राजमहल की पहाड़ियों में पांच करोड़ वर्ष पुरानी वनस्पति की खोज

साहिबगंज : कोलकाता विश्वविद्यालय के दो शोधकर्ता डॉ पार्थो तालुकदार (ज्यूलॉजी विभाग) व डॉ प्रांति हजारा (बॉटनी विभाग) ने मंगलवार को पर्यावरणविद सह साहिबगंज कॉलेज के भूगर्भशास्त्र के प्राध्यापक डॉ रंजीत सिंह के नेतृत्व में महाराजपुर व कटघर का निरीक्षण किया. निरीक्षण के क्रम में पत्थरों के बीच दबे तीन से पांच करोड़ वर्ष पुराना […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | November 2, 2016 8:23 AM
साहिबगंज : कोलकाता विश्वविद्यालय के दो शोधकर्ता डॉ पार्थो तालुकदार (ज्यूलॉजी विभाग) व डॉ प्रांति हजारा (बॉटनी विभाग) ने मंगलवार को पर्यावरणविद सह साहिबगंज कॉलेज के भूगर्भशास्त्र के प्राध्यापक डॉ रंजीत सिंह के नेतृत्व में महाराजपुर व कटघर का निरीक्षण किया. निरीक्षण के क्रम में पत्थरों के बीच दबे तीन से पांच करोड़ वर्ष पुराना पादम जीवाश्म मिलने की पुष्टि की है.
जानकारी देते हुए श्री सिंह ने बताया कि पाये गये प्लांट जीवाश्म अति दुर्लभ प्रजाति के हैं और वर्तमान में इस तरह के पेड़ पृथ्वी पर नहीं मिलते हैं. ये पादप जीवाश्म किसी लंबे पेड़ का अवशेष है, जो आजकल पाये जाने वाले पेड़ों से कहीं अधिक ऊंचा रहा होगा. उन्होंने कहा कि राजमहल की पहाड़ियों में करोड़ों वर्ष पूर्व डायनासोर के होने का भी कयास लगाया जा रहा है.

उन्होंने कहा कि यह संभव है कि भविष्य में खुदाई और शोध में यह साबित भी हो जाय कि राजमहल पहाड़ियों में डायनासोर मौजूद थे, जो कालांतर में लुप्त हो गये. वहीं उन्हाेंने बताया कि शोध कार्य में कोलकाता विवि और सिदो कान्हू मुर्मू विवि के संयुक्त रूप से कार्य करने के लिये आगे बात की जायेगी.उन्होंने बताया राजमहल के कटघर में पाये जाने वाले ग्रीन्स चावल, गेहूं, चूड़ा व दाल के रहस्य पर भी शोध कार्य किया जायेगा.