इजराइल से प्रशिक्षण लेकर लौटे किसान वकील यादव ने कहा
वकील यादव ने खेती, पशुपालन व मछली पालन पर अब तकनीकी प्रयोग करना शुरू कर दिया है
देवघर : राज्य सरकार ने खेती की उन्नत तकनीक जानने के लिए किसानों के दल को इजरायल भेजा था. इस दल में देवघर के पदनबेहरा गांव के किसान वकील यादव भी शामिल थे. उन्होंने चार दिनों तक इजराइल में प्रशिक्षण लिया. इजराइल से लौटते ही वकील ने घास काटने के लिए मशीन खरीदी. वकील ने इजराइल के कृषि तकनीकी विशेषज्ञों के साथ नर्सरी, खेती, पशुपालन व मछली पालन का प्रशिक्षण लिया. इस दौरान किसानों को थ्योरीकल जानकारी भी इजराइल के कृषि विशेषज्ञों ने दी. प्रशिक्षण प्राप्त घर लौटे किसान वकील यादव ने खेती, पशुपालन व मछली पालन पर अब तकनीकी प्रयोग करना शुरू कर दिया है.
वकील ने कहा कि सरकार किसानों की आय दोगुनी करने के लिए कई योजनाएं लेकर आ रही है, लेकिन पर्याप्त संसाधन होने के बाद भी अगर किसान कृषि, पशुपालन व मछली पालन में तकनीकी तरीका नहीं अपनायेंगे, तो किसान की आय दोगुनी नहीं हो पायेगी. बगैर पानी वाला देश इजराइल जब समुद्र का पानी को फिल्टर कर बूंद-बूंद से सिंचाई कर कृषि में समृद्ध हो रहा है, तो प्राकृतिक संपदा से परिपूर्ण झारखंड में क्यों नहीं कृषि में समृद्ध हो सकता है.
श्री यादव ने कहा कि इजराइल में कृषि उत्पाद के प्रोसेसिंग व मार्केटिंग पर अधिक फोकस किया गया है. किसानों का आय बढ़ाने के लिए सरकार को फसल, सब्जी, फल, फूल व दूध की प्रोसेसिंग व मार्केटिंग पर योजनाबद्ध तरीके से काम करना होगा. अगर किसानों को स्थानीय स्तर पर ही मार्केटिंग की व्यवस्था करा दी जाये, तो किसानों की आय निश्चित रूप से दोगुनी होगी.
गाय काे जितना आराम देंगे, दूध उतना बढ़ेगा : इजराइल में गाय पालन पर भी तकनीक को अपनाया गया है. पशुशाला में पंखा व पानी का फव्वारा लगाया गया है. गाय को सूखा चारे में चोकर अधिक दिया जाता है. गोबर व गोमूत्र को हटाया नहीं जाता है, यह एंटीबॉयोटिक का काम करता है. जिससे गाय को मच्छर व मक्खी नहीं लगती है. मछली के उत्पादन में मशीन के जरिये भोजन दिया जाता है व मशीन के जरिये मछली पकड़ा जाता है. सरकार को इस सिस्टम का प्रयोग यहां करना होगा.
परंपरागत खेती में नया प्रयोग करना बेहतर होगा
वकील ने बताया कि भारत परंपरागत खेती का देश रहा है, लेकिन जिस तरह से कृषि उत्पाद की डिमांड बढ़ी है, उस अनुसार केवल परंपरागत खेती से आपूर्ति पर्याप्त नहीं हो सकती है. परंपरागत खेती के साथ योजनाबद्ध तरीके से तकनीकी खेती को भी अपनायेंगे, तभी उत्पादन बढ़ेगा व किसानों की आय बढ़ेगी. किसानों को केवल एक फसल पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा. परंपरागत खेती में ही कृषि विशेषज्ञों की सलाह पर नयी फसलों की खेती का प्रयोग करना होगा.
कृषि यंत्रों का करें इस्तेमाल
वकील ने बताया कि खेती में कृषि यंत्रों का किसान अधिक से अधिक उपयोग कर सकते हैं. कृषि यंत्र से समय पर योजनाबद्ध तरीके से काम हो पायेगा. कृषि विभाग के पास किसानों को अनुदान में कृषि यंत्र उपलब्ध कराने के लिए कई योजनाएं हैं. खेती को तैयार करने से लेकर, खर-पतवार हटाने व फसलों की कटाई में कृषि यंत्र का प्रयोग कर सकते हैं. इसमें किसानों को लागत कम होती है.
ग्रीन हाउस में करें पौधे को तैयार
वकील ने बताया कि इजराइल में फसल, सब्जी, फूल व फल के शुरुआती पौधे ग्रीन हाउस व पॉली हाउस तैयार किये जाते हैं. इससे तापमान को नियंत्रित किया जा सकता है, जिससे फसल की उत्पादन क्षमता बढ़ती है. सरकार को बड़े पैमाने पर किसानों को अनुदान पर ग्रीन हाउस व पॉली हाउस की व्यवस्था करनी चाहिए. बागवानी करने वाले किसानों को नर्सरी के रूप में पौधों को तैयार करने के लिए प्लास्टिक ट्रे का उपयोग करना चाहिए, इससे मिट्टी में लगातार नमी बनी रहती है व खर-पतवार की संभावना कम रहती है.
पानी की हर बूंद का प्रयोग करें
भारत में कई जगह खेती में किसान सिंचाई के दौरान जरूरत से अधिक पानी डालते हैं. कम पानी में हम क्षमता के अनुसार उत्पादन कर सकते हैं. धान व गेहूं की फसलों में स्प्रिंकल सिस्टम व अन्य फूल, फल व सब्जियों की खेती में बूंद-बूंद सिंचाई कर अच्छी व अधिक उत्पादन कर सकते हैं. पूरा इजराइल बूंद-बूंद की सिंचाई से बड़े पैमाने पर कृषि उत्पादन कर रहा है. ड्रीप एरिगेशन से बूंद-बूंद कर पानी पौधों के जड़ में जरूरत के अनुसार जाता है, इससे पौधों में हरियाली बनी रहती है. साथ ही खर-पतवार कम होता है. पीएम कृषि सिंचाई योजना से किसान ड्रीप एरिगेशन सिस्टम का लाभ अनुदान पर प्राप्त कर सकते हैं.
