विश्व ग्रैपलिंग चैंपियनशिप में जीता स्वर्ण

खुशी. रिक्शाचालक की बेटी ने यूरोप में लहराया अपनी प्रतिभा का परचम यूरोप के बेलारूस में आयोजित विश्व ग्रैपलिंग चैंपियनशिप 2016 में भारत की ओर से सफीना ने एकमात्र गोल्ड मेडल हासिल कर सुपौल के साथ ही बिहार व पूरे देश का नाम रोशन किया है. सुपौल : जिले की होनहार बेटी सफीना परवीन ने […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | October 6, 2016 4:45 AM

खुशी. रिक्शाचालक की बेटी ने यूरोप में लहराया अपनी प्रतिभा का परचम

यूरोप के बेलारूस में आयोजित विश्व ग्रैपलिंग चैंपियनशिप 2016 में भारत की ओर से सफीना ने एकमात्र गोल्ड मेडल हासिल कर सुपौल के साथ ही बिहार व पूरे देश का नाम रोशन किया है.
सुपौल : जिले की होनहार बेटी सफीना परवीन ने यूरोप के बेलारूस में आयोजित विश्व ग्रैपलिंग चैंपियनशिप 2016 में भारत की ओर से एक मात्र गोल्ड मेडल हासिल कर सुपौल के साथ ही बिहार व पूरे देश का नाम रोशन किया है. विपरीत परिस्थितियों के बावजूद स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाली सुपौल की इस बेटी के कारनामे पर जिलेवासी अपने आप को काफी गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं. यूरोप से वापस लौटने के बाद सफीना के घर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है.
वहीं सफीना के गरीब माता-पिता भी अपनी पुत्री की कामयाबी पर फूले नहीं समा रहे हैं. जिला ग्रैपलिंग संघ के चेयरमैन रमेश यादव, सचिव हरिओम रजक, अध्यक्ष संतोष चौहान, अजय अंकोला, पंचम साह आदि ने सफीना की सफलता पर हर्ष का इजहार करते उन्हें बधाई दी है.उन्होंने कहा है कि सफीना ने अपनी प्रतिभा के बूते गोल्ड मेडल प्राप्त कर जिला वासियों को गौरवान्वित किया है. चेयरमैन श्री यादव ने बताया कि गत 29 सितंबर से 02 अक्टूबर के बीच बेलारूस में आयोजित होने वाले विश्व ग्रैपलिंग चैंपियनशिप में बिहार से तीन खिलाड़ी शामिल हुए थे. जिसमें दो खिलाड़ी सुपौल के थे.
जिसमें सफीना ने भारत की ओर से एकमात्र गोल्ड मेडल प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का परचम लहराया. चैंपियनशिप में भारत को कुछ छह पदक प्राप्त हुए जिसमें एक स्वर्ण के अलावा चार सिल्वर एवं एक कांस्य पदक शामिल है.
मुफलिसी के बावजूद हासिल की सफलता : गौरतलब है कि ग्रैपलिंग के विश्व स्तरीय प्रतियोगिता में अपना डंका बजाने वाली सफीना जिला मुख्यालय स्थित हुसैन चौक की निवासी है. सफीना का परिवार काफी गरीबी व मुफलिसी का जीवन जी रहा है. उसके पिता मो तौहीद रिक्शा चला कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं. विपरीत परिस्थितियों के बावजूद सफीना ने कभी हार नहीं मानी. सफीना के दिल में शुरू से ही कुछ कर गुजरने का जज्बा था.
नतीजतन सफलता की इस यात्रा में सफीना ने गरीबी को बाधक नहीं बनने दिया.अपने निरंतर प्रयास, कड़ी मेहनत व जज्बे के दम पर सफीना ने बेलारूस में भारत के लिए एक मात्र स्वर्ण पदक प्राप्त कर न सिर्फ अपनी दिली इच्छा पूरी की बल्कि देश का नाम भी रौशन कर दिया. सफीना ने बताया कि बेलारूस जाने के लिए 01 लाख 35 हजार रुपये की आवश्यकता थी. जाहिर तौर पर सफीना के परिवार के लिए इतनी बड़ी रकम का व्यवस्था करना संभव नहीं था. लेकिन सफीना के जज्बे को देखते हुए संघ के प्रयास से स्थानीय कुछ निजी विद्यालय एवं कोचिंग सेंटर ने उन्हें सहयोग प्रदान किया. जिसके बाद सफीना की उड़ान बेलारूस तक संभव हो पायी.
सांसद ने दी 40 हजार की सहायता
सांसद रंजीत रंजन ने सफीना की सफलता पर हर्ष का इजहार किया है. साथ ही उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जीत हासिल करने के लिए बधाई भी दिया है. सांसद श्रीमती रंजन ने कहा कि इतनी बड़ी आबादी वाले देश में सुपौल की बेटी सफीना ने एक मात्र गोल्ड मेडल हासिल कर यह साबित कर दिया है कि कसबाई क्षेत्र में भी प्रतिभा की कोई कमी नहीं है. उन्होंने सुपौल की बेटियों पर नाज जताया.कहा कि यहां प्रतिभावान खिलाड़ियों की कमी नहीं है. आवश्यकता है उन्हें सही अवसर व मंच प्रदान करने की. सांसद श्रीमती रंजन ने सफीना के विजय पर खुशी जताते हुए उन्हें 40 हजार रुपये की सहायता भी प्रदान की है.

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