दीनबंधु/मो तसलीम चतरा. शहर में आज तक बाइपास सड़क नहीं बनी है, जिसके कारण शहरवासियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. लोग दिन में जाम से, तो रात में कोल वाहनों के परिचालन से परेशान रहते हैं. वायु व ध्वनि प्रदूषण ने लोगों का जीना हराम कर रखा है. रातभर लोग सही से सो नहीं पाते हैं. रात में मेन रोड में कोल वाहनों की आवाजाही से बड़ी दुर्घटना की आशंका बनी रहती है. मेन रोड में सड़क किनारे रहने वाले कई लोग हट कर दूसरे मुहल्ले में घर बना कर रहने को मजबूर हैं. मेन रोड में सिर्फ दुकान चलाते हैं. रात नौ बजे नो इंट्री खुलते ही शहर में बड़े-बड़े कोल वाहनों का परिचालन शुरू हो जाता है. रातभर में 700 से अधिक कोल वाहनों का परिचालन होता है. मगध, आम्रपाली, पिपरवार, लातेहार के तेतरिया खाड़ से कोयला लेकर वाहन बिहार, यूपी समेत कई राज्यों में जाते हैं. पुराना पेट्रोल पंप से केसरी चौक व केसरी चौक से मुख्य डाकघर तक सड़क किनारे रहने वाले लोगों को सबसे अधिक परेशानी होती है. दिन में मेन रोड में हमेशा जाम की स्थिति बनी रहती है. जाम होने के कारण बच्चे समय पर स्कूल नहीं पहुंच पाते हैं. आवश्यक कार्य से निकले लोगों को भी परेशानी होती है. बाजार होता है प्रभावित रात नौ बजे के बाद लोग अपनी-अपनी दुकानें बंद कर घर चले जाते हैं, जिससे बाजार प्रभावित हो रहा है. शाम में लोग बाजार में मार्केटिंग के लिए निकलते हैं, लेकिन लोग जल्दबाजी में मार्केटिंग करते हैं. नौ बजते ही मेन रोड में वाहनों का प्रवेश शुरू हो जाता हैं. सबसे अधिक परेशानी पर्व त्योहार में होती है. हर बार चुनाव में बनता है मुद्दा लोकसभा व विधानसभा चुनाव में बाइपास सड़क चुनावी मुद्दा बनता है. प्रत्याशी बाइपास सड़क बनाने का आश्वासन देते हैं, लेकिन चुनाव जीतने के बाद भूल जाते हैं. चतरा विधायक सह मंत्री सत्यानंद भोगता ने विधानसभा चुनाव के दौरान बाइपास सड़क बनाने का वादा किया था, लेकिन साढ़े चार साल बीतने के बाद भी कोई पहल नहीं की गयी. सांसद का भी ध्यान इस ओर नहीं है. दुर्घटना का भय बना रहता है मेन रोड में रहने वाले रोहित जैन ने कहा कि रातभर कोल वाहनों के परिचालन से सो नहीं पाते हैं. वाहनों की आवाज से काफी परेशानी होती है. घर से बाहर नहीं निकल पाते हैं. हमेशा दुर्घटना की आशंका बनी रहती है. होटल संचालक शंकर चौधरी ने कहा कि नो इंट्री खुलते ही वाहनों की लंबी कतारें लग जाती है. डर से ग्राहक दुकान नहीं आते हैं, कारोबार प्रभावित होता है. बजरंगी कसेरा ने कहा कि नो इंट्री खुलने के पहले ही दुकान बंद कर घर में कैद हो जाते हैं. वाहनो के धुआं से सांस लेने में दिक्कत होती है. डीएलओ ने कहा जिला भू-अर्जन पदाधिकारी वैभव सिंह ने कहा कि बाइपास सड़क के लिए 14 गांव के 175.85 एकड़ जमीन को चिह्नित किया गया है. इसकी सूची एनएच हजारीबाग को भेज दी गयी है. मुआवजा भुगतान एनएच द्वारा किया जायेगा. भुगतान की प्रक्रिया पूरी होने पर बाइपास सड़क का निर्माण कार्य शुरू होगा.
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अब तक नहीं बनी बाइपास सड़क
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Prabhat Khabar News Desk
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