देवघर में लगे 90 फीसदी बिजली केबुल बेकार
हादसे को आमंत्रण. नंगे तार से शहर में हो रही बिजली आपूर्ति देवघर में िबजली व्यवस्था को दुरुस्त करने का विभाग लगातार दावे करता है. मेंटेनेंस कार्य के लिए लाखों रुपये का फंड मुहैया कराया जाता है. इसके बाद भी नंगे तार से शहर में िबजली आपूर्ति विभाग की पोल खोलता है. साथ ही दुर्घटना […]
हादसे को आमंत्रण. नंगे तार से शहर में हो रही बिजली आपूर्ति
देवघर में िबजली व्यवस्था को दुरुस्त करने का विभाग लगातार दावे करता है. मेंटेनेंस कार्य के लिए लाखों रुपये का फंड मुहैया कराया जाता है. इसके बाद भी नंगे तार से शहर में िबजली आपूर्ति विभाग की पोल खोलता है. साथ ही दुर्घटना को भी आमंत्रित कर रहा है.
अजय यादव
देवघर : daten2004er@gmail.com
बिजली विभाग के तमाम दावों के बावजूद शहर की विद्युत व्यवस्था कभी भी चरमरा सकती है या फिर कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती है. इसकी वजह है कि शहर में सुरक्षा के लिहाज से बिजली पोलों पर खींचे गये 90 फीसदी केबुल वायर बेकार (पंक्चर) हो गये हैं. फिलहाल नंगे तार के भरोसे शहर में बिजली सप्लाई का काम चल रहा है.
यह स्थिति तब है जब शिवरात्रि अौर श्रावणी मेले के नाम पर साल में तीन-चार महीने तक मेंटेनेंस का काम चलता रहता है. विश्व प्रसिद्ध तीर्थस्थली होने के कारण देवघर में सालोंभर श्रद्धालुअों व पर्यटकों का किसी न किसी अनुष्ठान के बहाने आना-जाना लगा रहता है. आंकड़ों पर गौर करें तो प्रत्येक दिन शहर की फ्लोटिंग पोपुलेशन 10-15 हजार के करीब है. ऐसे में किसी भी दिन इन नंगी बिजली तारों के कारण दुर्घटना घट सकती है.
िबजली सप्लाई से टूटने लगता है केबुल
विभागीय सूत्रों के अनुसार, वर्ष 2005-06 में लगभग 7.50 करोड़ की लागत से पूरे शहर के बिजली पोलों पर केबुल वायर के जरिये विद्युत सप्लाई के लिए तार लगाने का काम शुरू किया गया था.
जो दो से तीन वर्ष में पूरा हुआ था. उसके बाद सिर्फ सात-आठ वर्षों में ही केबुल वायर पंक्चर हो गया. विभाग की अोर से केबुल से सप्लाई करने पर तेज आवाज व आग की चिनगारी फेंकने के साथ केबुल टूट कर गिरता रहता है. जो विभागीय पदाधिकारी व कर्मी के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है. बाध्य होकर देवघर विद्युत विभाग शहर के बाबा मंंदिर के समीप की संकरी गलियों को छोड़ कर शेष सभी इलाकों में केबुल से सप्लाई बंद कर चुकी है.
कहते हैं विभागीय पदाधिकारी
वर्ष 2005-06 के करोड़ों की लागत से केबुल वायर को बिजली पोलों से जोड़ा गया था. मगर आज 90 फीसदी केबुल डेड /पंक्चर हो चुका है. विद्युत सप्लाइ चालू करते ही केबुल टूट कर गिर जाता है या आग की चिनगारी फेंकने के साथ पटाखे की तरह आवाज करने लगता है. सिर्फ मंदिर के आसपास की गलियों में सिर्फ 10 फीसदी केबुल को मेंटेनेंस के साथ जोड़ कर रखा गया है.
– गोपाल प्रसाद, कार्यपालक अभियंता, आपूर्ति शाखा, देवघर
