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खंडहर में तब्दील हुआ जलापूर्ति केंद्र, समस्या को ले विभाग मौन

महुआ नगर : एक ओर जहां ग्रामीण इलाके में लोग जलसंकट की मार से त्रस्त हैं, वहीं ग्रामीण इलाके के लोगों को शुद्ध पेयजल मुहैया कराने की सरकार की महत्वाकांक्षी योजना विभागीय उपेक्षा की वजह से धरातल पर दम तोड़ती दिख रही है.प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरीSpies In Mauryan Dynasty : मौर्य काल से ही […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | April 26, 2019 7:31 AM

महुआ नगर : एक ओर जहां ग्रामीण इलाके में लोग जलसंकट की मार से त्रस्त हैं, वहीं ग्रामीण इलाके के लोगों को शुद्ध पेयजल मुहैया कराने की सरकार की महत्वाकांक्षी योजना विभागीय उपेक्षा की वजह से धरातल पर दम तोड़ती दिख रही है.

कुछ ऐसा ही हाल महुआ प्रखंड के सिंघाड़ा उत्तरी पंचायत में लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए लगभग तीन दशक पूर्व लगाये गये जलापूर्ति केंद्र की है. शुरुआत के एक दशक तक लोगों को इस पंप हाउस से पानी की आपूर्ति भी की गयी, लेकिन लगभग डेढ़ दशक पूर्व जो यह बंद हुआ उसके बाद यह फिर कभी चालू नहीं हो सका.
विभागीय उपेक्षा की वजह से यह जलापूर्ति केंद्र अब पूरी तरह से खंडहर में तब्दील हो चुका है. जलापूर्ति केंद्र को पुनः चालू कराने के लिए बनायी गयी डीपीआर भी विभागीय फाइलों में सिमट कर रह गयी. इस पंप हाउस में लगे अधिकतर उपकरण अब गायब हो चुके हैं.
इलाके के लोगों ने कई बार इस पंप हाउस को चालू कराने की मांग की, लेकिन नतीजा सिफर रहा. मालूम हो कि तीन दशक पूर्व लगभग पंद्रह लाख रुपये की लागत से यहां लगभग सात कट्ठा भूमि पर जलापूर्ति केंद्र के निर्माण के साथ कर्मचारियों के रहने के लिए दो रूम व चहारदीवारी का निर्माण कराया गया था.
इलाके में पानी की आपूर्ति के लिए पाइप लाइन भी बिछायी गयी थी. जलापूर्ति केंद्र से पानी की सप्लाई बंद होने के बाद यहां लगे उपकरण पर कर्मियों ने ध्यान देना बंद कर दिया, जिसकी वजह से वे खराब होते चले गये. अब तो यहां पंप हाउस के अवशेष मात्र बचे हैं. पंप हाउस में लगे अधिकतर उपकरण, खिड़की व दरवाजा तक गायब हो चुके हैं.
पंप हाउस को पुनः चालू कराने की उठ रही मांग: स्थानीय समाजसेवी वीरेंद्र सिंह, पंचायत समिति सदस्य डॉ विजय ठाकुर, बिट्टू सिंह, कुंदन सिंह, प्रो धर्मेंद्र सिंह, रणधीर कुमार उर्फ डबलू सिंह आदि ने बताया कि गर्मी के मौसम में जब जलस्तर काफी नीचे चला जाता है तो इलाके में पेयजल संकट की स्थिति उत्पन्न हो जाती है. इसके बावजूद विभाग के अधिकारी इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं. पंप हाउस को अविलंब चालू कराना चाहिए.
इन इलाकों में होती थी आपूर्ति
लगभग तीन दशक पूर्व लगाये गये इस जलापूर्ति केंद्र से डेढ़ दशक पूर्व तक एक किलोमीटर के दायरे के ग्रामीण इलाकों के साथ-साथ गोविंदपुर बाजार, कदम चौक सहित दर्जनों स्थानों पर पानी की आपूर्ति की जाती थी.
कई जगह पर वाटर स्टैंड पोस्ट भी बनाये गये थे. लेकिन डेढ़ दशक पूर्व मामूली खराबी के बाद बंद यह पंप हाउस दुबारा चालू नहीं हो सका. पंप हाउस के बंद होने के बाद यहां प्रतिनियुक्त कर्मचारी भी यहां से चले गये.

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