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हॉस्टल लाइफ-आठ

बोकारो: श्वेता सिंह सीवान जिला के एक छोटे गांव की हैं. पिछले एक साल से बोकारो में रह कर पढ़ाई कर रही है. वह सिटी सेंटर सेक्टर-4 स्थित गल्र्स हॉस्टल में रहती है. श्वेता अकेली नहीं, वह अपनी ही हम उम्र पुष्पा के साथ रूम शेयर करतीं हैं. यह पूछे जाने की रूममेट के साथ […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | July 16, 2013 1:51 PM

बोकारो: श्वेता सिंह सीवान जिला के एक छोटे गांव की हैं. पिछले एक साल से बोकारो में रह कर पढ़ाई कर रही है. वह सिटी सेंटर सेक्टर-4 स्थित गल्र्स हॉस्टल में रहती है. श्वेता अकेली नहीं, वह अपनी ही हम उम्र पुष्पा के साथ रूम शेयर करतीं हैं. यह पूछे जाने की रूममेट के साथ रहते हुए किस तरह के अनुभव होते हैं.

श्वेता कहती हैं : रूममेट के साथ रहते हुए हमें पता होता है कि हमने कुछ दिन अपने-अपने मकसद के लिए साथ रहना है.

इसलिए हॉस्टल लाइफ में अगर आपस में हमारी किन्हीं बातों को लेकर मतभेद होते हैं तो व्यावहारिकता को ध्यान में रखते हुए उन मतभेदों की अनदेखी करनी पड़ती है. इसलिए कह सकते हैं की रूममेट के साथ रहना है, तो वह अगर दोस्त न भी हो, तो भी दोस्त की तरह ही उसके साथ रहना होता है. आखिरकार इसके पीछे पढ़ाई, कैरियर या ऐसा ही कोई मकसद होता है. और हॉस्टल में समय भी कुछ देर के लिए हीं तो बितना है.

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