Sawan 2020 : देवघर (संजीव मिश्रा) : देवघर में 12 ज्योतिर्लिंगों में से द्वादश ज्योतिर्लिंग बाबा बैद्यनाथ मंदिर और इनके प्रांगण की सभी मंदिरों का अपना पौराणिक महत्व है. इनमें सर्वाधिक महत्व बाबा की पूजा के बाद भक्त मां शक्ति की पूजा करते हैं. यहां भक्त पूजा करने के लिए घंटों कतार में लग कर मां की पूजा करते हैं. यहां मां सती का ह्रदय के गिरने से इस स्थान का बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग के साथ मां शक्ति, मां बगला पिताम्बरी के रूप में विराजमान है.
इस मंदिर का निर्माण पूर्व सरदार पंडा स्वर्गीय श्री श्री राम दत्त ओझा ने 1793 में निर्माण कराया. इस मंदिर से शिव के साथ शक्ति का महत्व है. मां बगला मंदिर की लंबाई लगभग 30 फीट और चौड़ाई लगभग 25 फीट है. मां बगला के शिखर पर तांबे का कलश है. इसके ऊपर पंचशूल भी लगा है. शिखर के गुंबद के नीचे गहरे पीले रंग से रंगा हुआ है.
इस मंदिर की बनावट अन्य मंदिरों से अलग है. इस मंदिर में प्रवेश करने के लिए मंदिर प्रांगण से भक्त मां बगला, मां पिताम्बरी के प्रांगण में पहुंचते हैं. सामने पीतल के दरवाजे को भक्त प्रणाम कर सिर झुका कर गर्भ गृह में प्रवेश करते हैं, जहां मां पिताम्बरी के दर्शन होते हैं.
यह देवी बैद्यनाथ तीर्थ की द्वितीय अधिष्ठात्री देवी मां बगला है. इसके कारण मां शक्ति की पूजा करने के लिए प्रवेश कर भक्त बाईं ओर से पूजा करते हैं. इनकी पूजा अर्चना करने के लिए भक्त पीले फूल, दही, हल्दी, पीले भोग लगा कर मां पिताम्बरी की पूजा करते हैं. यहां पर भक्तों वह पुजारी सभी के लिए प्रवेश और निकास द्वार का एक ही रास्ता है.
इस मंदिर में ओझा परिवार मंदिर स्टेट की ओर से पूजा करते हैं. यहां पर मां बगला की तांत्रिक विधि से पूजा की जाती है. मंदिर स्टेट की ओर से माघ मास पूर्णिमा को मां की वार्षिक पूजा विधिविधान से षोडशोपचार उपचार विधि से किया जाता है. भक्त सालों भर मां बगला की पूजा कर सकते हैं.
इस मंदिर में प्रवेश करते ही तीर्थ पुरोहित कुंजिलवार परिवार के वंशज मां बगला के प्रांगण में अपने यजमान को संकल्प पूजा कराने के लिए अपने गद्दी पर रहते हैं. यह अपने यात्रियों के संकल्प पूजा, उपनयन, विवाह, मुंडन, विशेष पूजा आदि अनुष्ठान कराते हैं.
Posted By : Samir ranjan.