कैटरिंग ब्वाय से बना इंजीनियर

विजय कुमार... देवघर : प्रतिभा और लगन हो, तो प्रतिकूल परिस्थिति में भी सफलता मिलती है. बीआइटी सिंदरी में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्युनिकेशन ब्रांच में पढ़ रहे देवघर के अमन कुमार ने इसे सच साबित किया है. अमन ने बीआइटी में जेनरल कैटेगरी में 877वां रैंक एवं ओबीसी में 120वां रैंक हासिल किया. कोरियासा (वार्ड सं.-10) […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | March 27, 2016 8:43 AM

विजय कुमार

देवघर : प्रतिभा और लगन हो, तो प्रतिकूल परिस्थिति में भी सफलता मिलती है. बीआइटी सिंदरी में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्युनिकेशन ब्रांच में पढ़ रहे देवघर के अमन कुमार ने इसे सच साबित किया है. अमन ने बीआइटी में जेनरल कैटेगरी में 877वां रैंक एवं ओबीसी में 120वां रैंक हासिल किया. कोरियासा (वार्ड सं.-10) देवघर का अमन परिवार में सबसे छोटा है.

उसकी प्रारंभिक शिक्षा राजकीयकृत मध्य विद्यालय कोरियासा में हुई. बचपन संघर्षपूर्ण रहा. पांच साल की उम्र में पिता का साया सिर से उठ गया. दादा बिरंची प्रसाद साह के पेंशन से मुश्किल से परिवार चलता था. मां महिमा देवी बेटा-बेटी की परवरिश के लिए कपड़ा सीने लगी. अमन ने सत्संग मेले में अगरबत्ती बेचना शुरू किया. दिन भर में मुश्किल से 40 से 50 रुपये की कमाई होती थी. मैट्रिक पास करने के बाद बड़े भाई पवन कुमार साह को देवघर के बाजार में काम मिल गया. अमन जब 11वीं में पढ़ता था, दादा का निधन हो गया.

पेंशन भी बंद हो गयी. कर्ज लेकर बड़ी बहन की शादी की, लेकिन कुछ ही दिन बाद बहनोई का निधन हो गया. अमन को पढ़ाई के साथ परिवार का आर्थिक संकट भी दूर करना था. वह ट्यूशन पढ़ाने लगा. अगरबत्ती बेचने के साथ श्रावणी मेले में जलसार के समीप कांवरियों को शरबत पिलाने लगा. शादी एवं उत्सव में कैटरिंग ब्वॉय के रूप में काम किया. लेकिन, पढ़ाई नहीं छोड़ी. 2011 में मैट्रिक की परीक्षा 73.2 फीसदी एवं 2013 में इंटरमीडिएट की परीक्षा 72.2 फीसदी अंक से पास किया. कोचिंग सेंटर के विकास सर के साथ-साथ रवि शंकर एवं मणिकांत पाठक के संपर्क में आये. ट्यूशन में सहयोग मिला, तो आगे बढ़े. गेट पास कर इंजीनियरिंग करना चाहते हैं. उनकी इच्छा है कि ताकि गरीब बच्चों को पढ़ाई में मदद कर समाज के उत्थान में अपनी सहभागिता निभायें.