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जारी है आधी आबादी के सम्मान की लड़ाई-निर्भया की पुण्यतिथि आज तसवीर प्रतीक सत्या राज 4 धनबाद16 दिसंबर 2012 की वह सर्द रात आैर दिल्ली की वह घटना जन मानस के जेहन में कहीं न कहीं आज भी जीवंत है. निर्भया का नाम आते ही उन दरिदों का अक्श भी सामने आता है, जिन्होंने घटना […]

जारी है आधी आबादी के सम्मान की लड़ाई-निर्भया की पुण्यतिथि आज तसवीर प्रतीक सत्या राज 4 धनबाद16 दिसंबर 2012 की वह सर्द रात आैर दिल्ली की वह घटना जन मानस के जेहन में कहीं न कहीं आज भी जीवंत है. निर्भया का नाम आते ही उन दरिदों का अक्श भी सामने आता है, जिन्होंने घटना को अंजाम दिया था. उस घटना को गुजरे पांच साल हो गये हैं. हर साल निर्भया की पुण्यतिथि पर उसे श्रद्धांजलि दी जाती है. ऐसी घटना की पुनरावृत्ति न हो ऐसी बात कही जाती है, लेकिन ऐसी घटनाएं आज भी जारी है. आैर जारी है आधी आबादी के सम्मान की लड़ाई. आधी आबादी आज मुखर होकर कहती है कि हमें एक दूसरे का सहारा बनना है, एक दूजे का हाथ हाथों में लेकर चलना है. कहती हैं महिलाएंनिर्भया कांड का ये छठा साल है. इन बीते सालों में आज भी आधी आबादी की स्थिति बहुत सुदृढ़ नहीं है. समाज परिवार द्वारा प्रताड़ित होने के साथ ही दरिदंगी का शिकार हो रही है. एक दर्द मिटता नहीं है, दूसरा सामने आ खड़ा होता है. पंद्रह साल की मासूम बच्ची के साथ जो अमानवीय कृत्य हुआ उसका परिणाम बच्ची झेल रही है, जिंदगी मौत से लड़ रही है. ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो. महिलाओं को न्याय दिला सकूं. यही मेरे जीवन का उद्देश्य है. जीने के लिए स्वतंत्रता जरूरी है, लेकिन उसका भी दायरा होना चाहिए. सरिता कच्छप, महिला थाना प्रभारीनिर्भया नाम जुबान पर आते ही उस मासूम बहादुर लड़की का चेहरा सामने आ जाता है. वह समाज के सामने ऐसा प्रश्न छोड़ गयी जिसका उत्तर शायद ही मिल पायेगा. उसकी पुण्यतिथि की पूर्व संध्या पर मुझे यही कहना है क्यों महिला को सिर्फ महिला समझा जाता है, उसकी भावनाओं से खिलवाड़ किया जाता है. मां, बहन या बेटी के रूप में क्यों नहीं उनका सम्मान किया जाता है. मानसिकता में बदलाव लाने के साथ ही बच्चियों को मजबूती देने की जरूरत है. हमारे संघर्ष की लड़ाई जारी है. दीपा भट्टाचार्य, व्यवसायीजब तक महिलाओं को कानूनी अधिकार की जानकारी नहीं होगी, वह हक के खिलाफ आवाज नहीं उठा पायेंगी. निर्भया को आधी आबादी नमन करती है. उसका दर्द आज भी उनके बीच जिंदा है. हमें अपनी बच्चियों को इतना मजबूत बनाना होगा, जिससे वे किसी लड़ाई में हार न मानें. हमारे संविधान में घरेलू हिंसा और प्रताड़ना संबंधी कई धारा है. 304(बी) भा. दं.सं- विवाह के सात वर्षों के अंदर अप्राकृतिक मृत्यु होने पर आजीवन कारावास तक की सजा, 354 भा.दं.सं – महिला से छेड़छाड़ या रेप की कोशिश में दस साल तक की सजा का प्रावधान, 498(ए) – भा.दं.सं – सजा सात वर्ष तक 3/4 घरेलू उत्पीड़न कानून के तहत पति की संपत्ति पर महिला का अधिकारजया कुमार, अधिवक्ताहम महिला सशक्तीकरण की बात तो करते हैंं, लेकिन जब नारी स्वतंत्रता और अधिकार की बात आती है तो हमारा समाज रूढ़िवादी हो जाता है. क्यों हमें इतनी स्वतंत्रता नहीं मिलती कि हम अपनी जिंदगी अपने अनुसार जी सकें. निर्भया जैसी बहादुर लड़की को दरिंदगी का शिकार होना पड़ा. उसके लिए देश भर में आंदोलन हुए, लेकिन उसे बचाया न जा सका. इस घटना ने जनमानस को झकझोरा जरूर था, लेकिन आज भी स्थिति कमोबेश वही है. ऐसी घटनाआें पर रोक ही निर्भया को सच्ची श्रद्धांजलि होगी.कविता विकास, शिक्षिका डीएवी कोयला नगर

Prabhat Khabar Digital Desk
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