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एक्सक्लूसिव: पिता ने बनाया प्रश्न-पत्र , बेटा बना विश्वविद्यालय टॉपर, जानें पूरा मामला

अशोक कुमारबीबीएमकेयू में एमए संस्कृत के पहले सेमेस्टर में सामने आया मेधा घोटालाधनबाद : बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय के एमए संस्कृत में मेधा घोटाला सामने आया है. संस्कृत के विभागाध्यक्ष डॉ नर्मदेश्वर झा ने सेमेस्टर वन (सत्र 2018-20) के सभी चार पेपर के प्रश्नपत्रों को अंतिम रूप (मॉडरेशन) दिया था, उन्हीं का पुत्र श्रीकांत […]

अशोक कुमार
बीबीएमकेयू में एमए संस्कृत के पहले सेमेस्टर में सामने आया मेधा घोटाला
धनबाद :
बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय के एमए संस्कृत में मेधा घोटाला सामने आया है. संस्कृत के विभागाध्यक्ष डॉ नर्मदेश्वर झा ने सेमेस्टर वन (सत्र 2018-20) के सभी चार पेपर के प्रश्नपत्रों को अंतिम रूप (मॉडरेशन) दिया था, उन्हीं का पुत्र श्रीकांत झा इस परीक्षा में विवि टॉपर हुआ है. श्रीकांत को 8.7 सीजीपीए ग्रेड प्वाइंट के साथ ए प्लस की ग्रेडिंग मिली है. उसका यह अंक इसी विषय में विवि के सेकेंड टॉपर से काफी अधिक है. सेकेंड टॉपर को 7.7 सीजीपीए ग्रेड प्वाइंट ए ग्रेड मिल है. इस पूरे मामले में विवि परीक्षा विभाग खुद को अनजान बता रहा है. परीक्षा नियंत्रक डॉ सत्यजीत कुमार सिंह के अनुसार उन्हें नहीं पता था कि डॉ नर्मदेश्वर झा का पुत्र सेमेस्टर वन की परीक्षा दे रहा है. अगर पता होता तो इन्हें मॉडरेशन के लिए नहीं बुलाया जाता.

पुत्र के मामले में विवि को रखा अंधकार में
परीक्षा संबंधी किसी भी कार्य में शामिल होने से पहले विवि शिक्षकों को शपथ पत्र देना पड़ता है कि उनका सगा-संबंधी इस परीक्षा में शामिल नहीं हो रहा है. इसमें प्रश्न पत्र सेटिंग, मॉडरेशन और मूल्यांकन जैसे कार्य को अति संवेदनशील माना जाता है. इसके बाद भी इस मामले में डॉ झा ने अपने पुत्र के मामले में विवि को अंधेरे में रखा है. इस मामले में उनसे संपर्क नहीं किया जा सका, क्योंकि उनका मोबाइल लगातार बंद आ रहा है.

जुलाई में हुई थी परीक्षा
पीजी सेमेस्टर वन की परीक्षा इसी वर्ष जुलाई महीने में हुई थी. पीजी की विभिन्न विषयों की उत्तर पुस्तिका का मूल्यांकन बीबीएमकेयू में ही हुआ था, जिनके ‌‌स्थायी शिक्षक विवि में हैं. जबकि एमएससी भूगर्भ शास्त्र के साथ एमए मास कॉम और आर्ट एंड कल्चर की उत्तर पुस्तिका का मूल्यांकन दूसरे विवि में करवाया गया था. जबकि एमए संस्कृत की उत्तर पुस्तिका बीबीएमकेयू में जांची गयी थी. पूरे विवि में एमए संस्कृत में एक ही शिक्षक हैं, वह हैं डॉ नर्मदेश्वर झा. नियमत: एमए की कॉपियों को यूजी के शिक्षक नहीं जांच सकते हैं. ऐसे में इसकी पूरी संभावना है कि अपने पुत्र की कॉपियों का मूल्यांकन डॉ झा ने ही किया हो. हालांकि इस मामले में परीक्षा नियंत्रक गोपनीयता का हवाला देते हुए कुछ भी बताने से इंकार कर रहे हैं.

संस्कृत में हैं 12 छात्र
एमए संस्कृत सत्र (2018-20) में 12 छात्र नामांकित है. डॉ नर्मदेश्वर झा के पुत्र श्रीकांत झा का रजिस्ट्रेशन नंबर ए37256 और परीक्षा रोल नंबर 191831157229 है. सत्र 2018-20 में बीबीएमकेयू पीजी विभाग की तीन विषयों संस्कृत, भूगोल और सोशियोलॉजी की पढ़ाई चास कॉलेज, चास में हो रही थी. हालांकि अभी हाल में ही तीनों विषयों को ट्रांसफर कर पीके राय कॉलेज लाया गया है.

क्यों नहीं की जातीं टॉपरों की कॉपियां सार्वजनिक
इस पूरे मामले में सवाल उठता है कि आखिर क्यों टॉपरों की कॉपियां विवि द्वारा सार्वजनिक नहीं की जा रही हैं. अभी तक विवि ने पीजी और यूजी टॉपरों की कॉपियां सार्वजनिक नहीं की गयी है. जबकि राज्य के दूसरे विवि में टॉपर छात्रों की कॉपियां सार्वजनिक की जाती है.

Prabhat Khabar Digital Desk
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