सुपौल : सोमवार की सुबह सेल्फी से जुड़ी एक दुखद घटना ने लोगों के मन को विचलित कर दिया. जब नरपतपट्टी गांव के एक इंजीनियरिंग के छात्र की मौत सेल्फी लेने के दौरान कोसी नदी के 17 किमी स्पर के समीप डूब कर हो गयी. बताया जाता है कि युवक पहले से ही सेल्फी लेने […]
ByPrabhat Khabar Digital Desk|
सुपौल : सोमवार की सुबह सेल्फी से जुड़ी एक दुखद घटना ने लोगों के मन को विचलित कर दिया. जब नरपतपट्टी गांव के एक इंजीनियरिंग के छात्र की मौत सेल्फी लेने के दौरान कोसी नदी के 17 किमी स्पर के समीप डूब कर हो गयी. बताया जाता है कि युवक पहले से ही सेल्फी लेने का शौकीन था. मौत के तीन दिन पहले कोसी बराज पर कई सेल्फी सूट किया था.
सेल्फी का शौक उसकी जिंदगी पर इस कदर भारी पड़ा कि डूब कर मौत हो गयी. हालांकि उसका शव कोसी की तेज धारा में बह कर 20 किलोमीटर दूर भपटियाही थाना क्षेत्र के दिघिया गांव के पास बुधवार को कोसी नदी के किनारे मिला. इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि सेल्फी के चक्कर में कभी-कभी हमें इसकी बहुत बड़ी कीमत भी चुकानी पड़ती है,
जिसका हमें अंदाजा भी नहीं रहता. खास कर युवाओं में इसका क्रेज कुछ ज्यादा ही है जो अब जानलेवा साबित हो रहा है. दरअसल सेल्फी का शौक अब एक जानलेवा रोग साबित हो रहा है. यहां मौज-मस्ती की चाह और कुछ नया कर गुजरने की ख्वाहिश रखने वाले लोगों कभी-कभी जान से हाथ धोना पड़ता है या अन्य दुर्घटना का शिकार होना पड़ता है.
स्मार्टफोन के साइड इफेक्ट : अधिकांश हाथों में स्मार्टफोन के पहुंच जाने से उपभोक्ता स्मार्टफोन में होने वाले हर ऑपरेशन को हासिल करना चाहते हैं. यहां तक कि स्मार्टफोन के ऑपरेशन में वो यह नहीं देखते कि यह ऑपरेशन उनके लिए कितना नुकसानदायी है. जाने माने चिकित्सक डॉ शांतिभूषण के मुताबिक चेहरे पर लगातार स्मार्टफोन की लाइट और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन से त्वचा को नुकसान पहुंच सकता है. इससे चेहरे की झुर्रियां भी बढ़ सकती हैं. व्यक्ति जिस साइड से स्मार्टफोन यूज करता है उसका वह हिस्सा दूसरे हिस्से की बजाय ज्यादा प्रभावित होता है.
स्मार्टफोन से दूर रहना हो गया है मुश्किल
स्मार्टफोन के इस दौर में जहां विभिन्न नेटवर्कों के कम दर के कारण हर हाथ में इंटरनेट की सुविधा आ गयी है. लिहाजा हाथ में स्मार्टफोन है तो सेल्फी लेना भी जरूरी हो गया है. इतना ही नहीं पश्चिमी सभ्यता की इस देन के पीछे हमारे देशवासी भी नहीं रह गये हैं. हमलोग भी सेल्फी मामले में कंधे से कंधा मिला कर विश्व पटल पर काबिज हैं. प्राप्त आंकड़ों के अनुसार पूरे विश्व में 94 मिलियन सेल्फी प्रतिदिन क्लिक होते हैं. सेल्फी यानी खुद की फोटो खींचना है. जिले में भी इसके प्रति लोगों की दीवानगी दिन ब दिन बढ़ती जा रही है. खास कर युवाओं में इसका क्रेज सर चढ़ कर बोलने लगा है. युवा ही नहीं इसके अलावा शायद ही कोई ऐसा वर्ग होगा जो इसके क्रेज से अछूता हो. गौरतलब है कि इसका चलन पिछले तीन से चार साल में ज्यादा बढ़ा है. स्मार्टफोन कल्चर के इस दौर में सेल्फी को सबसे ज्यादा बढ़ावा मिला है जो घातक साबित हो रहा है.
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