फर्जीवाड़ा में बीएसएल के दो पूर्व प्रबंधक समेत तीन को तीन साल की सजा

धनबाद/बोकारो : सीबीआइ के विशेष न्यायाधीश चतुर्थ महेश प्रसाद यादव की अदालत ने बुधवार को फर्जीवाड़ा के एक मामले में बोकारो स्टील प्लांट के दो पूर्व प्रबंधक राजेंद्र प्रसाद सिंह, मो सलाउद्दीन व प्राइवेट व्यक्ति सुरेंद्र प्रसाद सिंह को भादवि की धारा 120 बी,420,467,468 में दोषी करार दिया. जबकि पूर्व प्रबंधक द्वय को पीसी एक्ट […]

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धनबाद/बोकारो : सीबीआइ के विशेष न्यायाधीश चतुर्थ महेश प्रसाद यादव की अदालत ने बुधवार को फर्जीवाड़ा के एक मामले में बोकारो स्टील प्लांट के दो पूर्व प्रबंधक राजेंद्र प्रसाद सिंह, मो सलाउद्दीन व प्राइवेट व्यक्ति सुरेंद्र प्रसाद सिंह को भादवि की धारा 120 बी,420,467,468 में दोषी करार दिया.

जबकि पूर्व प्रबंधक द्वय को पीसी एक्ट की धारा 13(2) सहपठित 13(1)(डी) में दोषी पाकर 15-15 हजार रुपये जुर्माना तथा तीन-तीन साल की सजा सुनायी. अदालत ने तीनों आरोपियों को भादवि की उपरोक्त धाराओं में तीन तीन साल की कैद व 5-5 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनायी. सभी सजाएं एक साथ चलेगी. अभियोजन की ओर से सीबीआइ के लोक अभियोजक लवकुश कुमार ने सजा के बिंदु पर बहस की. बाद में अदालत ने सजायाफ्ताओं को झारखंड उच्च न्यायालय में क्रिमिनल अपील याचिका दायर करने के लिए अंशकालिक जमानत दे दी.ज्ञात हो कि वर्ष 1994 में बोकारो स्टील प्लांट में कनवेयर चेंज करने के नाम पर फर्जी ढंग से बगैर काम किये ही एक लाख 99 हजार 4 सौ 52 रुपये का सात फर्जी बिल बनाकर भुगतान लेकर सेल को नुकसान पहुंचाया गया था. इस मामले में बीएसएल बोकारो के पूर्व प्रबंधक द्वय राजेंद्र प्रसाद सिंह, मो सलाउद्दीन सहायक द्वय बालकृष्ण सिंह व एचएस मिश्रा (दोनों मृत) तथा एक प्राइवेट व्यक्ति सुरेंद्र प्रसाद सिंह की संलिप्तता थी. इन पांचों ने मिलकर एक साजिश के तहत प्लांट के जीएचपी और टीपीपी में कनवेयर वेल्ट चेंज करने के नाम पर फर्जीवाड़ा किया था.

बोकारो स्टील प्लांट के पूर्व सीएमडी ने आरोपी अधिकारी द्वय के खिलाफ अभियोजन चलाने की स्वीकृति दी थी. सीबीआइ की रांची शाखा ने गुप्त सूचना के आधार पर 5 जून 95 को आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी. केस के आइओ सीबीआइ के इंस्पेक्टर एसएन खान ने 20 मई 01 को आरोप पत्र दायर किया. अदालत ने 7 मार्च 06 को आरोप गठित कर विचारण शुरू किया था.

अभियोजन की ओर से पीपी श्री कुमार ने 21 गवाहों का परीक्षण कराया. यह मामला आरसी केस नंबर 15/95 आर से संबंधित है.
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