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सोना की खरीदारी में समझदारी जरूरी

सुनील तिवारी बोकारो : धनतेरस का काउंट डाउन शुरू हो गया है. धनतेरस 17 अक्तूबर मंगलवार को है. धनतेरस पर सोना खरीदना शुभ माना जाता है. ऐसे में ज्यादातर लोगों की चाहत इस मौके पर थोड़ा-बहुत सोना खरीदने की जरूर होती है. लेकिन, बाजार की गहमागहमी और ऑफरों के ढेर के बीच कई बार कस्टमर […]

सुनील तिवारी
बोकारो : धनतेरस का काउंट डाउन शुरू हो गया है. धनतेरस 17 अक्तूबर मंगलवार को है. धनतेरस पर सोना खरीदना शुभ माना जाता है. ऐसे में ज्यादातर लोगों की चाहत इस मौके पर थोड़ा-बहुत सोना खरीदने की जरूर होती है. लेकिन, बाजार की गहमागहमी और ऑफरों के ढेर के बीच कई बार कस्टमर धोखा खा जाते हैं. सोने की खरीदारी में समझदारी जरूरी है. सेक्टर-4 सहित चास-बोकारो का सोना बाजार सज-धज का तैयार है.
सोना दुनिया की सबसे कीमती धातुओं में सबसे लोकिप्रय है. यह ट्रेडिशनल होने के साथ फैशनेबल भी है. यह किसी का शौक तो किसी के लिए इन्वेस्टमेंट का जरिया है. ऐसे में सोने के सिक्के या जूलरी खरीदते वक्त कुछ बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है, ताकि जूलर्स आपको चूना न लगा सके. सबसे पहली बात यह कि सोना सहित अन्य की खरीदारी ब्रांडेड करें, वह भी बड़ी व प्रतिष्ठित दुकानों से, ताकि ठगी की संभावना कम रहे.
क्या कहता है कानून
नकली सोना बेचने के मामले में आइपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी) के तहत मामला दर्ज किया जाता है. मामला साबित हो जाने पर अधिकतम सात साल की कैद हो सकती है. हॉलमार्क जूलरी भले ही पहली नजर में महंगी लगे, लेकिन इसे लेना हमेशा फायदे का सौदा होता है.
हॉलमार्क जूलरी के कैरेट आप कहीं भी कैरेट मीटर से चेक करा सकते हैं, जबकि बिना हॉलमार्क जूलरी की शुद्धता का पता उस जूलरी को गला कर ही लगाया जा सकता है. ज्यादातर जूलर्स के पास हॉलमार्क जूलरी उपलब्ध है, लेकिन कम मुनाफा होने की वजह से वे इसे कस्टमर को नहीं बेचना चाहते. हॉल मार्क जूलरी को आम जूलर्स के अलावा भारत सरकार की एजेंसी एमएमटीसी से भी खरीदा जा सकता है.
हीरे के गहनों में है चार सी का महत्वयदि आप हीरा खरीदना चाह रहे हैं, तो चार सी का अवश्य ध्यान रखना चाहिए.
ये है कट, कलर, क्लीयरिटी और कैरेट. बाजार में ज्यादातर राउंड कट के हीरे ही मिलते हैं. इनके अलावा फैंसी कट में हार्ट, स्क्वायर आदि भी आते हैं. हीरा जितना बड़ा और अच्छे कट में होगा, उतना ही कीमती भी. कलर को डी से जेड केटेगरी में रखा जाता है. डी कलर का हीरा अभी सबसे अच्छा माना जाता है. क्लीयरिटी में देखा जाता है कि हीरे में रेसा कितना है. जितना कम रेसा होगा, हीरा उतना ही ज्यादा महंगा होगा. कैरेट की आसान परिभाषा वजन होती है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की कीमत के अनुसार हीरे की कीमत भी बदलती है. ज्यादातर कंपनियां हीरे के आभूषणों के साथ सर्टिफिकेट भी देती हैं.
