देवघर : शहर को साफ-सुथरा रखने व खुले में जहां तहां शौच से मुक्त करने के लिए शहरी क्षेत्र में तामझाम के साथ 20 सामुदायिक शौचालय बनाये गये. शौचालय में सशुल्क शौच की व्यवस्था थी. शुरुआत में शौचालय बनने के साथ चलना शुरू हो गया.
लेकिन, समय के साथ निगम की उदासीनता के कारण आधे से अधिक शौचालय में ताे ताला लटक गया व कोई यूं ही रखे-रखे बेकार पड़ गया. जनता के पैसों से बने शौचालय का बुरा हाल है.
महिला-पुरुष के अलग-अलग शौचालय : प्रत्येक शौचालय 23 लाख 80 हजार की लागत से बना है. इसमें महिला-पुरुष दोनों के लिए अलग-अलग शौच, स्नानागार व यूरिनल की सुविधा है. जिस मकसद से शौचालय का निर्माण किया गया था. उसका समुचित लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है. यह कुछ ही लोगों तक सीमित होकर रह गया है.
नहीं होती नियमित सफाई : शहर के अधिकांश शौचालय गलत जगह बने हैं. अधिकांश शौचालय में ताला बंद है. कुछ में गंदगी पसरी हुई है. पूरे शौचालय परिसर में गुटका, प्लास्टिक, कागज फेंके हुए हैं. इसकी नियमित सफाई नहीं होती है. गंदगी के कारण लोग शौचालय नहीं जाते हैं.
क्या है नियम
हर शौचालय सुबह से देर शाम तक खुला रखना है. शौचालय के बाहर मैनेजर के रूप में एक आदमी मौजूद रहना है. वह शुल्क लेकर लोग को अंदर प्रवेश करने देगा. उसकी नियमित सफाई होगी. शौचालय में पर्याप्त मात्रा में पानी, रोशनी की व्यवस्था रहनी चाहिए.
हाल सामुदायिक शौचालय का
- नंदन पहाड़ के पास सामुदायिक शौचालय में ताला बंद है. यह पिछले कई महीनों से खुला तक नहीं है.
- जलसार रोड जटाहर बाबा के निकट के सामुदायिक शौचालय खुला तो है. लेकिन गंदगी पसरी हुई है.
- छतीसी तालाब के निकट भी ताला लगा हुआ है. वहां पानी की समस्या है. महिला आना नहीं चाहती है.
- पुरनदाहा तालाब के निकट के शौचालय में आदमी रहता है. उसे मानदेय नहीं मिल रहा है.
- हिरणा टीवी सेंटर के पास के शौचालय के खुलने व बंद होने का समय निर्धारित नहीं है.
- जसीडीह मुख्य मार्ग के सामुदायिक शौचालय में अधिकांश समय ताला बंद रहता है.
- सदर अस्पताल मुख्य रोड के सामुदायिक शौचालय में ताला बंद रहता है.
- कौन है सौदागर, पुलिस के लिए पता लगाना मुश्किल