बारिश ने सब्जी बाजार में लगायी आग

बोकारो: बारिश ने सब्जी बाजार में आग लगा दी है. आलम यह है कि किलो के बजाय पाव में खरीदारी हो रही है. हरी मिर्च आंखें तरेर रही है. टमाटर और लाल हो गया है. भिंडी रानी के नखरे बढ़े हुए हैं. बैंगुन में गुण आ गया है. करैला का स्वाद और भी तीता हो […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |
बोकारो: बारिश ने सब्जी बाजार में आग लगा दी है. आलम यह है कि किलो के बजाय पाव में खरीदारी हो रही है. हरी मिर्च आंखें तरेर रही है. टमाटर और लाल हो गया है. भिंडी रानी के नखरे बढ़े हुए हैं. बैंगुन में गुण आ गया है. करैला का स्वाद और भी तीता हो गया है. कारण है आसमान छूती महंगाई. हरी सब्जी की कीमतें लगातार बढ़ रही है. सब्जी की कीमत बढ़ने से गृहिणी किचन में जाने से कतरा रही हैं. इधर, सब्जी बाजार पहुंचते ही उलझन शुरू हो जाती है. क्या खरीदें-क्या नहीं. आलू व प्याज की कीमत में भी उछाल आया है. प्याज 30 रुपये रुपये तो नैनीताल आलू 10 रुपये व लाल आलू 14 रुपये प्रति किलो बिक रहा है.
साहब चिंतित-मेम साहब टेंशन में : सब्जी बाजार पहुंचते ही साहब की चिंता-क्या खरीदें. किचन में प्रवेश करते ही मेम साहब को टेंशन-क्या बनायें. सब्जी की कीमत में बेतहासा वृद्धि हुई है. स्थिति यह है कि 100 रुपये में एक छोटा झोला भी नहीं भर रहा है. कोई भी हरी सब्जी 20 रुपये प्रति किलो से कम नहीं मिल रही है. कीमत में वृद्धि के कारण थाली से सब्जी गायब होने लगी है.
मांग अधिक और आपूर्ति कम : हरी सब्जी की कीमत में अप्रत्याशित वृद्धि का एकमात्र कारण आवक में कमी व मांग अधिक होना है. बारिश में सब्जी का उत्पादन अपेक्षाकृत कम होता है. इस कारण आपूर्ति कम होती है. सब्जी विक्रेताओं की मानें तो अभी बरसात भर सब्जी की कीमतों में कमी आने के कोई आसार नहीं है. हां, कीमत में और अधिक इजाफा होने की संभावना जरूर है.
सोयाबीन, चना व बेसन की मांग बढ़ी : हरी सब्जी की कीमत में वृद्धि के कारण घर-घर में विकल्प के रूप में सोयाबीन, चना, बेसन आदि की सब्जी बन रही है. इसके कारण उक्त खाद्य पदार्थो की मांग बढ़ गयी है. सिटी सेंटर सेक्टर-4 स्थित राशन दुकानदार मनोज साहू ने बताया : इन दिनों सोयाबीन, चना, बेसन आदि की बिक्री बढ़ गयी है. अभी प्रतिदिन 10 से 20 किलो की बिक्री हो रही है.
सब्जी के लिए बाजार पहुंचते ही दिमाग खराब हो जाता है. 100 रुपये की सब्जी के लिए तो झोला की जरूरत पड़ती ही नहीं. पॉलीथिन से ही काम चल जाता है. सब्जी की कीमत को देख समझ में ही नहीं आता कि क्या खरीदें और क्या नहीं. सब्जी की कीमत ने परेशान कर दिया है.
लाभेश सिंह, सेक्टर 4
हरी सब्जी की कीमत में वृद्धि से बहुत परेशानी है. किचन में जाने के बाद दिमाग हीं काम नहीं कर रहा है. सुबह-शाम एक ही टेंशन बना हुआ है क्या बनायें? क्या खिलायें? मिस मैनेजमेंट के कारण यह समस्या उत्पन्न हुई है. आलम यह है कि 200 रुपये की सब्जी भी कम पड़ रही है.
माया देवी, सेक्टर 6
बाजार में पहले की तुलना में अभी सब्जी काफी कम मात्र में आ रही है. यही कारण है कीमत आसमान छू रही है. अभी कुछ दिनों तक यही स्थिति बनी रहेगी. बारिश के कारण सब्जी की आवक कम हो गयी है. अभी कीमत कम होने के नहीं, और बढने के आसार है. सावन के बाद ही गिरावट होगी. रविकांत, सब्जी बाजार-सिटी सेंटर
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