क्या है कैरट
कैरट के मायने गोल्ड और डायमंड के लिए अलग-अलग होते हैं. डायमंड के लिए कैरट का मतलब उसके वजन से होता है. एक कैरट 200 मिलीग्राम या 0.200 ग्राम के बराबर होता है. 24 कैरट गोल्ड बिल्कुल प्योर होता है. गोल्ड में कैरट से उसकी शुद्धता का पता चलता है. 100 फीसदी प्योर गोल्ड से जूलरी नहीं बनाई जा सकती, इसलिए इसमें सिल्वर, पैलेडियम, प्लैटिनम, निकेल और यहां तक कि फिलर मेटल के तौर पर कॉपर भी मिलाया जाता है. गोल्ड में जब फिलर मेटल के तौर पर सिल्वर, प्लैटिनम या पैलेडियम मिलाया जाता है तो उसे वाइट गोल्ड कहते हैं.
सोना में तांबा-चांदी की मिलावट : सोने के जेवरों में वजन बढ़ाने के लिए तांबा व चांदी की मिलावट की जाती है. नक्कासी वाले जेवरों में दूसरे धातुओं का टांका मारा जाता है, जबकि ग्राहकों से सोने की कीमत वसूली जाती है.
आम ग्राहकों के लिए कसौटी पत्थर पर भी असली-नकली की पहचान मुश्किल होती है. अगर पर्व पर सोने में निवेश करना है तो सिक्के या शुद्ध सोना बेहतर होगा. इसमें मिलावट की गुंजाइश कम होती है. शुद्ध सोना 99 से 99.5 प्रतिशत तक रहता है, जबकि आभूषणों में 80-85 प्रतिशत ही शुद्ध सोना रहता है.
प्रतिष्ठित दुकानों से करें खरीदारी : प्रतिष्ठित और अपनी पहचान की दुकान से ही सोना-चांदी की खरीदारी करनी चाहिए. सस्ते जेवर का लोभ न करें. सोना-चांदी का भाव हर रोज तय होता है. इसकी जानकारी कर लें.
इसके बाद भी कोई सस्ते में सोना-चांदी का जेवर दे रहा है, तो निश्चित रूप से उसकी शुद्धता भी संदिग्ध होगी. पक्की रसीद लें. ब्रांडेड जेवरों पर हॉलमार्क के निशान जरूर देखें. ग्राहक आमतौर पर दीपावली के वक्त खरीदारी करना पसंद करते हैं. ऐसे में जूलर्स ग्राहकों को लुभाने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते.
जूलरी खरीदते समय बरतें ये सावधानियां
1 शुद्धता का ख्याल रखें : गोल्ड जूलरी या सिक्के खरीदते वक्त सबसे पहले उसकी शुद्धता का पता लगाना चाहिए. 24 कैरट गोल्ड सबसे शुद्ध होता है, लेकिन इससे जूलरी नहीं बनाई जा सकती. गोल्ड जूलरी 22 या 18 कैरट के सोने से बनाई जाती है, यानी 22 कैरट गोल्ड के साथ 2 कैरट कोई और मेटल मिक्स किया जाता है. जूलरी खरीदने से पहले हमेशा जूलर से सोने की शुद्धता जान लें.
2 ट्रेडमार्क की जांच करें : गोल्ड जूलरी में हमेशा ट्रेडमार्क होता है. जूलरी खरीदने से पहले ट्रेडमार्क की पहचान कर लें. इससे आपको मैन्युफैक्चरर की पहचान का पता चल सकता है.
3 जेम स्टोन की शुद्धता भी जांचें : अगर आप डायमंड, रूबी या किसी और जेम स्टोन (कीमती पत्थर) वाले सोने के गहने खरीद रहे हैं, तो उनकी शुद्धता भी जरूर जांचे. जब आप इन स्टोन के लिए भी पूरे पैसे चुकाते हैं, तो गोल्ड के साथ जेम स्टोन की क्वॉलिटी का भी ध्यान रखना चाहिए.
