रहे मशक्कत
शेखपुरा : भाई साहब पूरे दिन कामकाज के बाद थकान तो हो जाती है मगर पानी की चिंता से नींद भी नहीं आती.
यूं तो शहर के वार्ड संख्या 13 एवं 14 में शहरी जलापूर्ति योजना के तहत पाइप लाइन तो बिछाया गया, लेकिन आज तक नियमित रूप से पानी नहीं मिल सका. दोनों मोहल्ले में पिछले दो माह से जलापूर्ति ठप सा है. लगभग पांच हजार की अल्पसंख्यक बाहुल्य आबादी वाले क्षेत्र में पानी की जरूरतों के लिए पड़ोस के वार्डों का चक्कर लगाते हैं.
या तो पांच सौ रुपये महीना चुका कर निजी बोरिंग से पाइप के जरिये पानी की आपूर्ति करते हैं. टोले में पुरुष और बच्चे तो मस्जिद, मंदिर अथवा सार्वजनिक स्थानों पर लगे चापाकलों पर स्नान करने से लेकर कपड़े धोने का काम करते हैं. दोनों वार्डों में जल संकट की जड़ में शहरी जलापूर्ति में विसंगति को लोग बताते हैं.
स्थानीय लोगों की मानें तब टोले से थोड़े ही दूर सर्किट हाउस के समक्ष जलमीनार है. लेकिन उक्त टोले को लगभग दो किमी दूर इंडोर स्टेडियम से पानी की आपूर्ति की जा रही है. ऐसे में अगर निगरानी के साथ पानी का सही प्रेसर दिया जाता है तब पानी तो मिलता है अन्यथा नहीं. पिछले दो माह से एक दिन भी पानी नहीं मिल सका.
दोनों वार्डों के लिए चार चापाकल :
शहर के अहियापुर और सकुनत मोहल्ले में जल संकट की भीषण समस्याओं को लेकर दोनों वार्डों में त्राहिमाम है. स्थानीय लोगों की मानें तब यहां सभी कुएं सूख चुके हैं. मात्र चार सरकारी चापाकलों के सहायक चापाकलों से पानी की जरूरतें पूरी कर रहा है.
छूट रही पढ़ाई :
सुबह और शाम का वक्त जब बच्चों को स्कूल जाने का वक्त होता है, तब वहां अपने घर में पानी की जरूरतें पूरी करने के लिए चापाकलों पर लंबी कतार में खड़े होने को विवश है. दूसरे वार्डों से पानी लाने की होड़ में बच्चों की पढ़ाई भी बाधित हो रही है.
पानी खरीद रहे लोग :
शहर के वार्ड संख्या 13 एवं 14 में जल संकट से जूझ रही आबादी को पिछले दो माह से शहरी जलापूर्ति से पानी की आपूर्ति नहीं की जा रही है. ऐसा नहीं की यह समस्या आज की है बल्कि यहां लोग पिछले कई सालों से जलापूर्ति के लिए निजी बोरिंग धारकों से घरों में पाइप लगा कर पानी की जरूरतों के लिए प्रत्येक माह पांच सौ रुपये की कीमत अदा कर रहे हैं.
क्या कहते हैं लोग :
‘वार्ड में पानी की आपूर्ति में विभाग दोहरी नीति अपना रहा है. जब-जब मजबूर लोग सड़क पर आंदोलन करते हैं तब-तब कुछ दिनों तक पानी मिलती है. लेकिन फिर सो जाते हैं. ऐसे में उच्च अधिकारियों को ठोस कार्रवाई करनी चाहिए.”
मो. शादाब हैदर, मोबाइल विक्रेता
”लोक वोट के समय तो कई वायदे करते हैं, लेकिन जीतने के बाद झांकना भी पसंद नहीं करते वार्ड 13 और 14 में जो जल संकट का हाहाकार है. अल्लाह ऐसी मुसीबत और किसी को ना दें.”
ओरैशा खातून, गृहिणी
”पानी की जो हालात है ऐसी हालातों का सामना दो दिन ही अधिकारी करके देखे तब उन्हें अपने कर्तव्यहीनता की समझ आयेगी. इस अवस्था के लिए विभाग के अधिकारियों को आला अधिकारी भले ही बख्श दें, लेकिन अल्लाह जरूर गुनहगार ठहरायेगा. जल संकट से निजात के लिए पहल होनी चाहिए.”
मो. इमरान, सकुनत
”एक वक्त था जब पानी के लिए कुआं ही काफी था, लेकिन आज तो जल स्तर तेजी से भाग रहा है. सरकार की योजनाओं से रुपये से निकलते है लेकिन पानी नहीं. तीन सालों में सर्किट हाउस के जलमीनार से सकुनत और अहियापुर मोहल्ले का पानी मुहैया नहीं कराया जा सका.”
शौकत आरा, वृद्धा, सकुनत
नक्सलग्रस्त बूथों पर तत्पर रहे अधिकारी
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