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रीडिंग किसी की, बिल किसी को

डोर-डोर स्मार्ट मोबाइल फोन से मीटर रीडिंग (इ-मीटर रीडिंग) विभाग और उपभोक्ता दोनों के लिए परेशानी का कारण बन गयी है. प्रतिदिन 20 से 25 ऐसे उपभोक्ता ऊर्जा विभाग के कार्यालय में अपना बिल सुधार करवाने आते हैं. धनबाद : बिजली विभाग ने बिजली चोरी पर अंकुश लगाने और पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से इ-मीटर […]

डोर-डोर स्मार्ट मोबाइल फोन से मीटर रीडिंग (इ-मीटर रीडिंग) विभाग और उपभोक्ता दोनों के लिए परेशानी का कारण बन गयी है. प्रतिदिन 20 से 25 ऐसे उपभोक्ता ऊर्जा विभाग के कार्यालय में अपना बिल सुधार करवाने आते हैं.
धनबाद : बिजली विभाग ने बिजली चोरी पर अंकुश लगाने और पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से इ-मीटर रीडिंग व्यवस्था लागू की. लेकिन इस व्यवस्था ने उपभोक्ताओं को परेशानी में डाल दिया है. बिल में गड़बड़ी की शिकायतें लगातार मिल रही हैं. इसके कारण लोगों को कार्यालय तक की दौड़ लगानी पड़ रही है.
उपभोक्ताओं के जो बिल आ रहे हैं, उसमें उपभोक्ता संख्या तो वही रहती है, लेकिन मीटर रीडिंग किसी और की होती है. सूत्र बताते हैं ऐसा इसलिए हो रहा है कि ऊर्जा मित्र जब मीटर रीडिंग के लिए जाते हैं तो उसी समय उसे एप्प में नहीं डालने के कारण मीटर किसी का और बिल किसी में जोड़ दिया जाता है. ऊर्जा मित्र के भी प्रशिक्षित नहीं रहने से ऐसी गलतियां हो रही हैं. हालांकि ऐसे लोगों के आवेदन आने पर विभाग की ओर से सुधार भी किये जा रहे हैं. लेकिन इसमें उपभोक्ता और पदाधिकारी का समय खामखा बर्बाद होता है.
केस स्टडी
एलसी रोड के प्रमोद कुमार जैन को चार माह में एक लाख, 22 हजार का बिल आ गया है. उन्होंने विभाग को पिछले पखवारा आवेदन दिया. कार्यपालक अभियंता ने इसकी जांच का आदेश कनीय अभियंता को दिया. जांच के बाद जो रिपोर्ट आयी उससे श्री जैन राहत की सांस ले रहे हैं. उनके बिल में एक लाख 25 हजार की गड़गड़ी थी.
केस स्टडी
बैंकमोड़ के श्रीकांत का बिल 51 हजार का आ गया. इनके आवेदन पर जेइ ने जब जांच की तो पता चला कि उनके बिल से 48 हजार रुपये गलत पाया गया और अब उन्हें सिर्फ तीन हजार रुपये ही देने हैं. इसे लेकर उन्होंने बार-बार नया बाजार डिवीजन ऑफिस में शिकायत की, इइ के पास आये और जांच के बाद ही समस्या दूर हुई.
केस स्टडी
रांगाटांड़ के बलराम स्वामी का बिल 21 हजार, 59 यूनिट का बिल आ गया है, लेकिन उनके मीटर की जांच की जेइ द्वारा करायी गयी तो सिर्फ 226 यूनिट ही खपत का पता चला. उन्हें भी बढ़ा चढ़ाकर बिल मिल गया था, लेकिन अब उन्हें सिर्फ 11 हजार रुपये ही बिल जमा करने हैं. इससे पहले वह परेशान था.
क्या कहते हैं पदाधिकारी
इस सिस्टम के पूर्ण रूप से काम करने पर उपभोक्ताओं को काफी सहूलियत होगी. अभी थोड़ी शिकायतें आ रही है. औसतन 20 से 25 शिकायतें आती हैं, उसकी जांच कराने के बाद बिल जो वाजिब होता है, उतना ही जमा करने का आदेश दिया जाता है. एक बार पूरी तरह जब यह पटरी पर आ जायेगा तो कोई दिक्कत नहीं होगी.
रवि प्रकाश, कार्यपालक अभियंता, धनबाद
सात-आठ माह का बिल अभी तक नहीं
जहां एक ओर पुराने उपभोक्ताओं के बिल में गड़बड़ी हो रही है, वहीं मार्च में जिन लोगों का कैंप के जरिये कनेक्क्शन लिया था, उनका नाम और उपभोक्ता नंबर अभी तक नहीं जोड़े जाने से उनलोगों को अभी तक एक बार भी बिल नहीं आया है.
बरटांड़ के एक नये उपभोक्ता श्रीनाथ ने बताया कि मार्च में कैंप में कनेक्क्शन लगा था. उनके आसपास ऊर्जा मित्र आते हैं तो उन्हें लगता है कि इस बार उनका मीटर भी पढ़ने आयेगा, लेकिन न तो उनके यहां मीटर रीडर आता है और न ही बिल आ रहा है.
Prabhat Khabar Digital Desk
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