यदि माप के दौरान बच्चे की मध्य भुजा की गोलाई 11.5 सेमी से कम पायी जाती है, तो बच्चे को गंभीर कुपोषण की श्रेणी में माना जाता है. इलाज के लिए शिशु को एमटीसी में रेफर किया जाता है. सेंटर में बच्चे के माता-पिता को विशेष सावधानी रखने की सलाह दी जाती है. बच्चे की मध्य भुजा की गोलाई 12.5 सेमी से ऊपर पाई जाती है, तो उसे सामान्य समझा जाता है. मौके पर वर्ल्ड विजय इंडिया के प्रतिनिधि कोशी जॉन, सुधाकर, सोनी टोप्पो, अनिल कश्यप सहित सभी प्रखंडों के सीडीपीओ, सुपरवाईजर, आंगनबाडी सेविका व सहायिका बड़ी संख्या में मौजूद थी.
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कुपोषित बच्चों को इलाज के लिए समय पर पहुंचाएं केंद्र : उपायुक्त
बोकारो: जिला समाहरणालय के सभाकक्ष में सोमवार को झारखंड पोषण मिशन के तहत कुपोषित बच्चों की जांच ‘मध्य भुजा की माप’ पर कार्यशाला हुई. उद्घाटन मुख्य अतिथि डीसी राय महिमापत रे व विशिष्ट अतिथि डीडीसी दिगेश्वर तिवारी व जिला समाज कल्याण पदाधिकारी डॉ सुमन गुप्ता ने संयुक्त रूप से किया. डीसी ने सभी सीडीपीओ, सुपरवाइजरों […]
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बोकारो: जिला समाहरणालय के सभाकक्ष में सोमवार को झारखंड पोषण मिशन के तहत कुपोषित बच्चों की जांच ‘मध्य भुजा की माप’ पर कार्यशाला हुई. उद्घाटन मुख्य अतिथि डीसी राय महिमापत रे व विशिष्ट अतिथि डीडीसी दिगेश्वर तिवारी व जिला समाज कल्याण पदाधिकारी डॉ सुमन गुप्ता ने संयुक्त रूप से किया. डीसी ने सभी सीडीपीओ, सुपरवाइजरों को कहा : सही तरीके से प्रशिक्षण लें. इसके बाद प्रखंड स्तर पर बेहतर तरीके से सेविकाओं व सहायिकाओं को प्रशिक्षित करें.
आंगनबाड़ी केंद्रोें को समय से खोलें. बच्चों की सही तरीके से कुपोषण की जांच करें. साथ ही इलाज के लिए केंद्र तक पहुंचाने की जिम्मेवारी को निभायें. विशिष्ट अतिथि डॉ गुप्ता ने कहा : एमयूएसी एक प्रकार का टेप है, जो कुपोषण की पहचान करता है. टेप से आंगनबाड़ी सेविका व सहायिका अपने केंद्रों में बच्चों की मध्य भुजा की माप लेती है.
Prabhat Khabar Digital Desk
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