डूबने से नहीं हुई थी विक्रम की मौत

बोकारो: जैनामोड़ निवासी विक्रम की मौत गरगा डैम में डूबने से नहीं हुई थी. इस बात का खुलासा पोस्ट मार्टम रिपोर्ट आने के बाद हो गया है. रिपोर्ट में विक्रम की मौत का कारण उसकी छाती की पसली पर चोट लगना बताया गया है. रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ कि जिस वक्त विक्रम की […]

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बोकारो: जैनामोड़ निवासी विक्रम की मौत गरगा डैम में डूबने से नहीं हुई थी. इस बात का खुलासा पोस्ट मार्टम रिपोर्ट आने के बाद हो गया है. रिपोर्ट में विक्रम की मौत का कारण उसकी छाती की पसली पर चोट लगना बताया गया है. रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ कि जिस वक्त विक्रम की मौत हुई, उस वक्त उसके शरीर में पानी का एक बूंद भी नहीं था. फेफड़े में पानी का नहीं मिलना इस बात को पुख्ता करता है कि विक्रम की मौत पानी में डूबने से नहीं हुई थी. रिपोर्ट पुलिस को सौंप दी गयी है. रिपोर्ट आने के बाद पुलिस हरकत में है. गुरुवार को उसके पांच दोस्तों के खिलाफ गिरफ्तारी का वारंट जारी हो गया है. पुलिस अभियुक्तों की गिरफ्तारी में जुट गयी है.

क्या है मामला : जैनामोड़ निवासी विक्रम का शव 14 मई 2013 को गरगा डैम के बालीडीह थाना क्षेत्र के चीरूडीह गांव के पास मिला था. उसके साथ आये उसके दोस्तों ने ही पुलिस और विक्रम को घर वालों को उसके डूबने की सूचना दी थी. घटना के बाद से ही विक्रम के घर वाले आरोप लगा रहे थे कि विक्रम की मौत डूबने से नहीं बल्कि उसकी हत्या की गयी है. शव का पोस्टमार्टम 15 मई 2013 को को चास अनुमंडल अस्पताल में कराया गया था. मामले को गंभीरता से लेते हुए शव का बेसरा निकाल कर जांच के लिए रांची भेज गया था. उसकी रिपोर्ट के बाद यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है.

पिता ने दर्ज कराया था हत्या का मामला : बालीडीह थाने में परिजनों के कहने पर हत्या का मामला दर्ज कराया था. विक्रम के पिता सुरेश सिंह बीएसएल कर्मी हैं. उन्होंने कहा था कि खुद उन्होंने ने ही विक्रम का शव पानी से बाहर निकाला है. जहां विक्रम का शव था वहां घुटने भर भी पानी नहीं था. जबकि विक्रम की लंबाई करीब छह फीट की है. इसके बाद सवाल उठने शुरू हो गये कि आखिर कैसे छह फीट का लड़का घुटने भर पानी में डूब सकता है. पिता का कहना है कि विक्रम की हत्या कर उसे पानी में फेंक दिया गया था.

विक्रम के दोस्तों ने बताया था : रोबिन तिग्गा और अनमोल सुबह विक्रम के घर से उसे अपनी गाड़ी से बोकारो ले कर आते हैं. सेक्टर तीन में कुछ देर ठहरने के बाद बाकी साथी ब्रजेश तिवारी, अंबुज सिंह और निर्मल महतो (बोकारो में ही) उनसे मिलते हैं. कुछ देर बोकारो में रहने के बाद गरगा डैम नहाने के लिए जाते हैं. वे कपड़े उतार कर पानी में उतरते हैं और खेलने लगते हैं. इसी बीच विक्रम पानी में डूबने लगता है और उसकी जान चली जाती है. वो पास के मछुआरों को आवाज भी देते हैं पर विक्रम को बचाया नहीं जा सकता है.

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