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तस्करों की कट रही चांदी, अधिकारी बेखबर

तस्करों की कट रही चांदी, अधिकारी बेखबर फोटो-16 से 25 तक भारतीय सीमा से तस्करी कर रसोइ गैस ले जाते तस्करनाकेबंदी से नेपाल में नहीं हो रही सामान की आपूर्तितस्करों ने तस्करी को बनाया कमाई का जरियाबागमती नदी का पूर्वी व पश्चिमी छोर बना सेफ जोनसीतामढ़ी/सुप्पी. नेपाल में जारी मधेस आंदोलन के बीच तस्करों की […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | December 19, 2015 6:52 PM

तस्करों की कट रही चांदी, अधिकारी बेखबर फोटो-16 से 25 तक भारतीय सीमा से तस्करी कर रसोइ गैस ले जाते तस्करनाकेबंदी से नेपाल में नहीं हो रही सामान की आपूर्तितस्करों ने तस्करी को बनाया कमाई का जरियाबागमती नदी का पूर्वी व पश्चिमी छोर बना सेफ जोनसीतामढ़ी/सुप्पी. नेपाल में जारी मधेस आंदोलन के बीच तस्करों की चांदी कट रही है. अधिकारी और जवान बेपरवाह हैं. सीमाइ क्षेत्र के पेट्रोल पंप व गैस एजेंसी संदेह के घेरे में हैं. संयुक्त लोकतांत्रिक मधेसी मोरचा द्वारा की कई नाकेबंदी से नेपाल में भारतीय क्षेत्र से सामान की आपूर्ति नहीं हो रही है, जिसके कारण सीतामढ़ी, बैरगनिया, सोनबरसा, परिहार, सुरसंड, ढेंग, बेला, मेजरगंज आदि क्षेत्र से भारतीय सामान को तस्करी के माध्यम से सीमा पार भेजा जा रहा है. भारत-नेपाल सीमा के बैरगनिया और नेपाल के रौतहट जिले में तस्करों ने कमाई का जरिया बना लिया है. बागमती नदी के पूर्वी और पश्चिमी छोर पर पिछले कुछ दिनों से तस्कर गिरोह भारतीय क्षेत्र से गैस सिलिंडर, डीजल व पेट्रोल की तस्करी कर उसे काठमांडू पहुंचा रहे हैं. सुबह से रात तक साइकिल सवार तस्करों को देखा जा सकता है. गौरतलब है कि नेपाल में इन दिनों आपूर्ति ठप रहने से गैस और पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है. मजबूरी का फायदा उठा रहे तस्करकई इलाके ऐसे भी हैं जहां पांच से सात हजार खर्च करने के बाद भी इसकी आपूर्ति नहीं हो पा रही है. तस्कर इस मजबूरी का भरपूर फायदा उठा रहे हैं और मनमानी कीमत पर उन्हें गैस सिलिंडर व डीजल-पेट्रोल उपलब्ध करवा रहा है. सुप्पी के जमला से ढेंग, बड़हरवा, रसलपुर होते सेढ़वा और हथिऔल (नेपाल), मेजरगंज क्षेत्र के बसबीट्टा होकर बलरा और मधुबनी (नेपाल), मधुकरपुर होते बलरा, बैरगनिया के आदमवान होते मुसाचक लक्ष्मीपुर बेलबिच्छवा (नेपाल) और महादेवपट्टी के रास्ते को तस्कर सेफ इलाका बना चुका है. उधर आंदोलनकारियों द्वारा अब तक हजारों लीटर पेट्रोलियम पदार्थ को आग लगा कर नष्ट कर दिया है. गैस एजेंसी की भूमिका संदेहास्पदबताया जाता है कि भारत-नेपाल सीमा पर तस्करी रोकने के लिए एसएसबी की तैनाती है, लेकिन उनकी भूमिका भी इस मामले में संदेहास्पद बन गयी है. सवाल है कि तस्करी के पेट्रोलियम पदार्थ इतनी आसानी से नेपाल सीमा में कैसे जा रहा है? जब आंदोलनकारी इन तस्करों को अपने सीमा में रोक लेते हैं तो सीमा पर तैनात जवानों को भनक क्यों नहीं लगती है? बैरगनिया समेत अन्य सीमाइ क्षेत्र के पेट्रोल पंप एवं गैस एजेंसी के संचालक भी तस्करों से मोटी रकम वसूल रहे हैं. पूर्व केंद्रीय मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह भी अपने दौरे में तस्करी पर सवाल उठा चुके हैं. कहते हैं नेपाल के पूर्व सांसदसंघीय समाजवादी फोरम नेपाल के केंद्रीय सदस्य सह पूर्व सांसद बबन सिंह कहते हैं कि भारतीय क्षेत्र के अधिकारियों की यह पूरी जिम्मेदारी है कि वह तस्करों को रसोइ गैस और डीजल-पेट्रोल उपलब्ध कराने वाले एजेंसी की जानकारी एकत्रित करें. तस्करी से आंदोलन कमजोर हो रहा है. एसएसबी इन तस्करों को रोकने में नाकाम साबित हो रहा है.

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