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डीसी रेल लाइन: कतरास-झरिया के इस हालात का दोषी वह है, जिन्होंने आपका वोट लूटा

कतरास: कतरास के धरनास्थल पर आयोजित सभा में वृंदा करात ने कहा कि कतरास-झरिया को उजाड़ने के लिए धरती के अंदर की आग को बुझाया नहीं जा रहा है. आग को और फैलने के लिए छोड़ दिया गया है. धनबाद-चंद्रपुरा रेल लाइन का बंद होना दुर्भाग्यपूर्ण है. जनता परेशानियों को देखते हुए इस रेल लाइन […]

कतरास: कतरास के धरनास्थल पर आयोजित सभा में वृंदा करात ने कहा कि कतरास-झरिया को उजाड़ने के लिए धरती के अंदर की आग को बुझाया नहीं जा रहा है. आग को और फैलने के लिए छोड़ दिया गया है.

धनबाद-चंद्रपुरा रेल लाइन का बंद होना दुर्भाग्यपूर्ण है. जनता परेशानियों को देखते हुए इस रेल लाइन को चालू किया जाये. भावनात्मक तरीके से आग की स्थिति का आकलन नहीं, वैज्ञानिक पद्धति से हो. सरकार नियम-कानून को ताक पर रखकर कोयले की कटाई कर रही है. केंद्र-राज्य सरकार व बीसीसीएल चाहे तो आग बुझाने का रास्ता है. लेकिन, प्रयास ही नहीं करना है तो अलग बात है.

उन्होंने कहा कि मैंने संसद में यह सवाल उठाया था. लेकिन मुझे बहुत दुख और खेद के साथ कहना पड़ रहा है कि मैं उस समय बंगाल की सांसद थी, लेकिन कोयलांचल के किसी सांसद ने संसद में मेरा साथ नहीं दिया. इसमें कोई दलगत राजनीति नहीं करना चाहती हूं. लेकिन आपसे स्पष्ट करना चाहती हूं कि आज अगर कतरास, झरिया में जो हालात है, उसके लिए दोषी वह है, जिन्होंने आपका वोट लूटा है. वृंदा करात ने कहा कि मैं कोयलांचल के सांसदों से चाहती हूं कि इस हालात से लड़ने के लिए मेरे साथ दे. पार्टी सांसद इसे संसद में उठायेंगे. कहा कि यहां के सांसद, विधायक रेल मंत्री सुरेश प्रभु से मिले हैं, तो यह बहुत अच्छी बात है. सकारात्मक प्रयास होना चाहिए. इसमें हम सभी को मिल कर लड़ाई लड़ना होगा.

मौके पर एसके बक्शी, गोपीकांत बक्शी, पार्षद विनोद गोस्वामी, सुरेश गुप्ता, मानस चटर्जी, निमाई मुखर्जी, जय मुखर्जी, पूर्व विधायक ओपी लाल, पूर्व बियाडाध्यक्ष विजय कुमार झा, एचएन सिंह, अशोक वर्मा, इंदर सिंह आदि मौजूद थे.

सिंफर निदेशक से मिली वृंदा

बंद धनबाद-चंद्रपुरा रेल लाइन की वस्तुस्थिति जानने के लिए माकपा पोलित ब्यूरो सदस्य वृंदा करात सोमवार को सिंफर के निदेशक डॉ पीके सिंह से मिली. माकपा नेता ने निदेशक से पूछा कि अगर सरकार कहे तो क्या सिंफर बंद डीसी रेल लाइन पर भूमिगत आग के खतरे की फिर से जांच कर सकती है. निदेशक ने कहा सरकार कहे तो सिंफर के वैज्ञानिक फिर से सर्वेक्षण कर सकते हैं. इसके लिए सिंफर को छह माह का समय चाहिए. उन्होंने बताया कि सिंफर अंतिम जांच प्रतिवेदन पहले ही सरकार व बीसीसीएल को दे चुकी है.

Prabhat Khabar Digital Desk
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