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धनबाद : जीएसटी के बाद 30 % टैक्स शॉर्ट फॉल

धनबाद : वाणिज्यकर के प्रधान सचिव केके खंडेलवाल ने कहा कि जीएसटी लागू होने के बाद पिछले साल से लगभग 30 प्रतिशत टैक्स शॉर्ट फॉल हुआ है. नयी व्यवस्था के कारण थोड़ी समस्या थी. अब धीरे-धीरे व्यवसायी भी जीएसटी फ्रेंडली होने लगे हैं. वह सोमवार को टैक्स की समीक्षा करने धनबाद आये हुए थे. पत्रकारों […]

धनबाद : वाणिज्यकर के प्रधान सचिव केके खंडेलवाल ने कहा कि जीएसटी लागू होने के बाद पिछले साल से लगभग 30 प्रतिशत टैक्स शॉर्ट फॉल हुआ है. नयी व्यवस्था के कारण थोड़ी समस्या थी. अब धीरे-धीरे व्यवसायी भी जीएसटी फ्रेंडली होने लगे हैं. वह सोमवार को टैक्स की समीक्षा करने धनबाद आये हुए थे. पत्रकारों से बातचीत में श्री खंडेलवाल ने कहा कि एक अप्रैल से ई-वे बिल लागू हो रहा है. इसकी तैयारी जोर शोर से चल रही है.
पचास हजार से अधिक के माल ले जाने पर ई-वे बिल अनिवार्य किया जा रहा है. ई-वे बिल को लेकर अधिकारियों को भी विशेष ट्रेनिंग दी जा रही है. इस मौके पर वाणिज्यकर संयुक्त आयुक्त वीके दुबे आदि पदाधिकारी मौजूद थे.
बकाया वसूली में तेजी लायें अधिकारी : वाणिज्यकर के प्रधान सचिव केके खंडेलवाल ने सोमवार को वाणिज्यकर अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की. वर्ष 11-12 से लेकर 15-16 तक की संचिकाओं का अवलोकन किया. डीलरों को कंप्लायंस ठीक से किया गया है या नहीं इसकी जांच की. बकायेदारों को नोटिस भेजने व ड्यूज क्लियर करने का निर्देश अधिकारियों को दिया. समीक्षा बैठक के दौरान संयुक्त आयुक्त वाणिज्यकर, सभी अंचल के वाणिज्यकर उपायुक्त, अन्वेषण ब्यूरो के पदाधिकारी, वाणिज्यकर पदाधिकारी आदि थे.
जिला चेंबर का प्रतिनिधिमंडल मिला, परेशानी से कराया अवगत
जिला चेंबर का प्रतिनिधिमंडल वाणिज्यकर के प्रधान सचिव से मिला. जीएसटी में आ रही परेशानी से उन्हें अवगत कराया. प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे जिला चेंबर अध्यक्ष राजेश गुप्ता ने कहा कि पचास हजार से अधिक के माल पर ई-वे बिल का प्रावधान रखा गया है. इसे बढ़ाकर एक लाख किया जाये. गोदाम से दुकान तक माल लाने में भी ई-वे बिल का प्रावधान है, इसे खत्म किया जाये. टर्न ओवर के हिसाब से रिटर्न दाखिल करने की तिथि अलग-अलग रखी जाये
कंपोजिशन व रेगुलर डीलर के लिए अलग-अलग नंबर जेनेरेट किया जाये ताकि पहचाना जा सके कि संबंधित डीलर कंपोजिशन में आते हैं या रेगुलर डीलर हैं. जांच में हमेशा देखा गया है कि ट्रांसपोर्ट का माल जब्त कर लिया जाता है. जबकि ट्रक में पक्का बिल का भी माल होता है. सप्ताह-दस दिनों तक जांच चलती है. लिहाजा जिस माल का पक्का का बिल है, उसे तुरंत रिलीज करने की व्यवस्था की जाये. प्रधान सचिव ने उपरोक्त समस्याओं को जीएसटी कौंसिल के समक्ष रखने का आश्वासन दिया. प्रतिनिधिमंडल में जिला चेंबर कोषाध्यक्ष अशोक साव, बैंक मोड़ चेंबर अध्यक्ष सुरेंद्र अरोड़ा, प्रमोद गोयल, संदीप मुखर्जी थे.
Prabhat Khabar Digital Desk
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