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धनबाद : इस ठंड में फर्श पर ही रात गुजारते हैं परिजन, वार्ड में दवाओं का टोटा डॉक्टरों की भारी कमी

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धनबाद : पीएमसीएच के शिशु रोग विभाग में बच्चों के परिजनों को बाहर फर्श पर बैठक कर इंतजार करना पड़ता है. तीसरे तल्ले पर स्थित शिशु रोग विभाग के नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट (एनआइसीयू), सिक नियोनेटल केयल यूनिट (एसएनसीयू) में गंभीर बच्चों को भर्ती कराया जाता है. उनकी माताओं के लिए अलग से वार्ड बनाया […]

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धनबाद : पीएमसीएच के शिशु रोग विभाग में बच्चों के परिजनों को बाहर फर्श पर बैठक कर इंतजार करना पड़ता है. तीसरे तल्ले पर स्थित शिशु रोग विभाग के नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट (एनआइसीयू), सिक नियोनेटल केयल यूनिट (एसएनसीयू) में गंभीर बच्चों को भर्ती कराया जाता है.
उनकी माताओं के लिए अलग से वार्ड बनाया गया था,लेकिन अब यह बंद हो गया है. इस कारण परिजनों व बच्चों की माताओं को बाहर रहना पड़ता है. भारी ठंड में फर्श पर ही परिजनों को रात गुजारनी पड़ रही है.
एसएनसीयू में लगा था अलग से बेड : वर्ष 2014-15 में बने एसएनसीयू में अलग से बेड लगा था. इसके लिए बकायदा प्रबंधन ने उद‍्घाटन भी किया. एक वर्ष तक बेड पर महिलाओं को अपने शिशुओं को स्तनपान आदि कराने की सुविधा दी गयी. इसके बाद सुविधा बंद हो गयी. इसके लिए अलग से प्रबंधन ने बेड सहित कई सामान खरीदे थे. यहां आने वाले परिजन सुविधा नहीं मिलने से खासे नाराज हैं.
विभाग में 70 बेड और चिकित्सक मात्र पांच
शिशु रोग विभाग में 60 बेड के साथ एनआइसीयू में अलग से 10 बेड हैं. इस तरह कुल 70 बेड हैं, लेकिन चिकित्सक काफी कम हैं. नौ चिकित्सकों की जगह पर मात्र पांच कार्रयत हैं. सीनियर चिकित्सक डॉ एके सिंह इसी माह (दिसंबर) में रिटायर होने वाले हैं. ऐसे में चिकित्सकों की संख्या मात्र चार बच जायेगी. ऐसे में 24 घंटे बच्चों की निगरानी भी कठिन हो रही है. शिशु रोग विभाग में दवाओं की भारी कमी है. ओपीडी से लेकर इंडोर में बीमार बच्चों को दवाएं नहीं मिल रही हैं. चिकित्सक बाहर से दवा लाने के लिए पर्ची थमा देते हैं.

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