बोकारो: त्योहारों का महीना है, लेकिन यह दीपावली पहले जैसी नहीं होगी, क्योंकि इस दीपावली में चीनी थोड़ी कम होगी. चीनी यानी दीपावली के मौके पर बाजारों में दिखने वाले चीन निर्मित सामान. इस बार की दीपावली मेड इन इंडिया वाली होगी. प्रभात खबर की ओर से चलायी जा रहे मुहिम को आम लोगों का […]
ByPrabhat Khabar Digital Desk|
बोकारो: त्योहारों का महीना है, लेकिन यह दीपावली पहले जैसी नहीं होगी, क्योंकि इस दीपावली में चीनी थोड़ी कम होगी. चीनी यानी दीपावली के मौके पर बाजारों में दिखने वाले चीन निर्मित सामान. इस बार की दीपावली मेड इन इंडिया वाली होगी. प्रभात खबर की ओर से चलायी जा रहे मुहिम को आम लोगों का साथ मिल रहा है.
बाजार के आर्थिक आंकड़े भी यही बता रहे हैं. दुकानदारों की माने तो चीन निर्मित सामान की मांग में 50 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की जा रही है. इसी कारण कई दुकानदार अग्रिम आदेश को रद्द करा रहे हैं. प्रभात खबर के अलावा कई संगठनों ने भी स्वदेशी अभियान का नारा बुलंद किया है.
चीन का आर्थिक सर्जिकल स्ट्राइक : दीपावली त्योहार भारत का जरूर है, लेकिन इसका आर्थिक लाभ चीन उठाता है. स्थापित लक्ष्मी गणेश की मूर्ति से लेकर पटाखा तक में चीन की मोहर रहती है. बोकारो में चीनी सामान का बाजार हर साल 50 लाख से अधिक का है. लेकिन, इस दीपावली यह आंकड़ा 20 लाख के करीब रहने का अनुमान है. कई दुकानदारों ने लोगों की मूड को भांपते हुए चीनी सामानों से दूरी बना ली है. आम लोग भी भारत निर्मित सामान की मांग कर रहे हैं. लोगों का मानना है कि चीन भारतीय बाजार के कारण ही शक्ति के रूप में उभरा है. चीन इस शक्ति का उपयोग भारत के खिलाफ ही कर रहा है. चीन का आर्थिक सर्जिकल स्ट्राइक करने की जरूरत है. त्योहार की रंगत बरकरार रखने के लिए बाजार ने स्पेशल तैयारी कर रखी है.
दुकानदारों ने देश की उत्कृष्टता को निखारने की तैयारी की है. देशी सामान को एंटिक पीस करार देकर उसकी खुबसूरती को बढ़ाया जा रहा है. खास कर राजस्थान के झालर, लटकन… गुजरात का हवा महल, बैलून, चंदनकियारी के टेराकोटा पद्धति से निर्मित दीया व मिट्टी के सजावटी सामान, कोलाकाता का जूट निर्मित सामान दुकानदार व ग्राहकों के सामने विकल्प के रूप में उभरा है. ऐसे उत्पाद की कीमत भी चीन के सामानों के बराबर ही है. जो कि 150 से 5000 रुपया के बीच है.
दुकानदारों ने कहा : अपना देश-अपना पैसा
सजावटी सामान के लिए देशी उत्पादों की कमी नहीं है. इस कारण इस सेगमेंट में चीन बाजार धाराशायी हो रहा है. दुकानदार होने के नाते इस मुहिम का साथ दे रहा हूं. ग्राहक भी स्वदेशी की मांग कर रहे हैं.
रंजन कुमार गुप्ता
व्यवसाय बाद में देश पहले है. देश की सुरक्षा सिर्फ सेना की जिम्मेदारी नहीं है. आम लोगों का भी देश के प्रति कर्तव्य है. इस बार चीन निर्मित लाइट को नेगलेक्ट कर दिया है. कई देशी विकल्प होने से व्यवसाय भी प्रभावित नहीं हो रहा.
दीपक कुमार
पटाखा बाजार में स्वदेशी की मांग ज्यादा हो रही है. स्वदेशी पटाखा में मिस करने की शिकायत कम होती है. साथ ही प्रदूषण का स्तर भी कम होता है. स्वदेशी आंदोलन का असर भी दिख रहा है.
विजय कुमार
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