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हाइस्कूल के छात्र कोचिंग पर हैं निर्भर

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बोखड़ा : प्रखंड के हाई स्कूल, खड़का में शिक्षण व्यवस्था दिन व दिन बदतर होती जा रही है. पठन-पाठन व शिक्षकों के आने-जाने का कोई समय निश्चित नहीं है. पठन-पाठन की बदत्तर व्यवस्था के चलते बच्चे स्कूल आना छोड़ दिये हैं. अधिकांश बच्चे कोचिंग पर निर्भर हैं. प्रधान शिक्षक के कार्यालय कक्ष के ऊपर भी […]

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बोखड़ा : प्रखंड के हाई स्कूल, खड़का में शिक्षण व्यवस्था दिन व दिन बदतर होती जा रही है. पठन-पाठन व शिक्षकों के आने-जाने का कोई समय निश्चित नहीं है. पठन-पाठन की बदत्तर व्यवस्था के चलते बच्चे स्कूल आना छोड़ दिये हैं. अधिकांश बच्चे कोचिंग पर निर्भर हैं. प्रधान शिक्षक के कार्यालय कक्ष के ऊपर भी एक कोचिंग का पोस्टर लगा हुआ है.

बुधवार को 11:30 बजे स्कूल के सभी कमरे में ताला लगा हुआ था और परिसर में सन्नाटा पसरा था. कुछ शिक्षक एक जगह बैठ कर अखबार पढ़ रहे थे.

प्रधान समेत अन्य नदारद : प्रधान शिक्षक सुशील प्रसाद, शिक्षक रवींद्र झा, सौकत अली, संजीव शेखर, शंकर दास व लिपिक विनय लाल नदारद थे. प्रभारी प्रधान गणेश कुमार ने बताया कि प्रधान श्री प्रसाद डीइओ कार्यालय गये हुए हैं तो अन्य लोग छुट्टी पर हैं. यहां कुल नौ शिक्षक व तीन कर्मी हैं. कक्षा नौ की परीक्षा नहीं होने से बच्चे अगली कक्षा में नहीं जा सके. अब भी कक्षा नौ में ही बने हुए हैं. इस तरह के 623 बच्चे हैं. प्रभारी प्रधान ने बताया कि 510 बच्चे आये थे जो चले गये. स्कूल परिसर में टहल रहे दो बच्चे क्रमश: संयोग कुमार व सदानंद कुमार ने बताया कि उन दोनों के सिवा एक भी बच्चा नहीं आया था. यहां वर्ग कक्ष नहीं चलता है. पढ़ाई होती हीं नहीं है.
सोख्ता वाला चापाकल बंद : स्कूल परिसर में कहने के लिए आधा दर्जन चापाकल है, जिसमें पांच खराब पड़ा हुआ है. खास बात यह कि डीएम के आदेश के आलोक में दो चालू चापाकल के समीप सोख्ता का निर्माण कराया गया था.
दो साल से एलएम हाइस्कूल में पठन-पाठन बाधित
सब कुछ जानते हुए मूकदर्शक बने हैं विभागीय अधिकारी
अधिकांश शिक्षक-शिक्षिका आते हैं सिर्फ हाजिरी बनाने
सरकार के बार-बार के प्रयासों के बावजूद शिक्षा व्यवस्था में कोई सुधार नहीं दिख रहा है. इसका उदाहरण अनुमंडल मुख्यालय स्थित एलएम उच्च विद्यालय बना हुआ है.
यहां विगत दो वर्षों से छात्रों का पठन-पाठन भवन के अभाव में बाधित है. स्कूल में शिक्षकों की पर्याप्त संख्या है, पर अधिकांश शिक्षक हाजिरी बना कर अपने आवास पर आराम को चले जाते है. स्कूल में नामांकित छात्र-छात्राओं के भविष्य की चिंता किसी शिक्षक को नहीं है. उन्हें इस बात का कोई गम नहीं है कि यहां के बच्चे कैसे पढ़ेंगे और उनका रिजल्ट कैसे अच्छा होगा. यह सब कुछ जानते हुए विभागीय अधिकारी कुंभकर्णी निद्रा हैं.
समय-समय पर विभागीय जांच की खानापूर्ति भी कर ली जाती है. फलत: ख्याति प्राप्त एलएम उच्च विद्याल जिले का मात्र इकलौता स्कूल है जहां नामांकित छात्र-छात्राएं सिर्फ जांच व प्रायोगिक परीक्षा में भाग लेने के लिए हीं आते हैं.
प्रायोगिक परीक्षा में वसूली
सरकार के प्रयास से हाल में मैट्रिक व इंटर की परीक्षा को कदाचार मुक्त कराया गया, पर प्रयोगिक परीक्षा में अवैध रूप से वसूली के आधार पर परीक्षा लिया जाता है. जानकारी के मुताबिक एलएम उच्च विद्यालय पुपरी में भवन निर्माण के लिए विगत पांच वर्षों में विभिन्न मदों का करीब एक करोड़ रुपये सरकार को वापस किया गया. परंतु भवन का निर्माण नहीं कराया जा सका. पिछले वर्ष विभागीय स्तर से भवन बनाने की स्वीकृति दी गयी. परंतु भवन निर्माण स्थल में पेच फंस गया. लिहाजा भवन निर्माण नहीं हो सका. क्षेत्र के जनप्रतिनिधि व सामाजिक कार्यकर्ता भी उक्त विद्यालय में नामांकित करीब दो हजार छात्रों के भविष्य के संबंध में सोचना जरूरी नहीं समझते. तत्कालीन एसडीओ अखिलेश कुमार सिंह ने छात्रों की मांग पर उक्त विद्यालय के संचालन के लिए तिलक साह मध्य विद्यालय में जिला प्रशासन से अनुरोध किया था. परंतु अब तक ध्यान नहीं दिया गया. प्रधानाध्यापक कुमारी पूनम ने बताया कि भवन के अभाव में बच्चों का पठन-पाठन बाधित हो रहा है.

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