पूरी हो जाती योजनाएं तो किसान होते खुशहाल

देवघर : देवघर जिले में कई जलाशय योजनाएं पिछले 30-40 सालों से पेंडिंग हैं. यदि समय पर ये सारी योजनाएं पूरी हो गयी होती तो देवघर आसपास के जिले को सुखाड़ की स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता. कम से कम आधा दर्जन ऐसी जलाशय योजनाएं हैं जो स्वीकृत भी हुई, तत्कालीन बिहार सरकार के […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | September 16, 2015 6:52 AM
देवघर : देवघर जिले में कई जलाशय योजनाएं पिछले 30-40 सालों से पेंडिंग हैं. यदि समय पर ये सारी योजनाएं पूरी हो गयी होती तो देवघर आसपास के जिले को सुखाड़ की स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता. कम से कम आधा दर्जन ऐसी जलाशय योजनाएं हैं जो स्वीकृत भी हुई, तत्कालीन बिहार सरकार के समय में ही फंड भी स्वीकृत हुआ लेकिन पहले राज्य बदला और झारखंड में लगातार सरकारें बदलते रहने का असर इन योजनाओं पर पड़ा.

इस कारण आज भी योजनाएं धरातल पर नहीं उतर पायी हैं. यदि ये सभी पेंडिंग योजनाएं धरातल पर उतर जायेगी तो देवघर व आसपास के इलाके के 50 हजार हेक्टेयर खेतों को सिंचाई की सुविधा मिल जायेगी. किसान को बारिश पर आश्रित नहीं होना पड़ेगा. खेतों को पानी मिलेगा तो किसान भी खुशहाल हो जायेंगे. लेकिन जरूरत है राजनीतिक इच्छाशक्ति की.

पुनासी जलाशय योजना
यह योजना 1982 से ही शुरू हुई है. 26 करोड़ की लागत से शुरू हुई यह योजना राजनीतिक इच्छाशक्ति के अभाव में लागत 999 करोड़ पार गयी है. अभी भी पुनर्वास का पेच फंसा हुआ है. हालांकि रूक-रूक कर इस योजना पर काम हो रहा है लेकिन 33 सालों में भी यह योजना पूरी नहीं हो सकी है. यदि यह योजना पूरी हो जाती तो देवघर और आसपास के 24290 हेक्टेयर खेतों की सिंचाई होती है. इसके लिए 78 किमी लंबा केनाल का भी निर्माण चल रहा है.
त्रिकुट जलाशय योजना
इस योजना की प्राक्कलित राशि 3.98 करोड़ है. पिछले 25 सालों से त्रिकुट जलाशय योजना की फाइल धूल फांक रही है. इस योजना से भी आसपास के इलाकों को पेयजल के अलावा खेतों को सिंचाई का साधन उपलब्ध होना है. काम अब तक शुरू नहीं हो पाया है.
बुढ़ैई जलाशय योजना
देवघर जिले में पीने के पानी की व्यवस्था के लिए बुढैई जलाशय योजना महत्वपूर्ण है. इस परियोजना से 18 हजार हेक्टेयर में सिंचाई की सुविधा दी जा सकेगी. 561 करोड़ रुपये की योजना का डीपीआर भी विभाग को प्राप्त हो चुका है.
कृष्णासागर जलाशय योजना
यह योजना भी 80 के दशक की स्वीकृत है. उस वक्त उसकी लागत तकरीबन एक करोड़ थी, लेकिन समय पर इसका काम शुरू नहीं हुआ. सरकार की लेटलतीफी को देख सांसद निशिकांत दुबे ने सांसद फंड से इस योजना का काम शुरू करवाने के लिए एक करोड़ रुपये दिये हैं. इससे भी तीन हजार हेक्टेयर खेतों को सिंचाई की सुविधा मिल पायेगी.

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