रांची: झारखंड हाइकोर्ट में सोमवार को राज्य के गरीबों को अनुदानित दर पर चीनी मुहैया कराने को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई. चीफ जस्टिस वीरेंदर सिंह व जस्टिस डीएन पटेल की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के जवाब को देखते हुए फरवरी 2015 से गरीबों को अनुदानित दर पर चीनी देने का आदेश दिया.
खंडपीठ ने कहा कि दिसंबर माह में विधानसभा चुनाव खत्म होगा. जनवरी में जरूरी प्रक्रिया पूरी कर फरवरी से चीनी का वितरण जन वितरण प्रणाली की दुकानों से शुरू कर दिया जाये. इसके बाद चीनी नहीं मिलने की शिकायत मिलने पर कोर्ट राज्य सरकार के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू करेगा. उक्त आदेश देते हुए खंडपीठ ने याचिका को निष्पादित कर दिया.
इससे पूर्व राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि केंद्र महाराष्ट्र व उत्तर प्रदेश से चीनी का उठाव करने को कहता है, जबकि परिवहन पर अधिक खर्च आता है.
इसे देखते हुए केंद्र से बिहार से चीनी का उठाव करने की अनुमति मांगी गयी थी. 13.50 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से एक गरीब परिवार (बीपीएल या अंत्योदय) को दो किलोग्राम चीनी देना है. 38.07 रुपये प्रति किलोग्राम खर्च आ रहा है. 24 रुपये प्रति किलोग्राम केंद्र से अनुदान मांगा गया है. चालू वित्तीय वर्ष 2014-2015 में 206.97 करोड़ रुपये चीनी वितरण पर खर्च होगा. राज्य सरकार ने 103.49 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है. आदर्श आचार संहिता लगा हुआ है. इसलिए टेंडर आदि पर निर्णय नहीं हो पा रहा है.
केंद्र सरकार की ओर से बताया गया कि राशि की कोई कमी नहीं है. परिवहन व्यय केंद्र सरकार वहन करती है. बिहार से चीनी नहीं दी जा सकती है. वहां सिर्फ 30 हजार टन ही उत्पादन हो रहा है, जबकि जरूरत 2.50 लाख टन की है. झारखंड को कहा गया है कि वह उत्तर प्रदेश व पश्चिम बंगाल के नजदीकी उत्पादन इकाइयों से चीनी का उठाव कर सकता है. प्रार्थी की ओर से खंडपीठ को बताया गया कि राज्य के गरीबों को वर्ष 2009 से चीनी नहीं दी जा रही है, जबकि देश के अन्य सभी राज्यों में अनुदानित दर पर चीनी दी जा रही है. उल्लेखनीय है कि प्रार्थी राम निवास प्रसाद की ओर से जनहित याचिका दायर कर चीनी देने के लिए राज्य सरकार को उचित आदेश देने का आग्रह किया था.