सेल्फ डिफेंस कर सकती है गल्र्स कमांडो

बोकारो : किसी भी विषम परिस्थिति में फंसने पर लड़कियां न सिर्फ आत्मरक्षा कर पायें, बल्कि आम्र्ड फोर्स में कैरियर भी बना पायें. इसके अलावा परिस्थिति ज्यादा खतरनाक होने पर लड़कियां स्वयं उसका सामना करने में सक्षम हों. इसके लिए उन्हें ट्रेनिंग देना जरूरी है. अधिकांश सेल्फ डिफेंस प्रोग्राम में लड़कियों को सिर्फ आत्मरक्षा के […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | July 21, 2015 9:30 AM
बोकारो : किसी भी विषम परिस्थिति में फंसने पर लड़कियां न सिर्फ आत्मरक्षा कर पायें, बल्कि आम्र्ड फोर्स में कैरियर भी बना पायें. इसके अलावा परिस्थिति ज्यादा खतरनाक होने पर लड़कियां स्वयं उसका सामना करने में सक्षम हों. इसके लिए उन्हें ट्रेनिंग देना जरूरी है. अधिकांश सेल्फ डिफेंस प्रोग्राम में लड़कियों को सिर्फ आत्मरक्षा के हल्के-फुल्के गुर सिखाये जाते हैं.
आज जरूरत उससे ज्यादा की है. इसका ध्यान रखते हुए बोकारो के विभिन्न स्कूलों और संस्थानों में लड़कियों को मजबूत बनने की सीख दी जा रही है. सेक्टर-3 स्थित बोकारो पब्लिक स्कूल में गल्र्स कमांडो तैयार की जा रही हैं. स्कूल के निदेशक कैप्टन आरसी यादव ने सोमवार को बताया : इस तरह की ट्रेनिंग का दूसरा फायदा यह भी है कि लड़कियां आर्मी और पुलिस जैसे कैरियर विकल्प के बारे में भी सोचना शुरू करती है. आजकल लड़कियां खुद की सिक्योरिटी एंजेसी भी खोल रही है. इस तरह की ट्रेनिंग से वह इस फील्ड में एंटरप्रेन्योरशिप की राह भी बना सकती है. बीपीएस में लड़कियों के लिए कमांडो लेवल सेल्फ डिफेंस प्रोग्राम चलाया जा रहा है. इसकी कमान प्रोफेशनल ट्रेनर व स्पोर्ट्स टीचर के हाथों में है. लड़कियों को जुडो-कराटे और ताइक्वांडो ट्रेनिंग भी दी जा रही है.
विषम परिस्थितियों में लड़कियां पहले ही घबरा कर अपनी हिम्मत खो देती हैं. यदि हिम्मत रखें भी तो उन्हें लड़ने की आदत नहीं होती. इसी स्थिति को बेहतर बनाने के लिए हम लड़कियों को कमांडो लेवल ट्रेनिंग दे रहे हैं.
इससे वह शारीरिक व मानिसक रूप से ज्यादा सबल और सशक्त बन पायेंगी. आत्मरक्षा के लिए बच्चों की ट्रेनिंग प्राइमरी स्कूल से शुरू हो जाती है. बड़ी कक्षाओं में यह ट्रेनिंग एडवांस्ड लेवल पर होती है.
सुधा शेखर, प्राचार्या-बोकारो पब्लिक स्कूल, सेक्टर-3