परंपरागत तरीके से लोगों ने मनाया नवान्न
फोटो संजीव के फोल्डर में -नारायण भगवान को चढ़ाया साकल-घरों में मंत्रोच्चारपूर्वक किया साकल से हवन-नये अन्न से हुआ धार्मिक कार्य-पितर को दिया भुज दानसंवाददाता, देवघरधार्मिक नगरी देवघर में नवान्न पर्व हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया. इस अवसर पर भक्तों ने भगवान को साकल व अक्षत चढ़ाया. उसके उपरांत अपने-अपने घरों में दूध, दही, घी, मधु, […]
फोटो संजीव के फोल्डर में -नारायण भगवान को चढ़ाया साकल-घरों में मंत्रोच्चारपूर्वक किया साकल से हवन-नये अन्न से हुआ धार्मिक कार्य-पितर को दिया भुज दानसंवाददाता, देवघरधार्मिक नगरी देवघर में नवान्न पर्व हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया. इस अवसर पर भक्तों ने भगवान को साकल व अक्षत चढ़ाया. उसके उपरांत अपने-अपने घरों में दूध, दही, घी, मधु, घंघरा, नया चावल, केला, मूली, गुड़, गंगा जल आदि मिलाकर साकल बनाया. काष्ठ की पीढ़ी पर बैठ कर चौक से बनी रंगोली पर मिट्टी के बने पवित्र चूल्हे में मंत्रोच्चारपूर्वक अग्नि को अर्पित की गयी. उसके उपरांत ही भक्तों ने दही, चूड़ा, गुड़, के ला, तिल आदि का सेवन किया. वहीं अपने पितर को भुज दान किया. इस दौरान चावल, तिल, केला, मूली आदि दिया गया. कुल पुरोहित को कपड़ा व दक्षिणा देकर निवृत्त हुआ.इस संबंध में पंडित कामेश्वर मिश्र ने बताया कि साल में एक दिन नवान्न को ही भगवान नारायण को नया अरवा चावल चढ़ाया जाता है. नव अन्न से अर्पित करने से नारायण प्रसन्न होते हैं. अपने भक्तों को मनोवांछित फल देते हैं. श्री मिश्र ने बताया कि इस दिन अपने पितर को भुज दान देने की अति प्राचीन परंपरा रही है. उन्हें कुल पुरोहित के माध्यम से चावल, तिल केला, मूली आदि अर्पित की जाती है. इससे पितर खुश होकर अपने वंशजों की रक्षा करते हैं.
