प्रचार थमा, मतदान को लेकर हो रहा मंथन

प्रचार थमा, मतदान को लेकर हो रहा मंथन प्रतिनिधि, सुपौल चुनाव के पांचवें चरण के मतदान को लेकर मंगलवार के अपराह्न काल से ही जिले भर में प्रचार प्रसार थम गया. प्रचार थमने के साथ ही प्रत्याशी सहित उनके कार्यकर्ता मंथन करने में जुटे हैं. साथ ही प्रत्येक प्रत्याशी बूथ वार ऐसे एजेंट को प्रतिनियुक्त […]

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प्रचार थमा, मतदान को लेकर हो रहा मंथन प्रतिनिधि, सुपौल चुनाव के पांचवें चरण के मतदान को लेकर मंगलवार के अपराह्न काल से ही जिले भर में प्रचार प्रसार थम गया. प्रचार थमने के साथ ही प्रत्याशी सहित उनके कार्यकर्ता मंथन करने में जुटे हैं. साथ ही प्रत्येक प्रत्याशी बूथ वार ऐसे एजेंट को प्रतिनियुक्त करने पर विशेष ध्यान दे रहे हैं, जिससे उनके पक्ष में अधिक से अधिक वोट का जुगाड़ कराया जा सके. आज के दौर में जुगाड़ तकनीकी इतनी हावी हो रही है कि जब तक किसी को कुछ पता चलेगा, उससे पूर्व ही कार्य संपादित हो जाता है. वोट को एकजुट करने का काम कार्यकर्ताओं द्वारा या तो परचा वितरण कर किया जा रहा है या फिर मोबाइल पर एसएमएस भेज कर भी सहानुभूति जताये जाने की बात सामने आ रही है. मतदाता परचा वितरण के साथ ही दिन भर गली मुहल्ले के लोग किन प्रत्याशी को अपना वोट दिया जाये. इस पर व्यापक रूप से चर्चा करते दिख रहे हैं. चर्चा के दौरान अगर समाज के गण्यमान्य व पार्टी कार्यकर्ता पहुंच जाते हैं और उक्त व्यक्ति के विचार एक दूसरे से मेल ना खायें, तो मतदाता अपनी इच्छा बिना व्यक्त किये वहां से खिसक जाना ही मुनासिब समझते हैं. बीते एक पखबारे से नेता हों या कार्यकर्ता या फिर आम जनता सभी चुनावी रंग में रंगे हुए हैं. अब तक सभी उम्मीदवारों द्वारा अपना – अपना चुनाव चिह्न का परचा मतदाताओं के पास प्रचार वाहन सहित अन्य स्रोतों से पहुंचा दिया गया है. प्रत्याशियों के नाम की लंबी श्रेणी देख युवा वर्ग हों या बुजुर्ग सभी अपने क्षेत्र स्थित आस पास के गांवों के मतदाताओं के वोट का जोड़-तोड़ कर रहे हैं कि इस चुनाव में कौन प्रत्याशी कितने मत बटोरेंगे. यहां तक कि महिलाओं में भी अपने – अपने क्षेत्र से सुयोग्य व कर्मठ उम्मीदवार को चुनाव में विजयी बनाने को लेकर उत्साह है. गांव की गलियां हों या फिर शहर के चौराहे, प्रतिदिन मतदाताओं में नये-नये विचारों की नीति पनपती दिखाई दे रही है. गुरुवार को मतदान कराया जाना है. बहुतेरे युवा इस सोच में डूबे हैं कि वे बूथ पर जाकर पहला वोट डाल कर लोकतंत्र के महापर्व को मनायें. चुनाव के दिन भले ही सरकारी संस्थानों द्वारा छुट्टी की घोषणा कर दी गयी है, लेकिन मतदाता इस अवकाश का उपयोग बेहतर तरीके किये जाने की इच्छा पाल रखे हैं.

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