सिर्फ 10 विद्यार्थियों की उपस्थिति 75 प्रतिशत
आरमित्रा प्लस टू स्कूल में... देवघर : आरमित्रा प्लस टू स्कूल देवघर में इंटरमीडिएट अंतिम वर्ष में साइंस में 100 विद्यार्थी, ऑर्ट्स में 110 विद्यार्थी व कॉमर्स में 48 विद्यार्थी नामांकित हैं, लेकिन सिर्फ 10 विद्यार्थियों ने ही निर्धारित 75 फीसदी उपस्थिति पूरा किया है. इसमें साइंस स्ट्रीम में दो विद्यार्थी सोमनाथ कुमार व रेशमी […]
आरमित्रा प्लस टू स्कूल में
देवघर : आरमित्रा प्लस टू स्कूल देवघर में इंटरमीडिएट अंतिम वर्ष में साइंस में 100 विद्यार्थी, ऑर्ट्स में 110 विद्यार्थी व कॉमर्स में 48 विद्यार्थी नामांकित हैं, लेकिन सिर्फ 10 विद्यार्थियों ने ही निर्धारित 75 फीसदी उपस्थिति पूरा किया है. इसमें साइंस स्ट्रीम में दो विद्यार्थी सोमनाथ कुमार व रेशमी कुमारी चौहान, ऑटर्स स्ट्रीम में छह विद्यार्थी रामलाल शर्मा, रजत कुमार राम, संतोष कुमार बल, इंद्रजीत कुमार, श्रवण कुमार गुप्ता एवं रिफत प्रवीण शामिल हैं. वहीं कॉमर्स स्ट्रीम में दो विद्यार्थी तरन्नुम खातून व गौतम कुमार पलिवार शामिल हैं. नतीजा 75 फीसदी से कम उपस्थिति वाले विद्यार्थियों को इंटरमीडिएट परीक्षा का फॉर्म भरने से वंचित कर दिया गया है. विद्यालय के प्रधानाध्यापक सहित शिक्षकों ने छात्रों की दयनीय उपस्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि नामांकन के समय नियमित रूप से उपस्थित होने से संबंधित शपथ पत्र लिया जाता है.
मासिक बैठक में भी नियमित रूप से बच्चों को विद्यालय भेजने की जानकारी माता-पिता व अभिभावकों को दी जाती है. बावजूद विद्यार्थी नियमित रूप से विद्यालय नहीं आते हैं. इधर, झारखंड अधिविद्य परिषद ने बगैर विलंब दंड के परीक्षा फॉर्म भरने की अंतिम तिथि नौ जनवरी निर्धारित की है. विलंब दंड के साथ परीक्षा फॉर्म भरने की तिथि 13 से 17 जनवरी तक निर्धारित की गयी है.
आरमित्रा प्लस टू स्कूल में इंटर में हैं कुल 258 विद्यार्थी
साइंस व कॉमर्स में दो-दो विद्यार्थी तथा ऑर्ट्स में छह विद्यार्थियों ने 75 फीसदी उपस्थिति पूरा किया
बार-बार चेतावनी के बाद भी छात्र नियमित रूप से वर्ग कक्ष में नहीं हुए उपस्थित
रजत जयंती समारोह के तैयारी की हुई समीक्षा
जो व्यक्ति िचदाकाश धारणा का िनयमित अभ्यास करते है उनकी मानसिक क्षमताओं की तुलना िवद्युत बल्ब द्वारा की जा सकती है. बल्ब से प्रकाश की िकरणें सभी िदशाओं में िवकीरित होती है. यदि कोई व्यक्ति बल्ब से दो मीटर दूर खड़ा रहे तो उसे प्रकाश का अनुभव तो होगा परन्तु बल्ब की गर्मी का अनुभव नहीं होगा. भले ही बल्ब के केंद्र में जहां उसका फिलामेंट होता है, अत्यधिक गर्मी िबखरी हुई है क्योंिक हमारा मन बेतरतीब ढंग से अनेक िवषयों पर लगातार सोचता रहता है. आम आदमी अपने मन की इस अपार क्षमता का न तो उपयोग करता है और न ही उसके प्रति सजग रहता है. एकाग्र मन का व्यक्ति क्षमता से कहीं अधिक कार्य कर सकता हैं. एकाग्रता उम्र की वृिद्ध के कारण होने वाले मानसिक क्षमताओं के क्षय को रोकती है. तीस वर्ष की उम्र के बाद मस्तिष्क की कोशिकाएं आश्चर्यजनक रूप से प्रतिदिन मरने लगता है.
स्वामी सत्यानंद सरस्वती की पुस्तक ईश्वर दर्शन से साभार
