प्रवचन::: प्रकाश मनुष्य के हृदय में रहता है

ताओ मतानुसार प्रकाश मनुष्य के हृदय में रहता है. ताओ क्रियायोग में साधक इस प्रकाश को जागृत कर शरीर में घुमाता है. अंतिम फल के रूप में उसे स्वर्ण पुष्प की उपलब्धि होती है जो अमृतत्व का प्रतीक है. ताओ ध्यान की वह व्यावहारिक तकनीक है जिसके द्वारा सहज स्वाभाविक ज्ञान की पुनर्खोज हमारे मनोशरीर […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | May 26, 2015 5:04 PM

ताओ मतानुसार प्रकाश मनुष्य के हृदय में रहता है. ताओ क्रियायोग में साधक इस प्रकाश को जागृत कर शरीर में घुमाता है. अंतिम फल के रूप में उसे स्वर्ण पुष्प की उपलब्धि होती है जो अमृतत्व का प्रतीक है. ताओ ध्यान की वह व्यावहारिक तकनीक है जिसके द्वारा सहज स्वाभाविक ज्ञान की पुनर्खोज हमारे मनोशरीर की अनंत गहराई में की जाती है जो कि सदैव ब्रह्माण्डीय गतिविधियों के साथ तालमेल रखता है. ताओ क्रियायोग की दीक्षा इस कला के कुशल गुरु द्वारा व्यक्तिगत तौर पर प्रदान की जाती है. इसके अतिरिक्त ताओ ध्यान की अन्य अनेक तकनीकें हैं जो साधक को ताओ क्रियाओं के अभ्यास के लिए तैयार करती हैं.