मौत की खबर सुनने के बाद गांव में नहीं जले चूल्हे

छोटका भाय धीरेंद्र इंजीनियर बनि कय पहिले बेर घर आयल रहै. ओकरो भगवान उठाय लेलकै. सुपौल : नेपाल में हुई सड़क दुर्घटना में लक्ष्मीनियां निवासी लक्ष्मी नारायण राय का पूरा परिवार उजर गया. 65 वर्ष की उम्र में पत्नी, दो बेटो, पुतोहू व एक पोते को खोने की पीड़ा बुजुर्ग श्री राय के चेहरे पर […]

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छोटका भाय धीरेंद्र इंजीनियर बनि कय पहिले बेर घर आयल रहै. ओकरो भगवान उठाय लेलकै.

सुपौल : नेपाल में हुई सड़क दुर्घटना में लक्ष्मीनियां निवासी लक्ष्मी नारायण राय का पूरा परिवार उजर गया. 65 वर्ष की उम्र में पत्नी, दो बेटो, पुतोहू व एक पोते को खोने की पीड़ा बुजुर्ग श्री राय के चेहरे पर स्पष्ट तौर पर दिख रहा था. इस भीषण घटना की जानकारी मिलने के बाद श्री राय बेसुध पड़े हुए थे. लगातार वे बेहोश हो रहे थे. परिवार के अन्य सदस्यों द्वारा उन्हें संभालने का प्रयास बेकार साबित हो रहा था. घटना की जानकारी मिलते ही पूरे परिवार में कोहराम मचा हुआ था. परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल था. चहुंओर चीख-पुकार मची थी. परिवार के पुरुष व महिलाएं भगवान को कोस रही थी. जिसने परिवार के पांच लोगों की एक झटके में ही जान ले ली. मौके पर मौजूद पिता लक्ष्मी
नारायण के भाई रामचंद्र राय कहते हैं कि हौ बाबू घर के कमासूत बेटा रहै सुरेंद्र, तकरो भगवान छीन लेलकै. छोटका भाय धीरेंद्र इंजीनियर बनि कय पहिले बेर घर आयल रहै. ओकरो भगवान उठाय लेलकै. मालूम हो कि घोघड़डीहा में लाइन मैन के पद पर प्रतिनियुक्त सुरेंद्र कुमार सुमन के साथ ही उसके भाई धीरेंद्र कुमार राय की भी घटना में मौत हुई है. धीरेंद्र हाल ही में यूपी के नोएडा शहर में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर लौटा था. बेटे के इंजीनियर बनने से परिवार के लोगों में भी उम्मीद बढ़ी थी कि आगे चल कर घर का दो बेटा कमायेगा तो परिवार में खुशिहाली आयेगी. लेकिन ईश्वर को कुछ और ही मंजूर था. परिवार की महिलाओं की भी चीख-पुकार चारों और मची हुई थी.
वे रो-रोकर भगवान को भी कोस रही थी. जहां परिवार के सदस्य ने उनकी पूजा करने के लिये गये थे. क्या पता था कि परिवार कल्याण के लिये ईश्वर की पूजा करने के बाद लौटने के क्रम में इस प्रकार की दर्दनाक घटना घटेगी. पड़ोस की महिलाएं भी कहती हैं कि भगवान बड अन्याय क देलकै. एहेन जुलुम दुश्मनों पर नैय करियह हौ… लक्ष्मीनारायण का परिवार निम्न मध्यम वर्गीय है. खेतीबाड़ी से किया प्रकार परिवार का गुजारा चलता है. अधिकतर लोग खेतीबाड़ी में ही जुटे रहते हैं. सुरेंद्र ने पढ़-लिख कर नौकरी की थी तो परिवार की स्थिति कुछ सुधरी थी. धीरेंद्र के इंजीनियर बनने के बाद और भी बेहतरी की उम्मीद थी, जो भीषण दुर्घटना ने लील लिया. दर्दनाक घटना से पूरे गांव में मातम का माहौल पसरा है. ग्रामीण बताते हैं कि दुखदायी घटना की सूचना मिलने के बाद किसी के घर में चूल्हा नहीं जला. लोग अब शव के आने की इंतजार में हैं. ग्रामीणों ने बताया कि मृतकों के शव का पोस्टमार्टम धरान स्थित अस्पताल में हो चुका है. परिजन शव लेकर गांव लौट रहे हैं. इसके बाद उनका अंतिम संस्कार किया जायेगा.
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