चार शिक्षकों के भरोसे ललिता देवी गर्ल्स स्कूल600 छात्राओं को पढ़ाने के लिए बारह शिक्षकों की जरूरत, मैथ व साइंस के टीचर नदारदप्लस टू में अपग्रेड होने के बाद भी नहीं बनी बिल्डिंग, संसाधनाें की कमी से विद्यालय का बुरा हालफोटो 01 विद्यालय में पढ़ती छात्राएं. दरौली. सन् 1982 में स्थापित श्रीमती ललिता देवी प्रोजेक्ट बालिका उच्च विद्यालय का हाल बुरा है. संसाधनों व शिक्षकों की कमी से यहां पठन-पाठन ठप होने की कगार पर पहुंच गयी है. स्थापना के 33 वर्ष पूरे कर चुके इस विद्यालय की ताजा सूरत-ए-हाल ऐसी है कि प्लस टू में अपग्रेड होने के बाद भी नयी बिल्डिंग नहीं बन पायी है. मैथ व साइंस के शिक्षक भी उपलब्ध नहीं हैं. समाजसेवी शंभु प्रसाद सिंह के द्वारा आधी आबादी को शिक्षित करने के लिए खोले गये इस विद्यालय के स्थापना के दो वर्ष बाद 1984 में इसका शिलान्यास पूर्व मुख्यमंत्री अब्दुल गफूर ने किया था. आज इस विद्यालय में कुल छात्राओं की संख्या 600 के करीब है. स्थापना के कुछ समय बाद उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इस विद्यालय को सरकार द्वारा प्लस टू में अपग्रेड कर दिया गया. प्लस टू में अपग्रेड होने के बाद विभाग द्वारा बहुत कुछ सुविधाओं से वंचित कर दिया गया. मसलन माध्यमिक विद्यालय के भवन में ही उच्च माध्यमिक के छात्राओं को पढ़ना पड़ रहा है. उच्च माध्यमिक विद्यालय में 10 शिक्षकों के जगह 4 ही शिक्षक कार्यरत हैं. इसके अलावे हिंदी, विज्ञान, गणित व इतिहास विषय के शिक्षक नहीं हैं. माध्यमिक विद्यालय की बात करें तो यहां भी 10 से अधिक शिक्षकों की आवश्यकता है. विद्यालय की छात्रा मनीषा कुमारी, प्रियंका कुमारी, ज्योति कुमारी व खुशबू कुमारी का कहना है कि जहां शिक्षकों की कमी के कारण पठन-पाठन में कठिनाई हो रही है. वहीं दूसरी ओर भवन नहीं हाेने के कारण भी परेशानी आ रही है. छात्राओं का कहना है कि विद्यालय के चारों ओर चहारदीवारी नहीं होने के कारण भी परेशानियां पेश आती हैं. क्षेत्र के निवासी पीयूष सिंह का कहना है कि आधी आबादी को और बेहतर शिक्षा देने के उद्देश्य से सरकार व विभाग को इस विद्यालय पर ध्यान देने की जरूरत है. विद्यालय के प्रधानाध्यापक अनिल कुमार का कहना है कि विद्यालय की कमियों के बारे में विभाग को बताया गया है.
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चार शक्षिकों के भरोसे ललिता देवी गर्ल्स स्कूल
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Prabhat Khabar Digital Desk
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