4 मिक्सिंग के बारे में जानना भी जरूरी : अगर आप वाइट गोल्ड की जूलरी ले रहे हैं तो निकेल या प्लैटिनम मिक्स के बजाय पैलेडियम मिक्स जूलरी लेना बेहतर होगा. निकेल या प्लैटिनम मिक्स वाइट गोल्ड से स्किन एलर्जी होने का खतरा रहता है.
5 प्योरिटी सर्टिफिकेट लेना न भूलें : गोल्ड जूलरी खरीदते वक्त आप ऑथेंटिसिटी/प्योरिटी सर्टिफिकेट लेना न भूलें. सर्टिफिकेट में गोल्ड की कैरट क्वॉलिटी भी जरूर चेक कर लें. इसके साथ ही गोल्ड जूलरी में लगे जेम स्टोन के लिए भी एक अलग सर्टिफिकेट लेना
जरूरी है.
इन गलतियों से करें तौबा
1 सोना का सिक्का गलत वक्त पर खरीदना : सिक्के खरीदने के पीछे आपका मकसद सीधे तौर पर इन्वेस्टमेंट का होता है, इसलिए सिक्कों की खरीद का फैसला करते वक्त जोश के बजाय रिटर्न की संभावनाओं पर ध्यान रखना चाहिए. इसके लिए जरूरी है कि सोने की कीमत के टर्म साइकल के निचले हिस्से में आने का इंतजार किया जाय.
2 गोल्ड की खरीद पर बहुत ज्यादा खर्च : गोल्ड खरीदते हुए यह याद रखना बहुत जरूरी है कि यह कोई डिविडेंड या लगातार कैश देने वाला एसेट नहीं है, यानी इस पर इन्वेस्ट किये गये पैसों से कोई रेग्युलर इनकम नहीं होगी. ऐसे में कुल इन्वेस्टमेंट का सिर्फ 5 फीसदी ही गोल्ड पर खर्च करना सही है.
3 गलत जगह से खरीदारी करना : किसी भी नये इन्वेस्टर के लिए यह सबसे सामान्य गलती है. अगर आपको मालूम नहीं है कि कॉमन बुलियन सिक्के कैसे दिखते हैं, तो इस बात की पूरी आशंका रहेगी कि आप बहुत ज्यादा खर्च करके भी नकली सिक्का खरीद लेंगे. इसलिए सिक्के हमेशा विश्वसनीय दुकानों से और जूलरी हमेशा हॉलमार्क निशान वाली ही खरीदें. छोटे जूलरों के पास हॉलमार्कजूलरी नहीं होती. ऐसे में वहां धोखा होने का डर ज्यादा होगा.
4 जरूरत पर फोकस न होना : अगर आप इन्वेस्टमेंट के लिहाज से गोल्ड खरीदने की सोच रहे हैं, तो अपनी जरूरत पर फोकस करें. पहले मार्केट को समझें और अपने इन्वेस्टमेंट प्लान पर टिके रहें. कई बार लोग दोस्तों और रिश्तेदारों को इम्प्रेस करने के लिए भी सोने की खरीदारी कर लेते हैं, जिससे जेब पर जबरन और फालतू बोझ पड़ता है.
5 गोल्ड के स्पॉट प्राइस की जानकारी न होना : कई बार ग्राहक गोल्ड का मार्केट प्राइस जाने बगैर खरीदारी कर लेते हैं. ऐसा कभी न करें. इससे आपके पैसे भी ज्यादा खर्च होने की आशंका होगी और आपको सही वैल्यू भी नहीं मिल पायेगी.
6 सिल्वर को नकारना : जब सोने की कीमत बहुत ज्यादा हो, तो चांदी के सिक्के खरीदना ज्यादा समझदारी है. चांदी की कीमतें भी लगातार बढ़ रही हैं और खरीद के कुछ वक्त बाद चांदी अक्सर अच्छा रिटर्न देती है.
Prabhat Khabar Digital Desk
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