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बच्ची का पैर काटने की नौबत, डॉक्टर पर दोष

धनबाद : सरायढेला लोहारकुली स्थित प्रसाद क्लिनिक में चिकित्सक पर लापरवाही का आरोप लगाकर परिजनों ने मंगलवार को जमकर हंगामा किया. परिजनों ने बताया कि लापरवाही के कारण तीन वर्षीया बच्ची का पैर काटने की नौबत आ गयी है. परिजनों की शिकायत पर स्थानीय पुलिस भी पहुंची. किसी तरह लोगों को समझाया. पीड़ित परिवार वालों […]

धनबाद : सरायढेला लोहारकुली स्थित प्रसाद क्लिनिक में चिकित्सक पर लापरवाही का आरोप लगाकर परिजनों ने मंगलवार को जमकर हंगामा किया. परिजनों ने बताया कि लापरवाही के कारण तीन वर्षीया बच्ची का पैर काटने की नौबत आ गयी है. परिजनों की शिकायत पर स्थानीय पुलिस भी पहुंची. किसी तरह लोगों को समझाया. पीड़ित परिवार वालों ने सरायढेला थाना में डॉक्टर के खिलाफ शिकायत की है. बच्ची को पीएमसीएच में भर्ती कराया गया है. डॉ एम प्रसाद पीएमसीएच में एनाटॉमी विभाग में कार्यरत हैं.
घर में बच्ची का टूट गया था पैर : गोविंदपुर कुरची से आये राजेश महतो ने बताया कि 20 अगस्त को बेटी मधु कुमारी (3) का पैर टूट गया था. यहां से मधु को लेकर प्रसाद क्लिनिक पहुंचे. यहां डॉ एम प्रसाद ने कुछ दवाइयां दी, साथ ही पैर में ट्रैक्शन लगा दिया. लेकिन तीन चार दिन बाद बच्ची की स्थिति और खराब हो गयी. उसका पैर काला दिखने लगा. बच्ची को लेकर चिकित्सक के पास लाये. राजेश ने बताया कि डॉ एम प्रसाद ने कहा कि दवा का इफेक्ट है, कुछ नहीं होगा. बच्ची को कुछ दिन घर में रखने के बाद उसके पैर से दुर्गंध आने लगी. जब चिकित्सक के पास ले गये तो उन्होंने पैर काटने को कह दिया.

रिम्स में भी चिकित्सकों ने पैर काटने को कहा : राजेश ने बताया कि बच्ची को रिम्स लेकर गये. वहां भी चिकित्सकों ने बताया कि बच्ची का पैर काटना पड़ेगा. इसके बाद वहां परिजनों ने भर्ती नहीं कराया. परिजन धनबाद लेकर चले आये. सूचना पर गोविंदपुर से भी लोग आकर प्रसाद क्लिनिक पहुंच गये. गोविंदपुर समाचर विक्रेता संघ के अध्यक्ष मोहन सेन भी थे.
थाना ने केस करने से किया मना
लापरवाही का आरोप लगाकर परिजनों ने सरायढेला थाना में शिकायत कर केस करने की अपील की. लेकिन पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट का हवाला देकर केस करने से मना कर दिया. पुलिस का कहना था कि जब तक सिद्ध न हो जाये डॉक्टर दोषी है उस पर केस नहीं कर सकते हैं. केस को ले कर पीएमसीएच के चिकित्सक से राय ली जायेगी.
बच्ची के परिजनों ने की लापरवाही : डॉ प्रसाद
डॉ एम प्रसाद ने कहा कि परिजनों की लापरवाही के कारण यह हुआ है. बच्ची को लेकर परिवार वाले मेरे पास आये थे. उसका फीमर टूटा हुआ था. उसे भरती के लिए कहा गया, लेकिन परिवार वाले निवेदन करने लगे कि घर ले जाना है. पैर में ट्रैक्शन लगा दिया गया था. उसे दवा दी गयी. फीमर टूटने के बाद ट्रैक्शन ही लगाया जाता है, उसमें प्लास्टर नहीं होता है. लेकिन घर में ले जाकर परिवार वाले ने केयर नहीं किया. ट्रैक्शन को ढीला कर दिया. बाद में उसे हटा भी दिया. जब मामला गंभीर हो गया तो मेरे पास लेकर आये. इस बीच परिजनों ने स्वीकार किया कि अोझा गुणी के पास भी चले गये थे. 16 सौ बिल हुए थे, इसमें परिजनों ने 11 सौ रुपये ही दिये थे.
Prabhat Khabar Digital Desk
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