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नौकरी छोड़ जगा रहे शिक्षा की अलख

सीतामढ़ी : भागमभाग की इस दौर में हर कोई इतना परेशान है कि समाज की चिंता करने की फुर्सत ही नहीं मिलती. आगे निकलने की होड़ में देश व समाज भी पीछे छूट जाने का दौड़ है. लेकिन इस दौड़ में भी कुछ युवा पीढ़ियों को समाज में बढ़ते अपराध व भ्रष्टाचार इतना झकझोड़ देता […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | December 16, 2016 5:31 AM

सीतामढ़ी : भागमभाग की इस दौर में हर कोई इतना परेशान है कि समाज की चिंता करने की फुर्सत ही नहीं मिलती. आगे निकलने की होड़ में देश व समाज भी पीछे छूट जाने का दौड़ है. लेकिन इस दौड़ में भी कुछ युवा पीढ़ियों को समाज में बढ़ते अपराध व भ्रष्टाचार इतना झकझोड़ देता है कि अचानक उसकी जिंदगी की मोड़ बदल देता है और वह नेकी के रास्ते पर चल पड़ता है. ऐसे ही युवाओं में से एक है सुधीर कुमार. समाज में फैली बुराइयों व बढ़ते अपराध व भ्रष्टाचार ने सुधीर को अंदर से इतना झकझोड़ दिया कि उसने रेलवे में टेक्निशियन की नौकरी छोड़कर समाज को शिक्षित बनाने की दिशा में प्रयास करने की ठान ली.

सफर के दौरान सुधीर को कुछ वारदात देखने को मिला, जिसके बाद रेलवे की नौकरी में उसका मन नहीं लगा और वह नौकरी छोड़कर घर लौट गया. बीएड पास करीब 34 वर्षीय सुधीर की रामनगरा रोड, भवदेवपुर गांव में करीब 12 कट्ठा जमीन है. उक्त रोड लूट व छीनतई के लिए बदनाम था. सुधीर ने अपनी कुछ पैतृक जमीन बेचकर अपनी उक्त 12 कट्ठा जमीन पर स्कूल खोल दिया और पढ़ाना शुरू कर दिया. 12 शुरुआत की और आज सुधीर के स्कूल में करीब 400 बच्चे हैं.

जिनमें से दर्जनों गरीब-असहाय परिवार के बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा का दान दिया जाता है. कभी लूट व छीनतई की घटना के लिए बदनाम रामनगरा रोड में आज वारदातों पर विराम सा लग गया है. सुधीर के पिता सोनबरसा हाई स्कूल में तो चाचा स्थानीय बीआरसी में आदेश पाल है. सुधीर अपनी लगन व मेहनत की बदौलत आज शहर में किसी परिचय का मोहताज नहीं है. सुधीर बच्चों के बीच शिक्षा की रौशनी फैलाने के अपने इस प्रयास से काफी खुश है.

दर्जनों गरीब-असहाय बच्चों को दिया जाता है नि:शुल्क शिक्षा

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