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एसडीओ ने बतायी जांच की जरूरत बगैर एसडीओ को सूचना दिये कर्मी ले गये हैं बैंक का रजिस्टर परली को ज्योतिर्लिंग बता फैला रहे अफवाह बाबा नगरी के विद्वान पंडितों ने प्रमाण के साथ बताया- बाबाधाम ही ज्योतिर्लिंग बैद्यनाथधाम ज्योतिर्लिंग व परली को लेकर विवाद में बैद्यनाथधाम के पुरोहित खुलकर सामने आ कर प्रमाण दे […]

एसडीओ ने बतायी जांच की जरूरत

बगैर एसडीओ को सूचना दिये कर्मी ले गये हैं बैंक का रजिस्टर
परली को ज्योतिर्लिंग बता फैला रहे अफवाह
बाबा नगरी के विद्वान पंडितों ने प्रमाण के साथ बताया- बाबाधाम ही ज्योतिर्लिंग
बैद्यनाथधाम ज्योतिर्लिंग व परली को लेकर विवाद में बैद्यनाथधाम के पुरोहित खुलकर सामने आ कर प्रमाण दे रहे हैं. विद्वानों का कहना है कि यह ज्योतिर्लिंग पहले बिहार में था जो विभाजन के बाद झारखंड में अवस्थित है .शास्त्रों से लेकर कई धार्मिक ग्रंथों तक में इसके प्रमाण हैं. उठे विवाद के बाद गठित विद्वानों की समिति के सदस्यों की राय प्रभात खबर प्रकाशित कर रहा है. इसकी दूसरी कड़ी में पढ़िये सूची में शामिल अन्य विद्वानों की राय.
देवघर : बैद्यनाथधाम ज्योतिर्लिंग व परली को लेकर विवाद में बैद्यनाथधाम के पुरोहित खुलकर सामने आ कर प्रमाण दे रहे हैं. विद्वानों का कहना है कि यह ज्योतिर्लिंग पहले बिहार में था जो विभाजन के बाद झारखंड में अवस्थित है .शास्त्रों से लेकर कई धार्मिक ग्रंथों तक में इसके प्रमाण हैं. उठे विवाद के बाद गठित विद्वानों की समिति के सदस्यों की राय प्रभात खबर प्रकाशित कर रहा है. इसकी दूसरी कड़ी में पढ़िये सूची में शामिल अन्य विद्वानों की राय.
विद्वानों ने बैद्यनाथधाम, देवघर के पक्ष में दिये कई प्रमाण
परली की अर्थ व्यवस्था को चमकाने का हथकंडा है यह प्रयास
परली का मतलब हरीतिका जंगल से है. जिसे हरलाजोड़ी के नाम से जाना जाता है. नवम ज्योतिर्लिंग बैद्यनाथ को प्रमाणित करने के लिये साक्ष्य की कमी नहीं है. लेकिन परली को ज्योतिर्लिंग साबित करने के लिये कोई ठोस प्रमाण नहीं है. यहां के बारे में आदि गुरु ने भी विस्तार से बता दिया है.
– पंडित मुकुंद नारायण पुरोहितवार
परल्याम बैद्यनाथं च श्लोक लिखकर परली के किसी विद्वान ने श्लोक के साथ छेड़छाड़ कर विवाद पैदा कर दिया. परली को लोग जबर्दस्ती ज्योतिर्लिंग बनाने पर तुले हैं. बैद्यनाथम चिता भूमो हर जगह प्रमाणित है. इस बात का जिक्र भारतेंदु हरिश्चंद्र ने भी अपनी पुस्तकों में किया है.
– पंडित विष्णुकांत झा
किसने क्या कहा
परली का ज्योतिर्लिंग होने का सवाल ही नहीं है. इसका कोई ठोस प्रमाण नहीं है, लेकिन झारखंड बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग लिंग का प्रमाण शिव पुराण के कांटी रुद्र संहिता में विस्तार से बताया गया है. बैद्यनाथ चिता भूमो:जिसके पूर्व में समुद्र व गंगा के दक्षिण दिशा में हरला जोड़ी जहां पहले हर्रे का वन था के समीप स्थापित ही सही ज्योतिर्लिंग माना गया है. इस तथ्य को पद्म पुराण में श्लोक के माध्यम से विस्तार से प्रमाणित किया गया है.
