उदासीनता. टेंपो पड़ावों पर यात्रियों की सुविधा के लिए नगर पर्षद नहीं खर्च करता फूटी कौड़ी
सभी स्टैंड अपनी बदहाली पर रो रहे हैं. गांधी चौक, बागमली, अंजानपीर चौक, पासवान चौक और जढुआ के टेपो स्टैंड पर नजर डालें, तो कहीं भी आपको किसी प्रकार की यात्री सुविधा दिखाई नहीं पड़ेगी. जबकि इन ऑटो स्टैंडों से हर साल नगर पर्षद लाखों रुपये की उगाही करता है. ठेके के रूप में वसूली गयी धनराशि से यात्रियों के लिए पड़ाव पर अनिवार्य रूप से बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध करानी हैं, लेकिन नगर पर्षद इस पर फूटी कौड़ी भी खर्च नहीं करता.
हाजीपुर : नगर में न सिर्फ रामअशीष चौक का बस पड़ाव, बल्कि जितने भी ऑटो स्टैंड हैं, सब के सब बदहाल हैं. किसी भी ऑटो स्टैंड में कोई बुनियादी सुविधा उपलब्ध नहीं है, जिससे कि यात्रियों को कुछ राहत मिल सके. शहर के ऑटो स्टैंडों से टैक्स के रूप में हर साल लाखों रुपये वसूलने वाले नगर पर्षद को यात्रियों की सुविधा का कोई ख्याल नहीं है. वाहन पड़ावों पर यात्री सुविधा बहाल करने के मामले में न सिर्फ प्रशासन लापरवाह रहा है, बल्कि यहां के जनप्रतिनिधि भी उदासीन रहे हैं.
लंबे समय तक वैशाली का प्रतिनिधित्व करने वाले वृषिण पटेल परिवहन मंत्री रह कर भी इस दिशा में कुछ नहीं कर सके. हाजीपुर क्षेत्र से गहरे जुड़ाव का दावा करनेवाले रमई राम जब परिवहन मंत्री बनें, तो लोगों को उम्मीद जगी, लेकिन उन्होंने भी इस मामले में निराश ही किया. राज्य की राजधानी से सटे जिला मुख्यालय, हाजीपुर के वाहन पड़ावों की बदहाली एक साथ कई सवाल खड़ी करती है.
बुद्धमूर्ति चौक स्टैंड में पानी को तरसते हैं यात्री: शहर के बुद्धमूर्ति चौक स्थित टेंपो स्टैंड नगर का सबसे महत्वपूर्ण स्टैंड है. नगर पर्षद को सबसे अधिक राजस्व भी इसी स्टैंड से मिलता है. यहां से रामाशीष चौक, जढुआ, बिदुपुर, चेचर, चकौसन, महनार और सारण जिले के सोनपुर से लेकर शीतलपुर, दिघवारा के लिए ऑटो जाते हैं. पटना के लिए भी यहां से ऑटो खुलते हैं. प्रतिदिन हजारों यात्रियों का आवागमन इस स्टैंड से होता है.
इसके बावजूद इस ऑटो पड़ाव पर यात्री शेड और शौचालय की बात तो दूर, पीने का पानी भी उपलब्ध नहीं है. गरमी के मौसम में यात्री प्यास से तड़प उठते हैं, लेकिन उन्हें पानी मिलना मुश्किल हो जाता है.
सभी स्टैंड बदहाल : सिर्फ बुद्धमूर्ति चौक की नहीं, नगर के तमाम ऑटो स्टैंडों की हालत एक जैसी है. सभी स्टैंड अपनी बदहाली पर रो रहे हैं. गांधी चोक, बागमली, अंजानपीर चौक, पासवान चौक और जढुआ के टेपों स्टैंड पर नजर डालें, तो कहीं भी आपको किसी प्रकार की यात्री सुविधा दिखाई नहीं पड़ेगी.
इन ऑटो स्टैंडों से हर साल नगर पर्षद लाखों रुपये की उगाही करता है. ठेके के रूप में वसूली गयी धनराशि से यात्रियों के लिए पड़ाव पर अनिवार्य रूप से बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध करानी हैं, लेकिन ऐसा नहीं होता है. सुविधाओं से वंचित स्टैंडों का हाल यह है कि यहां शाम ढलते ही वीरानगी छा जाती है. यात्रियों की सुरक्षा भी भगवान भरोसे है. स्टैंडों में न रोशनी की व्यवस्था है और न सुरक्षा का इंतजाम. शाम होते ही इन स्टैंडों में लुटेरे गिरोह और असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगने लगता है, निगम के बस पड़ाव से लेकर तमाम ऑटो स्टैंडों की सुरक्षा सड़क से गुजरनेवाली पैट्रोलिंग पार्टी के भरोसे है.
पानी के लिए भी तरसना पड़ता है लोगों को
ऑटो स्टैंडों से इस साल होगी 64 लाख की आय
नगर पर्षद को मौजूदा वित्तीय वर्ष में नगर के विभिन्न ऑटो स्टैंडों से लगभग 64 लाख रुपये की आदमनी होगी. वर्ष 2016-17 के लिए ऑटो स्टैंडों की जो बंदोबस्ती की गयी है, उसमें बुद्धमूर्ति चौक टैपों स्टैंड की बंदोबस्ती की राशि सबसे ज्यादा 27 लाख 80 हजार 910 रुपये है. आमदनी में दूसरे नंबर पर पासवान चौक टेंपो स्टैंड हैं, जिसकी बंदोबस्ती राशि 26 लाख 40 हजार 127 रुपये है. इसके अलावा गांधी चौक टैपों स्टैंड से 6 लाख 67 हजार 315 रुपये िमलेंगे़
और अंजानपीर चौक स्टैंड को 2 लाख 68 हजार 85 रुपये में बंदोबस्त किया गया है. लोगों का कहना है कि नगर पर्षद को इस आय का कुछ हिस्सा ही सही, यात्री सुविधाओं पर खर्च करना चाहिए.