बेरमो. लोकसभा में कोयला खान (विशेष उपबंध) विधेयक 2014 को मंजूरी बाद कोयला उद्योग मंे कार्यरत पांचों मान्यता प्राप्त श्रमिक संगठनों इंटक, एटक, एचएमएस, बीएमएस व सीटू के तेवर तल्ख हो गये हैं. कोल इंडिया के निजीकरण की दिशा मंे बढ़ते इस कदम को रोकने के लिए अब मजदूर संगठन कोल इंडिया मंे आंदोलन की रूपरेखा तय कर रहे हैं. इसी को लेकर 17 दिसंबर को सीसीएल के रांची स्थित दरभंगा हाउस में श्रमिक संगठन इंटक, एटक, एचएमएस, बीएमएस व सीटू नेताओं की बैठक होगी. बैठक में कोयला खान विधेयक को लेकर आंदोलन की रणनीति बनायी जायेगी. यूसीडब्ल्यूयू के महामंत्री व जेबीसीसीआइ सदस्य लखनलाल महतो कहते हैं कि केंद्र सरकार ने विदेशी पूंजीपतियों के लिए लाल कॉरपेट बिछा दिया है. अब देशी के साथ-साथ विदेशी पूंजी भी कोयला उद्योग मंे लगेगी. निजी मालिकों को अब बाजार मंे कोयला बेचने की छूट मिलेगी. पहले राष्ट्रीयकरण कानून में यह प्रावधान था कि खुले बाजार मंे कोयला कोल इंडिया को छोड़कर दूसरी कोई भी कंपनी नहीं बेच सकती है. कोयला मजदूर भी आर्थिक मागों मंे तो आगे रहते है लेकिन नीतिगत मागों मंे पीछे रहते है. इसलिए अब कोयला मजदूर अपने लिए नहीं बल्कि आनेवाली पीढ़ी के बारे में सोचें. कोयला मजदूर राजनीति व संघर्ष मंे भी आगे रहे है. इसलिए कोयला खान विधेयक को लेकर अब कोयला मजदूरों को एक बड़े संघर्ष के लिए तैयार रहने की जरूरत है.
आज रांची में जुटेंगे पांचों यूनियनों के नेता
बेरमो. लोकसभा में कोयला खान (विशेष उपबंध) विधेयक 2014 को मंजूरी बाद कोयला उद्योग मंे कार्यरत पांचों मान्यता प्राप्त श्रमिक संगठनों इंटक, एटक, एचएमएस, बीएमएस व सीटू के तेवर तल्ख हो गये हैं. कोल इंडिया के निजीकरण की दिशा मंे बढ़ते इस कदम को रोकने के लिए अब मजदूर संगठन कोल इंडिया मंे आंदोलन की […]
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