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गायत्री माता के जैकारे से गूंजा कोयलांचल

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धनबाद : गुरुदेव की जय, गायत्री माता की जय, एक बनेंगे नेक बनेंगे, हम सुधरेंगे जग सुधरेगा, अनाचार का अंत हो, दहेज प्रथा बंद हो, छोटे-छोटे काम करो, भीख मांगना बंद करो आदि नारों के साथ गायत्री परिवार से जुड़े हजारों भक्तों ने बाबूडीह विवाह भवन से शुक्रवार को कलश यात्रा निकाली. इसी के साथ […]

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धनबाद : गुरुदेव की जय, गायत्री माता की जय, एक बनेंगे नेक बनेंगे, हम सुधरेंगे जग सुधरेगा, अनाचार का अंत हो, दहेज प्रथा बंद हो, छोटे-छोटे काम करो, भीख मांगना बंद करो आदि नारों के साथ गायत्री परिवार से जुड़े हजारों भक्तों ने बाबूडीह विवाह भवन से शुक्रवार को कलश यात्रा निकाली. इसी के साथ चार दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान की शुरुआत धनबाद जिला प्रकोष्ठ गायत्री शक्तिपीठ बस्ताकोला द्वारा की गयी.

पूजा-अर्चना के बाद निकली कलश यात्रा :
एसएसएलएनटी वीमेंस कॉलेज की प्राचार्या डॉ मीना श्रीवास्तव बतौर मुख्य अतिथि कार्यक्रम में उपस्थित थीं. कलश यात्रा में पीली साड़ी में महिलाएं और पीले कुर्ते में हजारों पुरुष शामिल हुए. यात्रा पॉलिटेक्निक रोड होते हुए सिटी सेंटर, डी-नोबिली स्कूल से सर्वेश्वरी आश्रम पहुंची. यहां भक्तों नें कलश में जल भरे, पूजा अर्चना कर आगे बढ़े. बाबूडीह होते हुए कलश यात्रा यज्ञ स्थल पहुंची. यहां कलश का स्वागत हरिद्वार से आयी ब्रह्मवादिनी बहनों द्वारा किया गया.
झांकियों ने मोहा मन : कलश यात्रा के आगे बैंड पार्टी थी उसके पीछे सजे ट्रैक्टर में बच्चे भारत मां, गायत्री मां, भोले भंडारी, राम दरबार, राधा कृष्ण, भैरो नाथ का वेश सजाये बैठे थे. झांकियों ने भक्तों का मन मोह लिया.
ये हैं सक्रिय : प्रभा प्रसाद, रश्मि कपिला, मंजु सिंह, उषा मिस्त्री, पूनम सिंह, संयुक्ता देवी, सुनयना देवी, मालती केसरी, राजकुमारी देवी, ममता सिंह, रेणु देवी, आशा देवी, स्वर्णलता देवी आदि.
यहां से पहुंचे भक्त : कलश उठाने के लिए सिंदरी, जामाडोबा, झरिया, भूली, धनबाद, गोविंदपुर, टुंडी, बाघमारा, कतरास, निरसा, गोमो से भक्तगण पहुंचे.
नारी जागरण है उद्देश्य : दीना बहन
धनबाद में कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नारी जागरण से है. नारी जागरण का मतलब उनके गुणों को जागृत करना है. नारी दया करुणा, ममता, त्याग प्रेम से भरी होती हैं, तो पुरुष बल, कर्तव्य से भरे हैं. एक हजार वर्ष पहले नारी अस्मिता पर कुठाराघात किया गया. नारी का वर्चस्व समाप्त कर दिया गया. नारी को भोग्या बना दिया गया.
मां अज्ञानी होगी, तो बच्चे कैसे ज्ञानी हो सकते हैं. गायत्री परिवार के संस्थापक गुरुदेव श्री राम शर्मा का कहना था धरती पर स्वर्ग सतयुग लाना है तो मातृ शक्ति को जगाना होगा. जब तक नारी नहीं जागेंगी, हम विश्व गुरु नहीं हो सकते. यह बातें हरिद्वार से आयी ब्रह्मवादिनी दीना त्रिवेदी बहन ने कही. उनके साथ अनिता कांवरकर, रामेश्वरी साहू, द्रौपदी सौंडी, नीलिमा सिंह भी आयी हैं. सभी बहनें चार दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान का संचालन दीना बहन के आचार्यत्व में करेंगी.

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