सीएसइ की कार्यशाला: जिले में स्वास्थ्य, शिक्षा, पुनर्वास अौर स्वच्छता का हाल खस्ता, पेयजल व स्वच्छता पर खर्च होंगे 700 करोड़

धनबाद: सेंटर फॉर सांइस एंड एनवायरमेंट (सीएसइ) की ओर से रविवार को यहां एक होटल में आयोजित कार्यशाला में संस्थान के डिप्टी डायरेक्टर चंद्रभूषण ने कहा कि धनबाद में जिला खनिज फाउंडेशन (डीएमएफ) के तहत प्रति वर्ष ढाई सौ करोड़ रुपये मिलेंगे, जिसे यहां की विकास योजनाओं पर खर्च किये जाने हैं. फिलवक्त सात सौ […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | October 30, 2017 8:11 AM
धनबाद: सेंटर फॉर सांइस एंड एनवायरमेंट (सीएसइ) की ओर से रविवार को यहां एक होटल में आयोजित कार्यशाला में संस्थान के डिप्टी डायरेक्टर चंद्रभूषण ने कहा कि धनबाद में जिला खनिज फाउंडेशन (डीएमएफ) के तहत प्रति वर्ष ढाई सौ करोड़ रुपये मिलेंगे, जिसे यहां की विकास योजनाओं पर खर्च किये जाने हैं. फिलवक्त सात सौ करोड़ की योजना अगले तीन वर्ष तक पेयजल एवं शौचालय निर्माण के लिए स्वीकृत की गयी है, जिसके विरुद्ध 1.70 करोड़ रुपये आवंटित भी कर दिये गये हैं.

उन्होंने कहा कि डीएमएफ की राशि खनन क्षेत्र में रहने वाले लोगों के विकास जैसे पेयजल, शौचालय, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, रोजगार पर खर्च किये जायेंगे. झारखंड सरकार ने डीएमएफ की रकम अगले तीन साल तक पेयजल एवं शौचालय निर्माण पर ही खर्च करने का निर्देश दिया है. चंद्रभूषण ने बताया कि अब तक दिल्ली को सबसे प्रदूषित शहर माना गया है. लेकिन धनबाद में सर्वे के दौरान उन लोगों ने पाया कि यह शहर दिल्ली से दुगुना प्रदूषित शहर है. उन्होंने कहा कि खनन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के विकास के लिए डीएमएफ का गठन 2016 में हुआ, लेकिन इसके काम की गति बहुत धीमी है.
डॉक्टर कम, आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति भी ठीक नहीं
सीएसइ के डिप्टी डायरेक्टर ने कहा कि जिले में स्वास्थ्य, शिक्षा एवं आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थित काफी खराब है. पूरे देश में एक लाख में 25 लोगों की मृत्यु कुपोषण से होती है, जबकि यहां एक हजार में 25 लोगों की मौत साल में हो जाती है. आंगनबाड़ी की संख्या भी दुगुनी होनी चाहिए. पढ़ाई की स्थिति यह है कि बच्चे प्राइमरी स्कूलों तक तो जाते हैं, लेकिन सेकेंडरी तक भी पढ़ाई नहीं कर पाते. ग्रेजुएशन की बात तो दूर है. 50 फीसदी घरों को स्वच्छ पानी नहीं मिलता है. उन्होंने बताया कि धनबाद में 125 चिकित्सक चाहिए, जबकि 51 ही हैं. नर्स की 60 फीसदी कमी है. महिलाओं के रोजगार एवं शिक्षा में भारी कमी है.
क्या है जिला खनिज फाउंडेशन
श्री भूषण ने कहा कि डीएमएफ एक गैर लाभकारी स्वायत्त ट्रस्ट है जाे खनन संबंधी संचालन से प्रभावित प्रत्येक जिले के समुदायों के हितों की रक्षा करता है और उन क्षेत्रों में में निवासरत लोगों को लाभ पहुंचाने का काम करता है. उन्होंने इस पर खेद जताया कि इस शहर से जुड़े पूर्वी टुंडी और टुंडी को इससे अछूता छोड़ दिया गया है जबकि ये दोनों प्रखंड भी कहीं न कहीं यहां होने वाले खनन से प्रभावित हैं.
पुनर्वास की राशि काफी कम
उन्होंने कहा कि जेआरडीए की ओर से जो पुनर्वास किये जा रहे हैं, वह भी ठीक नहीं है. पुनर्वास के लिए जो राशि दी जा रही है, वह न्यूनतम मजूदरी से भी कम है. वहां पर रोजगार के लिए कोई योजना नहीं ली गयी है. कार्यक्रम में श्रेष्ठा बनर्जी, चिन्मयी के अलावा वार्ड पार्षद, पंचायत सेवक , सिविल सोसाइटी के लोग मौजूद थे.