– डॉ नरेंद्र नाथ ठाकुर
पूर्व में इसको लेकर एक बार विवाद हुआ था. आदि गुरु शंकराचार्य के द्वारा ही परल्याम बैद्यनाथम च लिखा गया था. परल्याम का अर्थ चिता व जंगल से था. न की परली स्थान से बाद में आदि गुरु ने विवाद न हो श्लोक को संशोधित भी किया था.पूर्व व उत्तर में परली आता ही नहीं है. ये तो पूरी तरह से दक्षिण में है. भौगोलिक हिसाब से भी देवघर ज्योतिर्लिंग सभी मामले में फिट बैठता है. इसके कई प्रमाण हैं. तर्क का जवाब हो सकता है कुतर्क नहीं. देवनगरी की बढ़ती अर्थ व्यवस्था को देखते हुए परली के लोगों ने ये हथकंडा अपनाया है. अर्थ व्यवस्था के दृष्टिकोण से परली में गरीबी अधिक है.
– चंद्रशेखर पांडेय
परली को ज्योतिर्लिंग बताने का कोई मतलब नहीं है. इसका कोई प्रमाण नहीं है. एक श्लोक परल्याम बैद्यनाथम इस श्लोक काे अगर देखा जाये तो कोई भी विद्वान श्लोक के साथ छेड़ छेड़ होने की बात बता देंगे. रही बात झारखंड बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग की तो इसके कई प्रमाण हैं. शिव पुराण, कोटि रुद्र संहिता, बैद्यनाथ चिता भूमो, पद्म पुराण, पाताल खंड, तंत्र ग्रंथ में इसकी विस्तार से चर्चा की गयी है.
– आचार्य चिंतामणि कर्म्हे
आज जो विवाद उत्पन्न हो रहा है, उसका मूल कारण समय पर प्रतिकार नहीं होना है. उदाहरण के तौर पर धर्म शास्त्र के अनुसार भी चार पीठ हैं. इन चारों पीठ में एक-एक शंकराचार्य अर्थात चार शंकराचार्य हैं. लेकिन आज सैंकड़ों साधु सन्यासी अपने आप को शंकराचार्य बता रहे हैं, यह प्रतिकार नहीं होने की वजह से है. सर्व काम पद्म भस्म पूशां धरमं शुद्धं गौरं परं पार्वती संयुक्तम. झारखंड वणे हाद्र पीठ स्थितम बैद्यनाथं भजे नाथ नाथम शिवम
– पंडित संजय मठपति
चिता भूमो च बैद्यनाथम, हाद्रपीठे तु बैद्यनाथम इस बात का प्रमाण शिव पुराण, दिवेश्वर संहिता, कोटि रुद्र संहिता, पद्म पुराण, तंत्र सार कुलार्णव से लेकर दर्जनों धर्म ग्रंथों में विस्तार से बताया गया है. लेकिन परली का कहीं जिक्र नहीं है. बेकार का विवाद है. झारखंड में ही ज्योतिर्लिंग मौजूद है. परली में नहीं.
– पंडित भोला मिश्र
सती का दाह संस्कार यहां हुआ. हाद्रपीठ होने का पूरा प्रमाण है. भोलेनाथ सती के हृदयपर विराजमान हैं. इसका पूरा प्रमाण धर्म ग्रंथों से लेकर तंत्रों में मौजूद है. परली का कहीं नाम तक नहीं परली के लोग केवल विवाद को बढ़ावा दे रहे हैं. उनके पास कोई प्रमाण हैं तो आगे आवें.
– पंडित श्री राम सरेवार
Prabhat Khabar Digital Desk
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