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बेरमो के लोगों के जेहन में ताजा है इमरजेंसी की यादें

बेरमो के लोगों के जेहन में ताजा है इमरजेंसी की यादें

राकेश वर्मा, बेरमो : 25 जून की मध्य रात्रि से पूरे देश में आपातकाल लागू हो गया. 26 जून से देश के कोने-कोने में इसका विरोध शुरू हुआ. आपातकाल लगने के पहले 14 जनवरी को 1975 को जयप्रकाश नारायण का बेरमो आगमन हुआ था. यहां करगली फुटबॉल मैदान में उन्होंने सभा को संबोधित किया था. उस वक्त बेरमो में जेपी आंदोलन का नेतृत्व समाजवादी नेता सह पूर्व सांसद स्व रामदास सिंह, बेरमो के पूर्व विधायक स्व मिथिलेश सिन्हा, पूर्व मंत्री स्व लालचंद महतो, स्व केडी सिंह, डॉ प्रह्लाद वर्णवाल, मधुसूदन प्रसाद सिंह, मनोरंजन प्रसाद, एसएन सिंह, छात्र नेता प्रमोद कुमार सिंह, रवि मद्रासी, दयानंद वर्णवाल, ललन सिंह अकेला आदि कर रहे थे. बेरमो कोयलांचल में उस वक्त कांग्रेसियों की तूती बोलती थी. उस वक्त बेरमो के पुराने जनसंघी व भाजपा नेता कपिलदेव सिंह (अब स्व) रात-रात भर छात्र नेता प्रमोद कुमार सिंह व रवि मद्रासी के साथ दीवाल पर स्वरचित नारे लिखा करते थे. सबसे बुरा महीना जून, प्रजातंत्र का हो गया खून तथा जेपी का अंतिम संदेश,युवक बचाओ अपना देश जैसे नारे दीवारों पर खूब लिखे. आपातकाल में उनके अलावा प्रमोद सिंह, मद्रासी रवि, मनोरंजन प्रसाद, एसएन सिंह आदि को जेल भेज दिया गया. उस वक्त स्व केडी सिंह के पिता, माता व पत्नी तीनों अस्पताल में थे तथा उन्हें गिरिडीह जेल से हजारीबाग तथा फिर मोतीहारी जेल भेज दिया गया. उन लोगों पर बेरमो रेलवे स्टेशन, राजाबेड़ा पुल व बेरमो पोस्ट ऑफिस उड़ाने की साजिश रचने का आरोप लगाया गया था. इमरजेंसी के पहले इंदिरा गांधी स्वांग आयी थीं. कहते है कई कांग्रेसियों का वाहन बेरमो में एक गुजराती के पेट्रोल पंप से पेट्रोल ले रहे थे. इसी बीच छात्र नेता मद्रासी रवि के नेतृत्व में कई लोगों ने वाहनों से कांग्रेस का झंडा हटा दिया था.

रुक गया था कोयला मजदूरों का वेज रिविजन व बोनस :

इमरजेंसी की याद ताजा करते हुए भाजपा नेता मधुसूदन प्रसाद सिंह बताते हैं कि छात्र आंदोलन में जारंगडीह राजेंद्र उवि के निकट बम विस्फोट कांड में उन्हें गिरफ्तार कर गिरिडीह जेल भेज दिया गया था. इमरजेंसी के दौरान ही कोयला मजदूरों का वेज रिविजन व बोनस रुक गया था. पूर्व सांसद स्व रामदास सिंह को भी जेल हो गया था. एक माह के पेरोल पर छूट कर जब बेरमो आये तो कोयला मजदूरों ने उनका भव्य स्वागत किया था. लेकिन स्वागत करनेवाले मजदूरों को कांग्रेसियों के कोपभाजन का शिकार होना पड़ा था. कई मजदूरों को ट्रांसफर कर दिया गया. उस वक्त कांग्रेसी नेता धमकी में कहा करते थे कोरबा और कुरेसिया (मध्यप्रदेश की कोयला खदानें) जाना है क्या?

डॉ प्रह्लाद देवघर व संतन सिंह चले गये थे गया :

छात्र युवा संघर्ष समिति के उस वक्त के अध्यक्ष सह भाजपा नेता डॉ प्रह्लाद वर्णवाल बताते हैं कि इमरजेंसी लगते ही वह यहां से फरार होकर देवघर तथा संतन सिंह गया चले गये थे. कांग्रेस के रामाधार सिंह की उस वक्त काफी चलती थी. जरीडीह बाजार में भी मर्चेट का आतंक था. पुराने जनसंघी रामचंद्र वर्मा सहित कई लोग उस वक्त आपातकाल के विरोध में थे.

आपातकाल में बेरमोवासियों ने देखी मालिक बाबू की चलती :

एकीकृत बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री सह इंटक नेता बिंदेश्वरी दुबे आपातकाल के दौरान बिहार की कांग्रेस सरकार में स्वास्थ्य मंत्री थे. उनके साथ साये की तरह रहने वाले रामाधार सिंह उर्फ मालिक बाबू की काफी चलती हुआ करती थी. वे जब अपनी जीप नंबर बीआरडब्ल्यू 633 से चला करते थे तो उन्हें रास्ते में पैर छूूने के लिए होड़ मचती थी. सूबे के मंत्री सह बेरमो के विधायक राजेंद्र प्रसाद सिंह ने उस दौर में कांग्रेस व आरसीएमएस में अपनी राजनीति की शुरुआत की थी. कांग्रेस के अन्य नेताओं में स्व संतन सिंह, स्व कृष्ण मुरारी पांडेय, शंकर सिंह, स्व कन्हैया सिंह, स्व केपी सिंह मजदूर राजनीति में सक्रिय थे. लेकिन बिहार से लेकर दिल्ली तक की कांग्रेस की राजनीति में रामधार सिंह की ही तूती बोला करती थी. कहते हैं इनके घर से ही उस वक्त एमएलए का टिकट बंटा करता था. कांग्रेस नेताओं का यहां इस कदर इमरजेंसी में आतंक था कि कई विरोधी दल के नेता यहां से फरार हो गये, कई लोगों को पुलिस ने झुठे मुकदमें फंसा कर जेल भेजवा दिया. कई लोगों ने सरेंडर कर दिया तो कई लोग कांग्रेस में ही शामिल हो गये. उस वक्त पर्दा पर सिनेमा दिखाने वाले जनवादी नौजवान सभा के अशोक सेन को बुलाकर सिनेमा दिखाने वाली मशीन को सीज कर दिया गया. एटक नेता सुजीत कुमार घोष बताते हैं कि जब मालिक बाबू आपातकाल के दौरान अपनी जीप में चला करते थे तो उनकी राजनीति की बानगी देखते ही बनती थी. कोलियरी में काम करनेवाले कोयला मजदूरों का हुजूम उमड़ता था. धौड़ों के सरदार भी इनके सामने नतमस्तक रहते थे. मालिक बाबू के साथ उस वक्त लक्ष्मेश्वर सिंह, रामसिंहासन सिंह, विपिन सिंह, लखन सिंह, त्रिवेणी सिंह, रामनारायण सिंह आदि साथ रहा करते थे.

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