कान्हाचट्टी़ प्रखंड के कठौतिया गांव स्थित सरना स्थल पर रविवार को धूमधाम से सरहुल पर्व मना. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि जिप उपाध्यक्ष बिरजू तिवारी ने कहा कि सरहुल पर्व हम सबको सीधे तौर पर प्रकृति से जोड़ता है. आदिवासी समाज अनंत काल से प्रकृति पूजक व पर्यावरण संरक्षक रहा है. इस पर्व नये साल की शुरुआत का भी प्रतीक माना जाता है. यह पर्व झारखंड,बिहार, ओड़िसा और बंगाल में भव्य तरीके से मनाया जाता है. आदिवासी समाज की यह परंपरा पूर्वजों के जमाने से चली आ रही है. इस परंपरा को उत्सव के रूप में मनाकर नयी पीढ़ी को सरहुल और पर्यावरण का महत्व बताना है. इस अवसर पर दिलीप उरांव, महेंद्र उरांव, विजय उरांव, मुखिया सुप्रिया देवी आदि मौजूद थे.
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