दुस्साहस. देवघर पुलिस को चुनौती देकर भीड़भाड़ वाले इलाके में कर दी हत्या
देवघर : शहर की पुलिस देखती रह गयी और चुनौती देकर अपराधी शनिवार की शाम करीब सात बजे प्राइवेट बस स्टैंड के समीप संजय मेडिकल पहुंच कर काउंटर पर बैठे दवा व्यवसायी विनोद वाजपेयी (43) के मुंह में पिस्तौल डालकर गोली मार दी. इससे उसकी घटनास्थल पर ही मौत हो गयी. इसके बाद अपराधी आराम से बगल वाली गली में बस स्टैंड की तरफ भाग निकला. सदर अस्पताल लाने पर ऑन ड्यूटी डॉक्टर ने विनोद को मृत घोषित कर दिया.
अपने स्टाफ के साथ दुकान पर बैठे थे विनोद : घटना से पहले विलियम्स टाउन बीएड कॉलेज के समीप निवासी विनोद अपने एक स्टाफ दिवाकर कश्यप के साथ दवा दुकान में बैठे थे. घटना के चश्मदीद दिवाकर के अनुसार, पल्सर पर सवार होकर रोहिणी निवासी केशव दुबे अपने एक साथी के साथ वहां पहुंचा और केश कंपरमाइज नहीं करने की बात कहते हुए पिस्तौल निकाली और गोली मार दी. गोली की आवाज सुनकर आसपास के लोग दौड़े, तब तक दोनों पल्सर पर बैठकर भाग गये.
दो दिन पहले दी थी धमकी : बताया जा रहा है कि कई दिनों से केशव जमीन विवाद को लेकर धमकी दे रहा था. दो दिन पूर्व भी दुकान में आकर धमकी दी थी.
घर व दुकान में उस दिन रोड़ेबाजी भी की थी. मामले को लेकर बड़े भाई सुमन दुबे ने उसी दिन नगर थाने व एसडीपीओ को शिकायत दी थी.
इसको लेकर नगर थाने में शनिवार को एफआइआर दर्ज किया गया और केशव के भाई बिट्टू दुबे को पुलिस ने जेल भेजा. एसडीपीओ की मानें तो इस परिवार को एक पिस्टल व कारबाइन धारी सुरक्षा मुहैया करायी गयी थी, जो विनोद के भाई सुमन के साथ घर पर थे.
घटना के बाद बड़े भाई सुमन की तबीयत बिगड़ी
घटना के बाद मृतक के भाई सुमन वाजपेयी की तबीयत बिगड़ गयी, उन्हें सदर अस्पताल में भर्ती कर इलाज कराया जा रहा है. घटना के बाद एसडीपीओ विकास चंद्र श्रीवास्तव समेत नगर थाना प्रभारी विनोद कुमार व देवघर अनुमंडल के अन्य सभी थाना प्रभारी सदर अस्पताल पहुंचे. देखते-देखते पूरा अस्पताल पुलिस छावनी बन गया. रात में ही डीसी के आदेश पर मेडिकल बोर्ड द्वारा विनोद के शव का पोस्टमार्टम कराया गया. घटना से लोग काफी आक्रोशित थे और सारा भड़ास पुलिस पर ही निकाल रहे थे.
पुलिस की लापरवाही से गयी जान: भाई संजय
मृतक के मंझले भाई संजय का कहना है कि पुलिस की लापरवाही से छोटे भाई की जान गयी. लगातार केशव दुबे मोबाइल पर धमकी दे रहा था.
बच्चों के अपहरण करने की बात कह रहा था. एसडीपीओ व थाना प्रभारी को घटना की जानकारी देते रहे. बावजूद समय पर सुरक्षा नहीं दी गयी. घटना के पांच मिनट पूर्व छोटे भाई ने भैया को कॉल कर केशव के दुकान पहुंचने की बात कही तो उन्होंने पुलिस को सूचित कर पीसीआर पुलिस भेजने का आग्रह किया. अगर पीसीआर पुलिस मौके पर आ जाती तो शायद विनोद बच जाता, किंतु अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया.