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विडंबना: मातृ मंदिर बालिका मवि में पांच वर्ष बाद भी, पोषक क्षेत्र की लड़कियां पढ़ाई से वंचित, विभाग को चिंता नहीं

8 Nov, 2017 8:06 am
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विडंबना: मातृ मंदिर बालिका मवि में पांच वर्ष बाद भी, पोषक क्षेत्र की लड़कियां पढ़ाई से वंचित, विभाग को चिंता नहीं

देवघर : राजकीयकृत मातृ मंदिर बालिका मध्य विद्यालय का भवन पांच वर्ष पहले ढह गया था. इसके बाद से अबतक नया भवन नहीं बना. इस कारण मवि को पुराना मीना बाजार कैंपस में चल रहा है, जो की बालिका मवि से करीब तीन किमी दूर है. इस दूरी के कारण विद्यालय के पोषक क्षेत्र विश्वनाथ […]

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देवघर : राजकीयकृत मातृ मंदिर बालिका मध्य विद्यालय का भवन पांच वर्ष पहले ढह गया था. इसके बाद से अबतक नया भवन नहीं बना. इस कारण मवि को पुराना मीना बाजार कैंपस में चल रहा है, जो की बालिका मवि से करीब तीन किमी दूर है. इस दूरी के कारण विद्यालय के पोषक क्षेत्र विश्वनाथ झा पथ, बमबम बाबा पथ, रिखिया रोड, सीडी द्वारी पथ, बीएन झा पथ, शीतल मल्लिक रोड, मिथिला बिहार, हरिहरबाड़ी पथ, ऑफिसर कॉलोनी की बच्चियों को काफी परेशानी हो रही है.

यहां की बच्चियों को पढ़ाई के लिए दूरी तय कर अन्यत्र जाना पड़ता है. हालांकि मध्य विद्यालय पुराना मीना बाजार कैंपस में शिफ्ट किये गये राजकीयकृत मातृ मंदिर बालिका मध्य विद्यालय पढ़ाई चल रहा है, लेकिन पोषक क्षेत्र से दूरी अधिक होने के कारण बच्चियों को हर दिन विद्यालय आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ता है.

इसका नतीजा है कि पिछले पांच वर्षों में उक्त पोषक क्षेत्र की लड़कियों की पढ़ाई के प्रति रुचि कम हुई है. वर्तमान में मध्य विद्यालय पुराना मीना बाजार कैंपस में संचालित विद्यालय में 41 लड़कियां अध्ययनरत हैं. इसमें अधिकांश लड़कियां मध्य विद्यालय पुराना मीना बाजार कैंपस के आसपास के पोषक क्षेत्र डोमासी, मीना बाजार, जून पोखर आदि जगहों की है.

पहले चार सौ से ज्यादा बच्चियां थीं नामांकित
विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, राजकीयकृत मातृ मंदिर बालिका मध्य विद्यालय जब अपने पोषक क्षेत्र में संचालित होता था, तो उस वक्त वहां पढ़ाई के लिए बच्चियों की भीड़ लगती थी. औसतन हर वर्ष चार सौ से साढ़े चार सौ बच्चियों का दाखिला होता था. लेकिन, विद्यालय भवन ढहने के बाद स्थित बदल गयी. बच्चियां पढ़ाई से दूर हो रही है. बावजूद विभाग गंभीर नहीं है.
कहते हैं पोषक क्षेत्र के लोग
सरकार व विभाग के उदासीन रवैये के कारण आज बच्चियों को समुचित पढ़ाई से वंचित रहना पड़ रहा है. यहां की बच्चियों को दूर के स्कूलों में जाना पड़ता है.
– अजय मिश्रा, हिंदी विद्यापीठ पथ
लड़कियों की शिक्षा के प्रति सरकार गंभीरता दिखाती है. लेकिन, रिजल्ट धरातल पर नहीं उतरता है. स्कूल भवन का जल्द निर्माण होना चाहिए.
– चंदन झा, हिंदी विद्यापीठ पथ
स्कूल भवन नहीं होने के कारण बच्चियों को पढ़ाई करने में परेशानी हो रही है. शिक्षा विभाग बच्चियों के प्रति गंभीरता दिखाते हुए स्कूल भवन निर्माण करायें.
– प्रदीप चरण द्वारी, सीता होटल पथ
लड़कियों को शिक्षित करने के लिए स्कूल का होना जरूरी है. यहां अविलंब स्कूल भवन का निर्माण कराना जरूरी है.
– सुधीर कुमार झा, विश्वनाथ झा पथ
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