इन सेल्टिस जनजाति के संन्यासियों के अलावा योगियों तथा संन्यासियों का एक और छोटा-सा समुदाय (एस नेज) भी था जो कि मृत सागर के निकटवर्ती क्षेत्र-पैलेस्टाइन मरुस्थल में रहा करता था और उस समय उनके दो विश्व-विख्यात प्रचारक जॉन (वैपटिस्ट) तथा ईसा मसीह पैलेस्टाइन मरुस्थल में घूम-घूमकर अपनी शिक्षाओं का प्रचार-प्रसार किया करते थे. इस दृष्टिकोण से देखने पर यह स्पष्ट होता है कि ये ध्यान के अभ्यास जो मनुष्य के चेतनात्मक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, पाश्चात्य जगत में एकाएक नहीं खोजे गये, बल्कि इन अभ्यासों के पीछे महान ऐतिहासिक परंपरा और क्रमिक विकास का इतिहास छिपा है. अनेक शताब्दियों का इतिहास बताता है कि जिन्होंने भी अपने कट्टरपंथी धर्मों की सीमाओं के बाहर जाकर महान आध्यात्मिक उपलब्धियों के लिए प्रयास किया, उन्हें घोर अपमान, यातनाओं और मृत्यु का सामना करना पड़ा.
प्रवचन:::: ध्यान चेतना के विकास में सहायक है
इन सेल्टिस जनजाति के संन्यासियों के अलावा योगियों तथा संन्यासियों का एक और छोटा-सा समुदाय (एस नेज) भी था जो कि मृत सागर के निकटवर्ती क्षेत्र-पैलेस्टाइन मरुस्थल में रहा करता था और उस समय उनके दो विश्व-विख्यात प्रचारक जॉन (वैपटिस्ट) तथा ईसा मसीह पैलेस्टाइन मरुस्थल में घूम-घूमकर अपनी शिक्षाओं का प्रचार-प्रसार किया करते थे. इस […]
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